कोंस्टंट ने जमींदारों से मुक्ति दिलायी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Oct 2015 6:16 PM

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कोंस्टंट ने जमींदारों से मुक्ति दिलायी फ्लैग- फादर कोंस्टंट के बारवे क्षेत्र में आगमन का वर्षगांठ मना, फादर पीटर ने कहा 18 गुम 14 में मिस्सा पूजा कराते फादर पीटर तिर्की व अन्य पुरोहित18 गुम 15 में कार्यक्रम में मौजूद ख्रीस्त विश्वासीप्रतिनिधि, चैनपुर(गुमला)फादर कोंस्टंट लिवंस के बताये मार्ग पर चलने से ही ख्रीस्तीय धर्म समाज […]

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कोंस्टंट ने जमींदारों से मुक्ति दिलायी फ्लैग- फादर कोंस्टंट के बारवे क्षेत्र में आगमन का वर्षगांठ मना, फादर पीटर ने कहा 18 गुम 14 में मिस्सा पूजा कराते फादर पीटर तिर्की व अन्य पुरोहित18 गुम 15 में कार्यक्रम में मौजूद ख्रीस्त विश्वासीप्रतिनिधि, चैनपुर(गुमला)फादर कोंस्टंट लिवंस के बताये मार्ग पर चलने से ही ख्रीस्तीय धर्म समाज का समग्र विकास होगा. फादर लिवंस ख्रीस्तीयों के न केवल मार्ग दर्शक थे, बल्कि छोटानागपुर में रहनेवाले ख्रीस्तीय समाज के उद्धारक भी थे. फादर लिवंस यदि यहां नहीं आये होते, तो शायद हम भी नहीं होते. आज हमें उन्हें आदर्श मान कर उनके बताये मार्गों पर चलने की जरूरत है. उक्त बातें डीन फादर पीटर तिर्की ने रविवार को चैनपुर के बेंदोरा स्थित लकड़ाटोली टोंगरी में फादर लिवंस के आगमन के वर्षगांठ के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कही. उन्होंने फादर लिवंस की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म बेल्जियम के एक छोटे से गांव मोरसलेद में 11 अप्रैल 1856 को हुआ था. लिवंस को बाल्य अवस्था में ही ईश्वर के प्रति बड़ी आस्था थी. ईश्वरीय शक्ति की बदौलत वे ख्रीस्तीय धर्मसमाज की सेवा के लिए पुरोहित बने. इसके बाद 28 अक्तूबर 1880 में वे पहली बार बेल्जियम से भारत आये. लिवंस ख्रीस्तीयों के शोषण के खिलाफ जमींदारों के खिलाफ आवाज उठाना शुरू किया. अधिकार यात्रा के दौरान लिवंस को कई कठिनाईओं का सामना करना पड़ा. बावजूद वे हिम्मत नहीं हारे और ख्रीस्तीयों को जमींदारों से मुक्ति दिलायी. फादर पंखरासियुस केरकेट्टा ने कहा कि फादर लिवंस छोटानागपुर में जब पहली बार आये थे, तो उन्होंने एक वाक्य कही थी आग धधकती रहे. यह प्रतीक सचमुच में हमारे ख्रीस्तीय समुदाय के लिए दिल को छूने वाली है. काफी संघर्षों के बाद हमें हमारा अधिकार मिला है. जिसे जीवंत रखने की जरूरत है. इससे पूर्व डीन फादर पीटर तिर्की की अगुवाई में पवित्र मिस्सा बलिदान अर्पित किया गया. लिवंस की जीवनी पर झांकी प्रस्तुत की गयी: विभिन्न गांवों से पहुंचे विश्वासियों ने फादर लिवंस की जीवनी से संबंधित झांकी का मंचन किया. साथ ही आकर्षक आदिवासी नृत्य प्रस्तुत किया. कार्यक्रम में फादर आनंद, फादर प्रकाश, फादर राजेंद्र, फादर अगस्तुस, फादर रजत, फादर ग्रेगोरी, फादर निकोलस, फादर रॉबिन, फादर माइकल, फादर लाजरूस, फादर एनोसेट, फादर सुमन, फादर कोसमोस, फादर अशोक, फादर जेरोम, फादर राजेंद्र खेस, फादर मनोहर, फादर निकोलस, सिस्टर बेरनादेत सहित सैकड़ों की संख्या में ख्रीस्तीय विश्वासी उपस्थित थे.

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