हर धर्म, हर समाज के लोगों का सम्मान करें

Published at :25 Dec 2018 1:13 AM (IST)
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हर धर्म, हर समाज के लोगों का सम्मान करें

गुमला : शांति, प्रेम, सत्य व अहिंसा के राजकुमार बालक यीशु के जन्मोत्सव की खुशी में गुमला जिला की सभी 38 पल्ली सराबोर है. सोमवार की रात को सभी चर्च में पूजा-पाठ की गयी. चरनी की आशीष की गयी. बालक यीशु के बाल रूप का ख्रीस्तीय विश्वासियों ने चुंबन किया. रात को मुख्य समारोह गुमला […]

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गुमला : शांति, प्रेम, सत्य व अहिंसा के राजकुमार बालक यीशु के जन्मोत्सव की खुशी में गुमला जिला की सभी 38 पल्ली सराबोर है. सोमवार की रात को सभी चर्च में पूजा-पाठ की गयी. चरनी की आशीष की गयी. बालक यीशु के बाल रूप का ख्रीस्तीय विश्वासियों ने चुंबन किया. रात को मुख्य समारोह गुमला के संत पात्रिक महागिरजाघर में हुआ.
यहां रात्रि जागरण मिस्सा गुमला धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष बिशप पौल अलविस लकड़ा ने कराया. उन्होंने अपने संदेश में कहा कि हमारी आस्था के अनुसार प्रभु यीशु ईश्वर के पुत्र हैं, जो मानव बन कर इस धरती पर आये और मानव जाति की गरिमा बढ़ाया.
प्रभु यीशु ने इस धरती पर मानव जाति को प्रेम और शांति का संदेश दिया. हम सभी को प्रभु यीशु के बताये मार्ग का अनुसरण करने की जरूरत है. वर्तमान समय में एक देश दूसरे देश और एक धर्म के लोग दूसरे धर्म पर हावी होना चाहता है, जो मानव जाति के लिए घातक है, इसलिए सभी धर्म और धर्म के लोगों का सम्मान करें.
कभी किसी की आलोचना न करें. हमेशा लोगों की उन्नति और खुशी की सोचे. बिशप ने कहा कि ईश्वर ने मनुष्य को पापमुक्त किया, क्योंकि ईश्वर स्वयं मनुष्य के रूप में धरती पर जन्म लिये और मनुष्य को पाप से मुक्त किया और ईश्वरी राह बतायी. लेकिन वर्तमान समय में स्थिति कुछ और ही है. युवा वर्ग नशापान की गिरफ्त में फंस कर अपना जीवन बर्बाद करने में लगा है.
नशापान के कारण ही अपराध तक हो रहे हैं. इस पर रोक लगाने की जरूरत है. युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ें. इसकी शुरुआत अपने घर से ही करें, ताकि युवा वर्ग समाज की मुख्यधारा से जुड़ कर घर-परिवार, समाज और देश के उन्नति में अपना अहम योगदान दे सके.
बेचारों के लिए बेचारा यीशु : फादर रेमिस टोप्पो
मांझाटोली पल्ली के फादर रेमिस टोप्पो ने कहा कि सुदूर ठंड प्रदेश में ख्रीस्तोफर नामक पति अपनी पत्नी व बेटा के साथ रहता था. पर ईश्वर का शरीर धारण रूपी रहस्य पर विश्वास नहीं करता था. उसकी पत्नी ने लाख कोशिश की, पर समझा नहीं सकी.
ख्रीस्त जन्म पर्व के रात्रि जागरण समारोह में शामिल होने के लिए गिरजा घर ले जाना चाहा, पर वह नहीं गया. विवश मां-बेटा पर्व मनाने चले गये. कड़ाके की ठंड थी. बर्फ जम गया था. ख्रीस्तोफर सो रहा था. अचानक खिड़की की कांच में किसी के जोर से टकराने की आवाज आयी. बाद में ठंड से फड़फाड़ती चिड़िया की आवाज आ रही थी.
वह कंबल ओढ़ कर बाहर निकला और चिड़िया की दयनीय स्थिति को देख उसे मुर्गी घर में बुलाना चाहा. उसे अंदर बुलाने के लिए उसने अपनी आवाज का प्रयोग किया. दाना दिया. डंटा से डरा कर भीतर ले जाना चाहा, पर चिड़िया हर बार उससे दूर भागती गयी, तब उसने अपने एक पालतू कबूतर को बाहर रख दिया और अंदर से देखता रहा.
दयनीय चिड़िया कबूतर के पीछे-पीछे जाते घर में घुस गयी. तब ख्रीस्तोफर ने यीशु के बारे में पढ़ कर कहा कि इसलिए हे ईश्वर तुझे मनुष्य बनना पड़ा कि हम तेरे पीछे-पीछे स्वर्ग जा सके. आज पूरी कलीसिया काथलिक हो या अन्य ईश्वर के शरीर धारण का जन्मोत्सव मना रही है. यीशु मनुष्य बन कर जन्मे, धरती पर आये और जिस ढंग, परिस्थिति में आये, वह हमारे लिए चिंतन का विषय बन जाता है.
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