शांति सेना के फरार सदस्य श्रीधर ने भरनो थाना में किया आत्मसमर्पण

Published at :03 Jan 2018 9:18 AM (IST)
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शांति सेना के फरार सदस्य श्रीधर ने भरनो थाना में किया आत्मसमर्पण

वर्ष 2003 से वह फरार चल रहा था, पुलिस उसे खोज रही थी माओवादियों से लड़ने के लिए शांति सेना में शामिल हुआ था. भरनो (गुमला) : भरनो थाना परिसर में मंगलवार को थानेदार धर्मपाल कुमार के समक्ष 14 वर्ष से फरार चल रहे शांति सेना के सदस्य घनश्याम सिंह उर्फ श्रीधर सिंह ने आत्मसमर्पण […]

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वर्ष 2003 से वह फरार चल रहा था, पुलिस उसे खोज रही थी
माओवादियों से लड़ने के लिए शांति सेना में शामिल हुआ था.
भरनो (गुमला) : भरनो थाना परिसर में मंगलवार को थानेदार धर्मपाल कुमार के समक्ष 14 वर्ष से फरार चल रहे शांति सेना के सदस्य घनश्याम सिंह उर्फ श्रीधर सिंह ने आत्मसमर्पण कर दिया. घनश्याम सिंह करंज पंचायत के ओमेसेरा गांव का रहनेवाला है. घनश्याम अपनी पत्नी कुंती देवी, दो बेटी, एक बेटा व पिता राममूर्ति सिंह, भाई मुरारी सिंह, साथी शांति सेना सदस्य कालीचरण साहू व मनोज वर्मा के साथ थाना पहुंचा. थानेदार धर्मपाल कुमार व मनोज वर्मा ने गुलाब फूल देकर पूरे परिवार का स्वागत किया. थानेदार ने बताया कि घनश्याम के विरुद्ध हत्या, लूट, रंगदारी, आर्म्स एक्ट एवं मारपीट के छह मामले कामडारा व भरनो थाना में दर्ज हैं.
अनुसंधान के बाद और मामले सामने आ सकते हैं. पुलिस घनश्याम के परिवार व बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास करेगी. थानेदार के अनुसार वह वर्ष 2003 से वह फरार चल रहा था. शांति सेना सदस्य घनश्याम ने कहा कि परिवार वालों की सलाह व मनोज वर्मा के प्रयास से उसने सरेंडर करने का मन बनाया.
उसने बताया कि वर्ष 1998 में जब गांव में एमसीसी (अब माओवादी) का वर्चस्व था. उसका परिवार गांव में जमींदार की तरह रहता था. उस समय एमसीसी ने करंज पंचायत के आठ लोगों के विरुद्ध फतवा जारी किया था, जिसमें घनश्याम व उसके पिता राममूर्ति सिंह का नाम भी था. तब उसने शांति सेना के तिलेश्वर साहू के गुट में शामिल होकर एमसीसी के खिलाफ हथियार उठाया. तिलेश्वर साहू उस समय प्रदूषण मंत्री थे.
15 अगस्त 2006 को मलादोन गांव में बटकुरी निवासी एमसीसी एरिया कमांडर तेजु मुंडा की गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी. कमांडर की हत्या में उसका साथ कालीचरण साहू भी शामिल था. वर्ष 2003 में कामडारा थाना क्षेत्र के तेतरटोली में हुए मिशनरी नरसंहार में घनश्याम का नाम था. उसने बताया कि वह पुलिस से बचने के लिए पत्नी को लेकर गोवा चला गया. गोवा में 10 वर्ष सरिया फैक्टरी में काम किया. उसके बाद गोवा में ही एक बगान में काम कर गुजर बसर कर रहा था. घनश्याम के तीन बच्चे हैं.
बेटी विभा कुमारी (11), अनिशा कुमारी (9) व बेटा मनीष कुमार (3) है. गोवा से छह माह पहले पूरे परिवार के साथ घनश्याम अपने गांव ओमेसेरा आ गया और घर में रह कर खेती बारी करने लगा. तीनों बच्चों को करंज स्थित सशिविमं में नामांकन कराया. घनश्याम के पिता राममूर्ति सिंह ने बताया कि मेरे बेटे ने एमसीसी से अपने परिवार को बचाने के लिए हथियार उठाया था. वर्षों तक मां, बाप व भाई से दूर रहा. अब उसके सरेंडर करने से खुशी हो रही है.
परिवार के सभी लोग गांव में एक साथ रह कर खेतीबारी करेंगे. मेरा बेटा अब समाज के बीच रहेगा. उन्होने बताया कि जब घनश्याम फरार था, तब भरनो पुलिस घर आकर पूछताछ करती थी. उन्होंने वर्ष 2007 में घर में रखे घनश्याम की एक बंदूक, एक सिंगल शॉट व 25 गोलियां तत्कालीन थानेदार सुधीर कुमार चौधरी को सौंपी थी.
घनश्याम के साथी शांति सेना सदस्य कालीचरण साहू ने कहा कि वर्षों बाद दोस्त लौट कर घर आया है. अब मुख्यधारा में रह कर साथ काम करेंगे. उसके सरेंडर करने से पत्नी व बच्चे काफी खुश हैं.
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