सोहराय : सोहराय के दूसरे दिन हुई गोहाल पूजा, ईष्ट देव को लगा भोग

डॉ आनंद मोहन सोरेन एवं सच्चिदानंद सोरेन ने बताया कि आदिवासी परंपरा के अनुसार गोहाल पूजा पूर्ण होने तक किसी भी बाहरी व्यक्ति से बातचीत नहीं की जाती है.
प्रतिनिधि, बोआरीजोर बोआरीजोर गांव में सोहराय के दूसरे दिन घर-घर विधि-विधान से गोहाल पूजा का आयोजन किया गया. आदिवासी समुदाय के ग्रामीण अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर गोहाल पूजा करते हैं. पूजा के दौरान गोहाल में सूअर की बलि दी गयी. इसके बाद बलि के मांस से खिचड़ी व पत्ते में बनी रोटी का प्रसाद तैयार कर इष्ट देवता को भोग लगाया गया. परिवार के बीच प्रसाद का वितरण किया गया. डॉ आनंद मोहन सोरेन एवं सच्चिदानंद सोरेन ने बताया कि आदिवासी परंपरा के अनुसार गोहाल पूजा पूर्ण होने तक किसी भी बाहरी व्यक्ति से बातचीत नहीं की जाती है. आदिवासी समुदाय के ग्रामीणों के लिए सोहराय पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. पर्व के दौरान गांव में एक सप्ताह तक उत्सव का माहौल बना रहता है. गोहाल पूजा को बोंगा माह भी कहा जाता है. मौके पर विश्वनाथ सोरेन, प्रेमलाल सोरेन, सुनील सोरेन, कल्याणी हेंब्रम, रोजमेरी मरांडी, अनंत लाल सोरेन, ज्ञानचंद सोरेन, नवल किशोर सोरेन, बाहामुनी हेंब्रम, प्रियंका मुर्मू, तालाकुड़ी बेसरा, मरंगमय मुर्मू आदि मौजूद थे.
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By Prabhat Khabar News Desk
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