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गुमला नगर परिषद के चुनाव : चुनाव तक खायेंगे बोथल भात

Updated at : 28 Mar 2018 2:32 AM (IST)
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गुमला नगर परिषद के चुनाव : चुनाव तक खायेंगे बोथल भात

दुर्जय पासवान वाह रे कुर्सी : अब बाबा चुनाव जीतायेंगे, जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, चुनावी तपिश भी तेज हो रही गुमला : चुनाव तक बोथल भात खायेंगे. गरम भात खायेंगे, तो दिमाग को और गरम कर देगा. सुगर का पेसेंट हैं. आटा की रोटी भी ठंडा ही खायेंगे. यह कोई जुमला नहीं, बल्कि उम्मीदवारों […]

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दुर्जय पासवान
वाह रे कुर्सी : अब बाबा चुनाव जीतायेंगे, जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, चुनावी तपिश भी तेज हो रही
गुमला : चुनाव तक बोथल भात खायेंगे. गरम भात खायेंगे, तो दिमाग को और गरम कर देगा. सुगर का पेसेंट हैं. आटा की रोटी भी ठंडा ही खायेंगे. यह कोई जुमला नहीं, बल्कि उम्मीदवारों के बोल हैं. नगर परिषद के चुनाव की तपिश में सभी उम्मीदवार जल रहे हैं. जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, चुनावी तपिश भी तेज हो रही है. गर्मी के अहसास उन उम्मीदवारों से पूछिये, जो सुबह से शाम तक वोट के चक्कर में घूम रहे हैं.
अब बात करेंगे एक फोन कॉल की. दिन मंगलवार सुबह करीब 7.30 बज रहे थे. एक उम्मीदवार सिसई रोड में खड़े थे.
उन्हें फोन आया. नाश्ता करने आइयेगा या नहीं. उम्मीदवार ने कहा, ठेला के पास खड़े हैं. दुकानदार ने धुसका निकाल कर रखा है. यहीं नाश्ता कर लेते हैं. फिर घर वाली ने पूछा. दोपहर का खाना घर में ही खाइयेगा न. उम्मीदवार कुछ लोगों से घिरा हुए थे. वोट की बात चल रही थी. वह चिढ़ गये. उन्होंने पत्नी को कहा. रात का भात बचल है, तो उसे ही खायेंगे. पहले से दिमाग गरम है. गरम भात खाकर दिमाग और गरम हो जाता है. बोथल भात खायेंगे, तो कुछ दिमाग ठंडा रहेगा. इतने के बाद फोन कट गया और फिर उम्मीदवार वोट कैसे प्राप्त हो, इसे लेकर अपने साथियों से मंत्रणा करने लगाे.
अब बात करते हैं साधु संतों के हवन-यज्ञ की. उत्तराखंड के बाबाओं ने तो हवन-यज्ञ करा दिया. वे अपना दान-दक्षिणा लेकर चले भी गये. बाबा के आशीर्वाद के बाद उम्मीदवार वोट मांगने चुनावी मैदान में कूद पड़े हैं. बाबाओं के आशीर्वाद का फोटो व्हाट्सप ग्रुप में खूब वायरल हो रहा है. यह फोटो वोटरों के पास व्हाट्सप के माध्यम से पहुंच रहा है. अब वोटरों की सुनिये. बात मेन रोड व थाना रोड की है. वोटर चार पांच की संख्या में खड़े थे. वे बोल रहे थे. वाह रे कुर्सी. अब बाबा चुनाव जीतायेंगे. ठीक है, बाबा पर भरोसा है, तो फिर हमारे पास वोट मांगने क्यों आते हैं. इसबार तो छोड़ेंगे नहीं. बाबाओं के शरण में गये उम्मीदवारों को सबक सिखायेंगे. अब बात सोमवार की रात की करेंगे. पालकोट रोड में एक मेडिकल दुकान है. यहां एक लंबे टेबल पर चार लोग बैठे थे.
शिक्षक, समाज सेवी व व्यवसायी थे. बात उत्तराखंड के बाबा के आशीर्वाद की चली. चर्चा में एक शिक्षक महोदय ने पुरानी बात निकाली. एक नेता के सीएम बनने की कहानी बतायी. जिस समय सीएम की कुर्सी के लिए कंडीडेट की चर्चा चल रही थी, उस समय गुमला के उक्त शिक्षक एक वरिष्ठ नेता के दरबार में भाईचारगी के नाते पहुंचे हुए थे. उसी दरबार में एक बाबा आये थे. उन्होंने नेताजी को कहा. आप सीएम बनेंगे, लेकिन हवन-यज्ञ करना होगा. बाबा ने हवन-यज्ञ का खर्च बताया. खर्च की सूची बनी, तो डेढ़ लाख रुपये आया. उन्होंने यज्ञ कराया. खर्च भी किया और सीएम बन गये. बस यही हाल कुछ गुमला में चल रहा है.
बाबा हवन-यज्ञ का खर्च बता कर पैसा लिये और चलते बने. बाबा भी खुश और बाबा का आशीर्वाद मिलने से उम्मीदवार भी खुश. इधर, फिर पुरानी चर्चा बहस में रही. बहस का मुद्दा था प्रधानमंत्री आवास में घूस का फंडा और लूट का खेल. चर्चा गरमा-गरम थी. शहर के एक मुहल्ले की बात थी, जिन्हें पीएम आवास मिला है. वे सात-आठ की संख्या में मजलिस लगा कर बात कर रहे थे.
बातों बात में वोटर बोल रहे थे. मेरा से घूस लिया. अब आओ वोट मांगने, छोड़ेंगे तो नहीं. पहले तो बेइज्जत करेंगे, फिर भगा देंगे. वोटरों का गुस्सा भी जायज है. जबतक हमारे पूर्व प्रतिनिधि पार्षद रहे, गरीबों को भी लूटने से बाज नहीं आये. सबक सिखाने के लिए सभी तैयार बैठे हैं. इतना होने के बाद अब मुझे भी बोलने की आदत है. बस इतना ही कहना है. आपको जनता वोट देती है, ताकि आप पांच साल जनता के लिए काम करें. उम्मीद है, इसबार जो चुनाव जीतेंगे, वे जनता के लिए काम करेंगे.
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