बुढ़वा महादेव मंदिर के 100 साल पुराने पीपल पेड़ की खोह में मिला शिविलंग

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9 गुम 7 में प्राचीन शिविलंग9 गुम 8 में पीपल पेड़ की खोह में शिविलंग है, जो दो सौ वर्ष पुराना है | Prabhat Khabar Network

गुमला के करमटोली में स्थित 100 साल पुराने बुढ़वा महादेव मंदिर की महिमा और इतिहास जानें. पीपल के पेड़ की खोह में स्थापित है यह प्राचीन शिवलिंग.

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गुमला: झारखंड के गुमला शहर के करमटोली मुहल्ला में 100 साल से अधिक पुराना बुढ़वा महादेव मंदिर है. यह मंदिर जितना पुराना है. इसका इतिहास भी उतना ही अनोखा है. 100 साल से अधिक पहले पीपल पेड़ की खोह में शिविलंग निकला था. यह शिविलंग आज बड़ा हो गया है. जब पेड़ की खोह में शिविलंग निकला था तो लोगों ने श्रद्धा से श्रमदान कर खपड़ा का छोटा सा मंदिर बनाया था. लेकिन मंदिर के प्रति लोगों की बढ़ती श्रद्धा व विश्वास को देखते हुए स्थानीय लोगों ने पुराने खपड़ानुमा मंदिर को तोड़कर पक्का मंदिर का निर्माण किया है. यहां दिल से मांगी मुराद पूरी होती है. जिसकी भी इच्छी पूरी होती है. वह जरूर मंदिर में आकर पूजा पाठ नियमति करता है.

बैगा को सपनें में आये थे भगवान

करमटोली स्थित बुढ़वा महादेव मंदिर आज शिव भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बन गया है. हर सावन माह, शिवरात्रि व अन्य उत्सवों पर यहां शिव भक्तों का तांता लगा रहता है. मंदिर के बारे में कहा जाता है की 100 वर्ष पूर्व करमटोली गांव के एक बैगा पहान को रात्रि में सपना आया था कि पीपल के पेड़ के खोह में एक शिविलंग है. वहां पूजन शुरू करो.

शिवलिंग मिलने की खबर से जुटने लगे ग्रामीण

प्रात: काल में जब वह बैगा वहां पहुंचा तो सही में शिविलंग को पाया. इसकी जानकारी उसने ग्रामवासियों सहित गुमला शहर के मुरारी प्रसाद केशरी, करमटोली के मुखिया बालकराम भगत, सोहर महतो, मधुमंगल बड़ाइक सहित कई लोगों को दी. सूचना पाकर मुरारी केशरी (अब स्वर्गीय) ने अपने मित्र तेजपाल साबू व गौरीशंकर साव को लेकर उक्त स्थान पर गये और सूचना को सही पाया. तब उन्होंने करमटोली के मुखिया को साथ लेकर और भी लोगों को एकित्रत किया.

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मंदिर के लिए एक एकड़ 35 दान

लोगों के साथ बैठक कर खपड़ानुमा मंदिर का निर्माण कर पूजा पाठ शुरू करायी. हिमांशु केसरी ने बताया कि स्वर्गीय मुरारी केसरी ने ही अपने खर्च से मंदिर, आने जाने के लिए रास्ता व मंदिर के पास कुआं का निर्माण करवाया था. मंदिर के लिए एक एकड़ 35 डिसमिल जमीन भी दान कर दी. अब गांव के लोगों द्वारा मंदिर की व्यवस्था अपने हाथ में ले लिया है. वर्तमान में मंदिर की एक कमेटी बनाकर मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है.


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दुर्जय पासवान

लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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