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गुमला : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा- आदिवासी अपना टाइटल मुंडा, उरांव खुलकर बताएं, डरे नहीं

Updated at : 02 Feb 2019 7:18 PM (IST)
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गुमला : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा- आदिवासी अपना टाइटल मुंडा, उरांव खुलकर बताएं, डरे नहीं

दुर्जय पासवान, गुमला अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का गुमला के ऑडिटोरियम स्टेडियम में दो दिवसीय झारखंड प्रांत जनजातीय छात्र जुटान का उद्घाटन शनिवार को राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने दीप जलाकर किया. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड राज्य की सवा तीन करोड़ की आबादी में लगभग एक करोड़ आबादी जनजातियों की है. राज्य के […]

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दुर्जय पासवान, गुमला

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का गुमला के ऑडिटोरियम स्टेडियम में दो दिवसीय झारखंड प्रांत जनजातीय छात्र जुटान का उद्घाटन शनिवार को राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने दीप जलाकर किया. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड राज्य की सवा तीन करोड़ की आबादी में लगभग एक करोड़ आबादी जनजातियों की है. राज्य के संविधान के पांचवीं अनुसूची में जनजातीय शामिल हैं, जो हमारे भारत देश के एक अभिन्न अंग हैं.

जनजातीय समुदाय के गीत-नृत्य मनमोहक हैं. भाषा, संस्कृति अलग और लुभावन है. अन्य समुदाय के लोग भी इससे काफी आकर्षित हैं. यहां जनजातीय समुदाय के लोग करमा हो या सरहुल एक साथ झूमते हैं. नाचते हैं और गाते हैं. परंतु जनजातीय समुदाय की सरलता और निष्कलंकता के कारण ठगे जाते हैं और गलत रास्ता अख्तियार कर लेते हैं.

राज्‍यपाल ने कहा कि ऐसे लोग जागरूक हों. समाज के लोगों का भविष्य उज्‍जवल करने के लिए बेटा-बेटी में अंतर किये बिना दोनों को सामान शिक्षा दें. राज्यपाल ने कहा कि आदिवासी भूखे मर जाते हैं. पर भीख नहीं मांगते. ईमानदारी से खेतीबारी, मजदूरी करते हैं. पर दूसरे के सामने हाथ नहीं फैलाते हैं. आदिवासी प्रकृति के पूजक हैं. आदिवासी सरल और निष्कलंक हैं और जरूरत पड़े तो भगवान बिरसा मुंडा, जतरा टाना भगत, सिदो-कान्हू जैसे वीर सपूत एवं अपनी धरती के लिए जान देने वाले भी हैं. खुद को ऐसा बनायें कि लोग आपकी मिशाल दें.

राज्यपाल ने कहा कि आदिवासी होने पर चिंता नहीं गर्व करें. आज यदि आदिवासी समाज के लड़के-लड़कियों से उसका नाम पूछा जाता है तो वे नाम के साथ अपना टाइटल कुमार व कुमारी बताते हैं. यदि आप आदिवासी हैं तो अपने नाम के साथ मुंडा, उरांव जो भी टाइटल हो. उसे बताइए. कार्यक्रम में अनुसूचित जनजाति आयोग भारत सरकार के राष्ट्रीय अध्यक्ष नन्द कुमार साय, अभाविप के राष्ट्रीय सहसंगठन मंत्री केएन रघुनन्दन, पद्मश्री अशोक भगत, अभाविप के प्रांत मंत्री रोशन कुमार सिंह, कार्यक्रम महामंत्री मिशिर कुजूर, रांची छात्र संघ की अध्यक्ष नेहा मारडी, रांची छात्र संघ के उपाध्यक्ष कुणाल शर्मा, मीडिया प्रभारी कमलकांत दुबे सहित 24 जिला के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.

जनजातियों के उत्कर्ष व उन्नयन में अभाविप की भूमिका अहम : नंदकुमार

अजजा आयोग भारत सरकार के राष्ट्रीय अध्यक्ष नंदकुमार साय ने कहा कि जनजातीय समुदाय के उत्कर्ष और उन्नयन में विद्यार्थी परिषद काफी अहम भूमिका निभा रहे हैं. साय ने कहा कि जनजातीय जीवन का अपना अलग महत्व है. परंतु कई जगहों पर जनजातीय समुदाय मुस्लिम हो गये हैं. जिस प्रकार से हमारा भारत देश विविधताओं से भरा पड़ा है. उसी प्रकार जनजातीय समुदाय भी अनेक विविधताओं से भरा है. आने वाले समय में जनजातीय समुदाय ही नवनिर्माण करेगा. इसके लिए जनजातीय समुदाय को जागरूक होना होगा. खुद को संगठित और मजबूत बनान होगा.

साथ चलने से ही भारत देश बनेगा विश्वगुरू : केएन रघुनंदन

अभाविप के राष्ट्रीय सहसंगठन मंत्री केएन रघुनंदन ने कहा कि जनजातीय क्षेत्र में अभाविप द्वारा किया जा रहा कार्य सराहनीय है. कार्यक्रम में छात्रों से अधिक संख्या छात्राओं की है. जो इस बात का सबूत है कि आने वाला समय महिलाओं का होगा. आने वाले समय में पार्लियामेंट में 70 प्रतिशत महिलायें होंगी और देश को विकास की ऊंचाईयों तक ले जायेंगी. उन्होंने कहा कि अभाविप और जनजातीय समुदाय में कई समानतायें हैं. दोनों को अपनी धरती से प्यार है.

जनजातियों की भाषा, संस्कृति सारी दुनिया से अच्छी : पद्दमश्री अशोक भगत

विकास भारती बिशुनपुर के सचिव पद्दमश्री अशोक भगत ने कहा कि जनजातीय समुदाय को समाज और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम अब हो रहा है. जनजातीय समुदाय के लोगों को स्वार्थी लोग अपनी लोभ-लालच के कारण नाश करने का काम किया है. जनजातीय समुदाय की भाषा, कला, परंपरा, संस्कृति सारी दुनिया से अच्छी है. इसे दूसरे लोग भी सीखने को लालायित हैं. इस देश का दुर्भाग्य है कि इतिहास में इसे छुपाकर रखा गया. हमारे सीधेपन और भोलेपन के कारण लोग दबाते रहे हैं. पर अब दबना नहीं है. नये जमाने में नयी चुनौतियां हैं. पर आगे बढ़ना है.

जनजातियों ने अपने स्वाभिमान व संस्कृति को धरोहर की तरह संभाल रखा है : नाथू गाड़ी

अभाविप के प्रांत अध्यक्ष नाथू गाड़ी ने कहा कि जनजातीय समुदाय के लोग अपने स्वाभिमान और संस्कृति को धरोहर के रूप में संभालकर रखा है. परंतु देखा जा रहा है कि कहीं-कहीं पश्चिमीकरण हावी होता जा रहा है. लोग अपनी परंपरा व सभ्यता को भुलाते जा रहे हैं. विभिन्न तरह से जनजातीय समुदाय पर हमला हो रहा है. वे ठगे जा रहे हैं. हमें अपनी भाषा, संस्कृति और परंपरा को संरक्षित रखना है.

जुटान कार्यक्रम जनजातीय छात्रों के लिए मील का पत्थर साबित होगा : स्पीकर

अभाविप के तत्वावधान में आयोजित दो दिनी प्रांत जनजातीय छात्र-छात्रा जुटान में झारखंड में राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना करने, छात्रवृत्ति में वृद्धि एवं नेट व पीएचडी इंजिनियरिंग द्वारा चयनित विद्यर्थियों के लिए छात्रवृत्ति का प्रावधान करने, प्राथमिक शिक्षा में मातृ एवं क्षेत्रीय भाषा को सम्मिलित करने, पूरे प्रदेश में सभी मूलभूत सुविधाओं के साथ जनजातीय छात्रावासों का निर्माण कराने और जड़ी-बुटियों की महत्ता समझते हुए उसका उपयोग करने का प्रस्ताव पारित किया गया.

जाति और धर्म से भी ऊपर मातृभूमि है : सागर

कॉपरेटिव बैंक रायडीह के प्रबंधक सह जेएफए के उपाध्यक्ष सागर उरांव ने कहा कि अभाविप राष्ट्रीय विचारधारा के संवाहक के रूप में काम कर रहा है. राष्ट्र के पुननिर्माण में इनकी भूमिका अहम होगी. उन्होंने कहा कि जाति और धर्म से भी ऊपर उठकर कुछ है तो वह है मातृभूमि. अभाविप और जनजातीय समुदाय में मातृभूमि के प्रति समानता है. अभाविप अपनी मातृभूमि के लिए जान दे सकती है. उसी प्रकार जनजातीय समुदाय भी अपनी धरती के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर सकते हैं.

छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शनी से किया झारखंड दर्शन

कार्यक्रम में शहीद नयनम कुजूर प्रदर्शनी लगाया गया. प्रदर्शनी के माध्यम से जुटान में शामिल छात्र-छात्राओं से झारखंड दर्शन कराया गया. प्रदर्शनी में वीर सपूतों, राजनेताओं, राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों सहित जनजातीय समुदाय के परंपरा व संस्कृति से जुड़ी तस्वीरों सहित पर्यटन व दार्शनिक स्थलों की तस्वीरें लगायी है.

कार्यक्रम में अभाविप के प्रांत मंत्री रोशन कुमार सिंह, कार्यक्रम महामंत्री मिशिर कुजूर, रांची छात्र संघ की अध्यक्ष नेहा मारडी, शशिप्रिया बंटी, रोहित मंत्री, पद्दम साबू, अजय पांडेय, मंजूला एक्का, जितवाहन बड़ाइक, समरीता बड़ाइक, मुकेश राम, दीपज्योति गोप, निर्मल सिंह, रविंद्र सिन्हा, सत्यजीत कुमार, संदीप प्रसाद, गौतम नायक, विमल बड़ाइक, सुधीर नंद, अरविंद मिश्रा, काजल कुमार, अशोक त्रिपाठी, गुमला छात्र संघ अध्यक्ष कुणाल शर्मा, देवेंद्र कुमार उरांव सहित पांच हजार से भी ज्यादा विद्यार्थी उपस्थित थे.

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