बच्चों ने वृद्ध पिता और नेत्रहीन मां को घर से निकाला, खंडहर हो चुके भवन में वृद्ध दंपती ने लिया आश्रय

गुमला के टोटो में बच्चों ने वृद्ध पिता और नेत्रहीन मां को घर से निकाला
jharkhand news, gumla news, gumla toto news,गुमला का ताजा न्यूज गुमला ; खंडहर घर है. न दरवाजा है. न खिड़की है. कच्ची जमीन है. जहां पुआल बिछाया हुआ है. इसी घर में वृद्ध दंपती बुधराम महली और भुखली महली तीन दिनों से रह रहे हैं. भुखली के चेहरे पर झुर्री है. दोनों आंख से दिखायी नहीं देता. बुधराम के बाल और दाढ़ी सफेद हो गये हैं. दोनों पति-पत्नी लाठी के सहारे कहीं आते-जाते हैं. शौच करने खुले खेत में जाते हैं.
इन दोनों को इनके ही बच्चों ने घर से निकाल दिया है. तीन दिनों से दोनों पति-पत्नी खंडहरनुमा घर में रह रहे हैं. इनका कसूर, बस इतना है. इनके बच्चे शराब पीकर घर में लड़ाई-झगड़ा करते हैं. वृद्ध दंपती ने अपने बच्चों को समझाया. समझाने का परिणाम यह हुआ कि बच्चों ने इन्हें घर से निकाल दिया. वृद्ध होने के कारण बच्चे अक्सर प्रताड़ित भी करते हैं. मामला गुमला शहर से 12 किमी दूर मुरुमसोकरा गांव का है. यह गांव टोटो पंचायत में आता है.
वृद्ध बुधराम और नेत्रहीन भुखली की इस दुर्दशा के संबंध में समाजसेवी हरिनारायण उरांव ने सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गुमला डीसी को ट्वीट कर वृद्ध दंपती की लाचारी व बेबसी की जानकारी दी है. श्री उरांव ने ट्वीट कर कहा है कि वृद्ध दंपती अपने ही घर से बेघर हो गये हैं. इस कड़ाके की ठंड में कैसे रहेंगे. इनके रहने के लिए आवास का प्रबंध करने की मांग की है.
मुरुमसोकरा गांव निवासी बुधराम की उम्र करीब 75 साल और भुखली की उम्र 70 वर्ष है. बुधराम ने कहा कि उनके दोनों बेटे मजदूरी करते हैं. उसी से घर का चूल्हा जलता है. परंतु मजदूरी के पैसे को ये लोग शराब में उड़ा देते हैं. शराब पीने के कारण अक्सर घर में लड़ाई-झगड़ा होता है. तीन दिन पहले घर में बहू के साथ इसी को लेकर विवाद हुआ. इसके बाद बहू ने हमलोगों को घर से निकाल दिया. बुधराम ने कहा कि मेरे नाम से राशन कार्ड है. पेंशन भी मिलता है. इसलिए कुछ बर्तन लेकर घर से निकले.
मेरे नाम से रसोई गैस मिला था. परंतु चूल्हा नहीं है. घर से निकाले जाने के बाद मुखिया और एक व्यक्ति आकर पांच किलो चावल दिया. मेरी पत्नी भुखली देख नहीं सकती है. इसलिए मैं तीन दिन से भात और टमाटर की चटनी बना रहा हूं. जिसे हम दोनों पति -पत्नी खाकर रह रहे हैं. इस ठंड में बेकार पड़े भवन में रहने में परेशानी है. प्रशासन हमें कहीं रहने के लिए जगह दे दो तो अच्छा होता.
भुखली ने बताया कि उसका आंख ठीक था. परंतु सात साल पहले अचानक उसके दोनों आंख की रोशनी चली गयी. इसके बाद से वह देख नहीं पाती है. लाठी के सहारे चलती है. भुखली ने कहा कि बहू जो कहता है. बेटा वही करता है. अपने ही घर पर हम प्रताड़ित हो रहे थे. तीन दिन पहले हमें घर से निकाल दिया तो हम पति-पत्नी गांव के कॉलोनी में बने खंडहर भवन में रह रहे हैं.
पति-पत्नी को घर से निकाले जाने की जानकारी गांव के लोगों को है. परंतु यह घरेलू विवाद होने के कारण कोई मदद नहीं कर रहा है. इधर, बुधराम की बहू ने कहा कि मैंने अपने सास-ससुर को घर से नहीं निकला है. वे दोनों खुद जुदा (अलग रहने) हो गये और गांव में ही एक भवन में रह रहे हैं. बहू ने कहा कि उसके पति केरल मजदूरी करने गये हैं. पूछने पर की उसका पति कब केरल गया महिला ने कुछ भी नहीं बताया़ वहीं दूसरा बेटा भी घर पर नहीं था़
posted by : sameer oraon
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




