जनता की फरियाद, पानी दे प्रशासन

Published at :13 Apr 2016 8:13 AM (IST)
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जनता की फरियाद, पानी दे प्रशासन

दुर्जय पासवान गुमला : गुमला जिले में जल संकट गहरा गया है. लगभग 11 मीटर जलस्तर नीचे चला गया. गांव से लेकर शहर तक जल संकट है. लाइफ लाइन कहे जाने वाली सभी बड़ी नदियां सूख चुकी है. सबसे बुरा हाल गुमला शहर का है. नागफेनी जलापूर्ति योजना पांच दिन से ठप है. पंप मशीन […]

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दुर्जय पासवान
गुमला : गुमला जिले में जल संकट गहरा गया है. लगभग 11 मीटर जलस्तर नीचे चला गया. गांव से लेकर शहर तक जल संकट है. लाइफ लाइन कहे जाने वाली सभी बड़ी नदियां सूख चुकी है. सबसे बुरा हाल गुमला शहर का है. नागफेनी जलापूर्ति योजना पांच दिन से ठप है.
पंप मशीन में खराबी आयी है, जिसकी मरम्मत नहीं हुई है. इससे शहर में पानी सप्लाई बंद है. पानी नहीं मिलने से हाहाकार मच गया है. लोग दो बाल्टी पानी के लिए तरस रहे हैं. जनता पानी मांग रही है. दूसरी तरफ विभाग कमियों का रोना रो रहा है. नगर परिषद व पीएचइडी पानी संकट को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. इधर, जनता सुबह से रात तक पानी के लिए भटक रही है. विधायक व डीसी ने शहर में टैंकर से पानी सप्लाई का निर्देश दिया था, लेकिन नप व पीएचइडी विधायक व डीसी की बातों को नहीं सुन रहे हैं.
ड्राई जोन इलाके, त्रहिमाम मचा : गुमला के कई मुहल्लें ड्राई जोन है. इनमें दुंदुरिया, कदमटोली, चेटर, बड़ाइक मुहल्ला, करमटोली के कुछ इलाके, आजाद बस्ती के कुछ इलाके, सरना टोली के कुछ इलाके, नदी टोली के कुछ इलाके, शास्त्री नगर व खड़िया पाड़ा के कुछ इलाके शामिल हैं.
इन इलाकों में चापानल सफल नहीं है. कुएं हैं, तो वह गरमी के दस्तक के साथ सूख गये. इन मुहल्ले में पानी के लिए त्रहिमाम मचा है.
टैंकर से नहीं मिल रहा पानी: गुमला शहरी क्षेत्र में टैंकर से पानी की सप्लाई करनी थी, लेकिन नगर परिषद अपनी कमाई पर ध्यान दे रहा है. नप टैंकर से पानी बेच रहा है, लेकिन जहां जल संकट है, वहां जनता को पानी नहीं पहुंचा रहा है. नप के पास 20 टैंकर है, जिससे प्रतिदिन 15 से 20 हजार रुपये नप कमा रहा है.
शिकायतों का समाधान नहीं : पानी संकट से निपटने के लिए टोल फ्री नंबर जारी किया गया है. गुमला के पीएचइडी में एक कर्मचारी इसी पर काम कर रहा है. जनता की शिकायत मिलने पर रजिस्टर में उसे दर्ज किया जा रहा है, लेकिन सैंकड़ों शिकायत विभाग के पास पहुंची है, पर उसका समाधान नहीं हो रहा है.
जलमीनार का लाभ नहीं है
वार्ड दो के पार्षद कृष्णा मिश्र ने कहा कि हमारे वार्ड में जलमीनार बनी है, पर कोई उपयोग नहीं. जलमीनार के बगल का मुहल्ला पानी के लिए तरस रहा है. दुंदुरिया बस्ती व टंगराटोली में पानी नहीं है. डीप बोरिंग की मांग की है, पर अभी तक नहीं हुआ.
दूसरे गांव से बुझा रहे प्यास
गुमला जिले में 944 गांव है. इसमें कई ऐसे गांव है, जहां पानी खत्म हो गया है. अपने गांव में पानी खत्म होने के बाद ग्रामीण दूसरे गांव से प्यास बुझा रहे हैं. कारण लाइफ लाइन कहे जाने वाली सभी छोटी बड़ी नदियां सूख चुकी हैं. चापानल, कुएं व तालाब सूख चुके हैं.
पालकोट में सप्लाई पानी बंद
पालकोट प्रखंड में वर्ष 2015 केजुलाई माह से सप्लाई पानी ठप है. लोगों ने कई बार इसकी शिकायत विभाग से की, लेकिन पालकोट के जलापूर्ति केंद्र में मशीन चलाने के लिए मजदूर नहीं है. जिस कारण पानी सप्लाई नहीं हो रही है. लोग मजबूरन निर्झर झरना का पानी पी रहे हैं.
तरस रहे स्कूली बच्चे
बसिया प्रखंड के निर्मला हाई स्कूल ममरला में भारी जल संकट है. एक हजार बच्चे पानी को तरस रहे हैं. स्कूल में चार चापानल हैं. तीन खराब है. एक ठीक है, तो लाल पानी निकलता है. स्कूल के बाहर एक चापानल है. वह भी जवाब दे रहा है. पानी के कारण मिड डे मील बनाने में दिक्कत हो रही है. स्कूल के एचएम फादर मतियस टोप्पो ने पेयजल विभाग से खराब चापानल बनाने की मांग की है.
भूगर्भ रिचार्ज नहीं हो रहा है
जिले में पत्थरों का अवैध उत्खनन, वनों की कटाई, नदियों का सिमटता दायरा व बारिश के पानी की फिजूलखर्जी बढ़ते जल संकट का मुख्य कारण है. पर्यावरण के साथ खिलवाड़ होने से बारिश पर भी असर पड़ा है.
वनों की कटाई का सीधा संबंध बारिश से है. वन धड़ल्ले से काटे जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. नतीजा बारिश कम होने से भूगर्भ रिचार्ज नहीं हो पा रहा है और तेजी से भूगर्भ का जलस्तर घट रहा है. जिला सांख्यिकी विभाग गुमला से प्राप्त वर्षापात पर गौर करें, तो प्रत्येक वर्ष 300 से 400 मिलीमीटर बारिश कम हो रही है.
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