आदिम जनजाति बच्चों का स्कूल बंद

Updated at :28 Oct 2015 1:49 AM
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आदिम जनजाति बच्चों का स्कूल बंद

बिशुनपुर के जेहनगुटुवा में आदिम जनजाति स्कूल है. स्कूल का संचालन एक साल से कागजों पर हो रहा है. 60 आदिम जनजाति बच्चों को स्कूल जाना बंद हो गया. दुर्जय पासवान गुमला : गुमला जिले में विलुप्त प्राय: आदिम जनजाति बच्चों को शिक्षा देने के सरकारी वादे फेल है. गुमला में ‘सब पढ़ें सब बढ़ें’ […]

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बिशुनपुर के जेहनगुटुवा में आदिम जनजाति स्कूल है.
स्कूल का संचालन एक साल से कागजों पर हो रहा है.
60 आदिम जनजाति बच्चों को स्कूल जाना बंद हो गया.
दुर्जय पासवान
गुमला : गुमला जिले में विलुप्त प्राय: आदिम जनजाति बच्चों को शिक्षा देने के सरकारी वादे फेल है. गुमला में ‘सब पढ़ें सब बढ़ें’ जुमला बन कर रह गया है. हम बात कर रहे गुमला से 55 किमी दूर बिशुनपुर प्रखंड के आदिम जनजाति जेहनगुटुवा आवासीय स्कूल का. यहां एक से पांच क्लास तक की पढ़ाई होती थी. असुर, बिरहोर व बिरिजिया जाति के 60 बच्चे पढ़ते थे.
लेकिन एक साल से स्कूल बंद है. सभी बच्चे अब स्कूल न जाकर घर में रहते हैं. इन बच्चों के भविष्य पर प्रश्न चिह्न लग गया है. सबसे चौंकानेवाली बात कि स्कूल बंद है. भवन खंडहर हो गया. लेकिन अभी भी स्कूल के संचालन के नाम पर पैसाें की निकासी की जा रही है.
बिहार की संस्था से एमओयू थी : स्कूल की स्थापना वर्ष 1990 में हुई थी. इसके बाद वर्ष 2006 में आदिवासी कल्याण विभाग रांची से बिहार मुसहर सेवा संघ अनीसाबाद पटना से एमओयू किया गया. तब से स्कूल बिहार की संस्था चला रही थी. संस्था हर साल छात्र के हिसाब से कल्याण विभाग से पैसा भी ले रही है. लेकिन इधर एक साल से संस्था ने स्कूल बंद कर दिया और इसकी जानकारी विभाग को नहीं दी.
ऐसे मामले का खुलासा हुआ : प्रखंड कल्याण पदाधिकारी गणेश राम महतो ने स्कूल का निरीक्षण किया, तो उन्होंने पाया कि स्कूल बंद है. न बच्चे हैं और न शिक्षक. यहां तक कि स्कूल व छात्रावास से सारा सामान गायब है. खिड़की व दरवाजा तक गायब हो गया. श्री महतो ने इसकी जानकारी जिला कल्याण पदाधिकारी को दी. इसके बाद डीडब्ल्यूओ अनिल कुमार स्कूल की जांच किये तो उन्होंने भी स्कूल बंद पाया और इसकी लिखित जानकारी डीसी को दी.
कल्याण आयुक्त को लिखे पत्र : डीसी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कल्याण विभाग रांची के आयुक्त को पत्र लिखते हुए कल्याण विभाग से संचालित आदिम जनजाति स्कूल के बंद होने की जानकारी दी है. यहां बता दें कि कल्याण विभाग के अन्य दो आदिम जनजाति आवासीय स्कूल चैनपुर के महेशपुर, बिशुनपुर के तुसगांव भी एमओयू के माध्यम से एनजीओ द्वारा चलाया जा रहा है. लेकिन ये दोनों स्कूल सही तरीके से चल रहा है.
शिक्षा के लिए धर्म बदल रहे हैं लोग : बिशुनपुर व चैनपुर प्रखंड के पाट इलाके में आदिम जनजाति लोग बच्चों की शिक्षा के लिए धर्म बदल रहे हैं. सरकारी सुविधा व शिक्षा से असुर, बिरहोर व बिरिजिया परिवार वंचित है. इस कारण कई परिवार ने धर्म परिवर्तन कर लिया है.
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