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बिहुला-विषहरी पूजा श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न

Updated at : 18 Aug 2025 11:27 PM (IST)
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बिहुला-विषहरी पूजा श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न

मारखन में 155 वर्षों से जारी है मां मनसा पूजा की परंपरा

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गोड्डा जिले में लोक आस्था की प्रतीक बिहुला-विषहरी पूजा सोमवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों और श्रद्धा भाव के साथ संपन्न हुई. पुत्र रत्न की प्राप्ति और उसकी रक्षा के लिए की जाने वाली इस पूजा में श्रद्धालुओं ने गांव-गांव में प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की. दो दिवसीय यह पूजा रविवार को आरंभ हुई थी, जिसका समापन सोमवार देर शाम हुआ. रविवार की रात को बिहुला और बाला लखेंद्र का प्रतीकात्मक विवाह कराया गया. महिलाओं द्वारा माता विषहरी को डलिया अर्पित किया गया. भतडीहा, डहरलंगी, मखनी और सरौनी बाजार सहित कई गांवों के मंदिरों में श्रद्धालु मां विषहरी के दर्शन के लिए उमड़े और मन्नतें मांगी. वहीं, मारखन गांव में इस वर्ष भी 155 वर्षों से चली आ रही मनसा पूजा की परंपरा का पालन किया गया. 25 घरों में मां मनसा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की गयी. श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की. इस मौके पर राजेश कुमार यादव, कृष्णलाल शर्मा, देवनंदन साह, कार्तिक मंडल, उपमुखिया नारायण चंद्र दत्ता, हिमकेश रंजन, नागेश्वर यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANJEET KUMAR

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