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गुमला : देश के लिए जान देने वाले शहीदों की पत्नियों की इच्छा, उनके गांव में शहीद की प्रतिमा स्थापित हो

Updated at : 04 Jan 2019 11:18 PM (IST)
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गुमला :  देश के लिए जान देने वाले शहीदों की पत्नियों की इच्छा, उनके गांव में शहीद की प्रतिमा स्थापित हो

दुर्जय पासवान, गुमला : जिले के चैनपुर ब्लॉक में आयोजित सम्मान समारोह में आये भूतपूर्व सैनिक व वीर नारियों से प्रभात खबर ने बात की. सभी ने अपनी बात को खुलकर रखी. किसी ने अपने पति व बेटे के शहादत के बाद स्टैच्यू नहीं बनाये जाने पर चिंता प्रकट करते हुए सरकार व प्रशासन से […]

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दुर्जय पासवान, गुमला :
जिले के चैनपुर ब्लॉक में आयोजित सम्मान समारोह में आये भूतपूर्व सैनिक व वीर नारियों से प्रभात खबर ने बात की. सभी ने अपनी बात को खुलकर रखी. किसी ने अपने पति व बेटे के शहादत के बाद स्टैच्यू नहीं बनाये जाने पर चिंता प्रकट करते हुए सरकार व प्रशासन से स्टैच्यू स्थापित करने की मांग की है. तो किसी ने सेनाध्यक्ष से मिलने व उनसे सम्मान लेने पर खुशी प्रकट की.
गांव का विकास नहीं होने पर जताई चिंता
शहीद नायमन कुजूर की पत्नी ने अपने गांव का विकास नहीं होने पर चिंता प्रकट करते हुए गुमला प्रशासन से चैनपुर प्रखंड के उरू बारडीह गांव में शौचालय, पीने का पानी, बिजली की व्यवस्था करने की मांग की है. कार्यक्रम में आये रांची ललगुटुवा महुआटोली के पूर्व आर्मी हवलदार दिलीप कुमार मिंज जो सड़क हादसे में घायल हो गये थे. वे सेना में डयूटी के दौरान घायल हुए.
2016 में रिटायर होने के बाद से घर में हैं. उन्होंने कहा कि पहली बार सेनाध्यक्ष से मिलने का अवसर मिला है. यह हमारे लिए खुशी का पल है. रांची डीपाटोली बूटीमोड़ के नायाब सूबेदार ललन राय ने कहा कि वे हादसे में घायल हुए थे. सन 2000 में रिटायर हुए हैं. आज मुझे यहां आमंत्रित किया गया है. हमारे लिए खुशी का पल है. लोहरदगा जिला के डुमरी गांव निवासी पूर्व आर्मी हवलदार कमल कुजूर ने कहा कि वे 2003 में रिटायर हुए हैं.
सरकारऔर प्रशासन का ध्यान उनके गांव पर नहीं
यहां मुझे सेनाध्यक्ष के हाथों पुरस्कृत किया गया. यह खुशी का पल है. गोली से घायल हुए रांची जिला के जरगा गांव निवासी फगुवा उरांव 2018 में रिटायर हुए हैं. पाकिस्तान से युद्ध के दौरान वे घायल हुए थे. उनके थाई में गोली लगी थी. उन्होंने कहा कि एक वह पल था जब पाकिस्तान को हराया और आज सेनाध्यक्ष से मिलने की खुशी है. शहीद नयमन कुजूर की पत्नी वीणा तिग्गा ने कहा कि सरकार व प्रशासन का ध्यान उनके गांव पर नहीं है.
गांव में स्टैच्यू स्थापित करने की मांग की है. शहीद बिंजुस खलखो की पत्नी मेरी खलखो ने कहा कि आज खुशी है कि उनके पति के कारण उन्हें सेनाध्यक्ष सम्मानित कर रहे हैं. शहीद रामप्रती ठाकुर की पत्नी सनकलिया देवी ने कहा कि उनका घर गढ़वा जिले के मझिआंव है. मेरे पति भी अलबर्ट एक्का की तरह 1971 के युद्ध में भाग लिये थे. जहां वे शहीद हो गये. उनका शव भी अंतिम बार नहीं देख सकी. लेकिन आज तक मेरे पति का स्टैच्यू गांव में नहीं लगा है. मेरा बेटा बृजमोहन ठाकुर भी एक्स आर्मी है.
पलामू के एच कैप्टर आरआर पांडेय जो 1971 के युद्ध में शामिल रहे हैं. आज भी वे स्वस्थ हैं. उनका बेटा संतोष कुमार पांडेय ने कहा कि मुझे खुशी है कि मेरे पिता के बाद मैं भी सेना में भरती होकर देश की सेवा कर रहा हूं. सिमडेगा जिला के पीड़ाटांगर के शहीद जॉन विटो किड़ो की पत्नी बेरनाथेत किड़ो ने कहा कि मेरे पति के शहादत के बाद वीर चक्र प्राप्त हुआ.
जीते जी बने पति का गांव में स्मारक
लेकिन आज तक गांव में एक स्टैच्यू नहीं बना है. शहीद नायक विश्वा केरकेटटा जम्मू कश्मीर में ओपी रक्षक के दौरान शहीद हुए थे. उन्हें मरणोपरांत कृति चक्र मिला. उनकी पत्नी उर्मिला केरकेटटा ने कहा कि मेरे जीते जी मेरे पति का गांव में स्मारक बन जाये. हवलादार तियोफिल तिड़ू को मरणोपरांत शौर्य चक्र मिला था. उनकी पत्नी जो नामकुम में रहती है. उन्होंने अपने पति का स्टैच्यू स्थापित करने की मांग की है.
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