पक्की सड़क को तरस रहे ग्रामीण

Updated at : 11 Apr 2017 5:53 AM (IST)
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पक्की सड़क को तरस रहे ग्रामीण

उदासीनता. विकास की रोशनी से कोसों दूर है डोराबांध गांव कस्तूरी पंचायत के डेराबांध गांव में विकास की रोशनी नहीं पहुंच पायी है. ग्रामीण कई मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे हैं. गांवों की सूरत बदलने का सरकार का दावा गांव में दम तोड़ता नजर आ रहा है. जनप्रतिनिधि भी उदासीन बने हुए हैं. पोड़ैयाहाट : […]

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उदासीनता. विकास की रोशनी से कोसों दूर है डोराबांध गांव

कस्तूरी पंचायत के डेराबांध गांव में विकास की रोशनी नहीं पहुंच पायी है. ग्रामीण कई मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे हैं. गांवों की सूरत बदलने का सरकार का दावा गांव में दम तोड़ता नजर आ रहा है. जनप्रतिनिधि भी उदासीन बने हुए हैं.
पोड़ैयाहाट : प्रखंड के कस्तूरी पंचायत के डोराबांध गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. गांव को मुख्य पथ से जोड़नेवाली सड़क का हाल खस्ता है. पीसीसी सड़क नहीं बन पायी है. पोड़ैयाहाट-हंसडीहा मुख्य मार्ग से लगभग पांच किमी दूरी पर बसा यह गांव सड़क नहीं रहने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है. 500 की आबादी वाले आदिवासी बहुल इस गांव में दो चापानल के सहारे ग्रामीण प्यास बुझाते हैं. आदिवासी गांवों की सूरत बदलने का सरकारी दावा गांव में दम तोड़ती नजर आ रही है.
गांव में पीसीसी सड़क व नाली की भी व्यवस्था नहीं है. घर का पानी सड़क पर ही बहता रहता है. हालांकि प्रखंड विकास पदाधिकारी योजना बनाओ अभियान के तहत गांव में सड़क बनाने का प्रस्ताव पास होने की बात कह रहे हैं. पर कब पक्की सड़क बनाने का काम शुरू होगा यह स्पष्ट नहीं बता रहे हैं.
पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं ग्रामीण
आदिवासी बहुल इस गांव में लगभग 80 परिवारों के लोग महज दो चापानल के भरोसे पीने लेने को विवश हैं. जिस कारण चापानल से पानी कम आता है. गांव के सभी पेयजल कूप सूख गये हैं. सिंचाई की व्यवस्था पानी नहीं रहने की वजह से ग्रामीणों नहीं कर पा रहे हैं.
दो चापानल है. बहुत कम पानी आता है. गांव की महिलाओं को पानी लाने के लिए दूर-दराज जाना पड़ता है.”
-तालामय बासकी
” सड़क नहीं है. कच्ची सड़क पर चलना पड़ता है. बड़ा बड़ा गड्ढा हो जाने से लहूलुहान हो जाते हैं. जनप्रतिनिधि उदासीन बने हैं.
– मरांगमय किस्कू
” जनप्रतिनिधि सड़क निर्माण नहीं कराते हैं और न ही नेता इस गांव की सुधि लेने आते हैं. सड़क बन जाता तो आवागमन करने में गांव वालों को सुविधा होती.”
-पटवारी हांसदा
” गांव में सरकारी चापानल केवल दो है. दो तीन और चापानल लगाने पर पानी की समस्या से छुटकारा मिल जाता.”
-महेंद्र हांसदा
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