कार्तिक उरांव : जेपी आंदोलन में डरे नहीं, हारने के बाद जीतकर ही दम लिया

Updated at : 10 Nov 2019 10:15 PM (IST)
विज्ञापन
कार्तिक उरांव : जेपी आंदोलन में डरे नहीं, हारने के बाद जीतकर ही दम लिया

दुर्जय पासवान, गुमला गुमला जिले में जनता के दिलों पर राज करने वाले सफल नेता स्वर्गीय कार्तिक उरांव हैं. आज वे हमारे बीच नहीं हैं. लेकिन आज भी उनका नाम झारखंड व बिहार राज्य की राजनीति में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है. उनके नाम से कई नेता आज भी राजनीति कर रहे हैं. […]

विज्ञापन

दुर्जय पासवान, गुमला

गुमला जिले में जनता के दिलों पर राज करने वाले सफल नेता स्वर्गीय कार्तिक उरांव हैं. आज वे हमारे बीच नहीं हैं. लेकिन आज भी उनका नाम झारखंड व बिहार राज्य की राजनीति में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है. उनके नाम से कई नेता आज भी राजनीति कर रहे हैं. उन्होंने अपने राजनीति जीवन में जो छवि बनायी थी. उसे युगो-युगों तक आदर्श माना जायेगा.

छोटानागपुर के काला हीरा के नाम से विख्यात स्वर्गीय कार्तिक उरांव तीन बार सांसद व एक बार विधायक रहे. 1967, 1971 व 1980 के लोकसभा चुनाव में वे सांसद बने. वहीं, 1977 के चुनाव में बिशुनपुर विधानसभा से विधायक चुने गये. बिशुनपुर के वे पहले विधायक थे. जबतक वे रहे, बिशुनपुर क्षेत्र में कांग्रेस मजबूत रही. लेकिन उनके निधन के बाद से बिशुनपुर क्षेत्र में कांग्रेस धीरे-धीरे खत्म होने लगी.

1977 के लोकसभा व विधानसभा चुनाव भी इतिहास में दर्ज हैं. जब लोकनायक जयप्रकाश नारायण के सत्ता विरोधी आंदोलन के कारण स्व कार्तिक उरांव को 1977 में लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. बीएलडी के लालू उरांव ने कांग्रेस के कार्तिक उरांव को हराया था. लालू को 142274 वोट मिले थे. वहीं, कार्तिक उरांव को 77391 वोट मिले थे. जेपी आंदोलन के कारण कार्तिक उरांव की बुरी तरह हार हुई थी. लेकिन इस बार के बाद भी वे निराश नहीं हुए थे.

वे राजनीति में जमे रहे. जनता के बीच बने रहे. 1977 के लोकसभा चुनाव के छह माह बाद विधानसभा चुनाव हुआ. जिसमें कार्तिक उरांव बिशुनपुर विधानसभा से चुनाव लड़े. इसमें उन्होंने जीत दर्ज की और बिशुनपुर विधानसभा से पहले विधायक बनकर इतिहास बना दिया. सत्ता विरोधी चले जेपी आंदोलन में भी कार्तिक उरांव ने कांग्रेस को मजबूती प्रदान की थी. इसके बाद पुन: 1980 में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच लोकसभा चुनाव हुआ था.

कार्तिक उरांव लोहरदगा संसदीय सीट से पुन: 1980 में चुनाव लड़े और भारी मतों से विजयी रहे. लोकसभा जीतने के बाद उन्होंने 1980 में विधायक पद से इस्तीफा दे दिया. विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने वह मुकाम हासिल किया. जिसे आज के नेता आदर्श मानते हैं.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola