मां के गर्भ में बच्चे की मौत, डॉक्टर ने ऑपरेशन न कर रांची रेफर किया, ममता वाहन में मां ने दम तोड़ा

Published at :20 Aug 2017 5:30 PM (IST)
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मां के गर्भ में बच्चे की मौत, डॉक्टर ने ऑपरेशन न कर रांची रेफर किया, ममता वाहन में मां ने दम तोड़ा

!!दुर्जय पासवान!! गुमला : गुमला सदर अस्पताल की लापरवाही फिर सामने आयी है. अस्पताल में एक जच्च बच्च की जान चली गयी. पालकोट प्रखंड के सिजांग गांव की जानकी देवी के गर्भ में ही उसके बच्चे की मौत हो गयी. इससे मां की स्थिति नाजुक हो गयी. डॉक्टरों ने गुमला सदर अस्पताल में मां का […]

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!!दुर्जय पासवान!!

गुमला : गुमला सदर अस्पताल की लापरवाही फिर सामने आयी है. अस्पताल में एक जच्च बच्च की जान चली गयी. पालकोट प्रखंड के सिजांग गांव की जानकी देवी के गर्भ में ही उसके बच्चे की मौत हो गयी. इससे मां की स्थिति नाजुक हो गयी. डॉक्टरों ने गुमला सदर अस्पताल में मां का ऑपरेशन कर मृत बच्चे को गर्भ से निकालने की जगह उसे रांची रेफर कर दिया. रांची ले जाने के क्रम में ममता वाहन में मां की भी मौत हो गयी. मृतका के पति मुन्ना राय व सास सधैन देवी ने कहा कि जानकी को प्रसव पीड़ा होने पर पहले पालकोट अस्पताल गये. वहां डॉक्टरों ने गुमला रेफर कर दिया.
एंबुलेंस से पालकोट से गुमला अस्पताल सुबह आठ बजे पहुंचे. जांच में देरी हुई. नौ बजे जांच की गयी. साढ़े नौ बजे रेफर कर दिया गया. डॉक्टरों ने कहा कि यहां ऑपरेशन करना रिस्क है. इसपर परिजनों ने कहा कि रांची ले जाने में देरी होने से जान जा सकती है. गुमला अस्पताल में ही ऑपरेशन कर मां के गर्भ से मृत बच्चे को निकालकर जानकी की जान बचा लीजिये. लेकिन डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने से इंकार कर दिया और रांची ले जाने के लिए कहा. 12.30 बजे रांची ममता वाहन से ले जा रहे थे. कुछ दूर जाने के बाद ही जानकी की ममता वाहन में मौत हो गयी.
गुमला में ऑपरेशन की सुविधा है
गुमला सदर अस्पताल में ऑपरेशन की सुविधा है. सिजेरियन महिला डॉक्टर भी है. लेकिन गुमला अस्पताल में जानकी का ऑपरेशन नहीं हुआ. मृतका के पति मुन्ना राय ने कहा कि अगर मेरी पत्नी का गुमला अस्पताल में ऑपरेशन कर मृत बच्चे को गर्भ से निकाला जाता तो जानकी की जान बच सकती थी.
अस्पताल की कोई गलती नहीं है : उपाधीक्षक
अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ आरएन यादव ने कहा कि जानकी को उसके परिजन नौ बजे लेकर आये थे. जांच के क्रम में पता चला कि गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गयी है. यहां ऑपरेशन करने से जानकी की मौत का डर था. इसलिए महिला चिकित्सक ने रिस्क न लेते हुए 11 बजे जानकी को रांची रेफर कर दिया. रांची ले जाने के क्रम में 12 बजे जानकी की मौत ममता वाहन में हो गयी. जानकी की मौत में अस्पताल की कहीं कोई गलती नहीं है.
विधायक व अधिकारियों ने जांच की
जानकी की मौत की सूचना पर विधायक शिवशंकर उरांव, स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रमुख डॉ सुमंत मिश्र, निदेशक डॉ रमेश प्रसाद, डीसी श्रवण साय, डीडीसी नागेंद्र कुमार सिन्हा अस्पताल पहुंचे. जानकी की मौत की जांच की. उपाधीक्षक, डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों के साथ अधिकारियों ने अस्पताल में बैठक की. अस्पताल की लापरवाही से मां व बच्चों की मौत पर चिंता प्रकट करते हुए सुधार का कड़ा निर्देश दिया. निदेशक ने कहा कि जांच कर रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपा जायेगा.
अस्पताल की लापरवाही से लगातार बच्चों की मौत हो रही है. यह घोर लापरवाही है. इसमें सुधार हो. व्यवस्था में कमी है. उस कमी को सरकार को दूर करें.
शिवशंकर उरांव, विधायक, गुमला
अस्पताल में दवा व अन्य कोई कमी है तो अस्पताल के फंड से उन कमियों को दूर करें. किसी भी स्थिति में मरीजों को परेशानी न हो.
डॉ सुमंत मिश्र, निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य विभाग
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