30 हजार टन कोयला उत्पादन में छूट रहा पसीना

Updated at : 10 Oct 2017 10:07 AM (IST)
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30 हजार टन कोयला उत्पादन में छूट रहा पसीना

‍कोल मंत्रालय के सचिव ने दिया था प्रतिदिन 60 हजार टन उत्पादन का लक्ष्य खनन के लिए जमीन की भी है कमी, कैसे पूरा हो पायेगा एनटीपीस का कोयला संकट भादो टोला साइट पर कंपनी को सामना करना पड़ रहा है ग्रामीणों का विरोध गोड्डा : कोल मंत्रालय के सचिव सुशील कुमार ने रविवार को […]

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‍कोल मंत्रालय के सचिव ने दिया था प्रतिदिन 60 हजार टन उत्पादन का लक्ष्य
खनन के लिए जमीन की भी है कमी, कैसे पूरा हो पायेगा एनटीपीस का कोयला संकट
भादो टोला साइट पर कंपनी को सामना करना पड़ रहा है ग्रामीणों का विरोध
गोड्डा : कोल मंत्रालय के सचिव सुशील कुमार ने रविवार को राजमहल कोल परियोजना इसीएल को तीन दिनों का टास्क दिया था. दो एनटीपीसी को हो रहे कोयले की परेशानी को दूर करने के लिए प्रतिदिन 60 हजार टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य दिया. पर, इस बात को लेकर कंपनी में हलचल है.
वर्तमान स्थिति में कंपनी को प्रतिदिन 30 हजार टन कोयले के उत्पादन में पसीना छूट रहा है. जमीन के अभाव में विगत कई महीनों से कोयले का उत्पादन कम हो गया है. भादो टोला में कंपनी कोयला उत्पादन करने के लिए लगातार ग्रामीणों के विरोध का सामना कर रही है. स्थानीय विधायक ताला मरांडी ने भी मामले पर पहले ही कंपनी को साफ तौर पर निर्देश दिया है.
मजदूर यूनियन तथा ग्रामीण भी कंपनी को लगातार मुआवजा व समस्या के समाधान की मांग कर कंपनी को कोयला के उत्खनन में बाधा डालने का काम कर रही है. दूसरी तरफ मुआवजा व जमीन संबंधी मामले को लेकर ईसीएल को खुद पहल करने के बदले आउट सोर्सिंग कंपनी बिड़ला के माध्यम से काम करा रही है.
बिड़ला अपने अधीनस्त आरसीएमएल कंपनी द्वारा स्थानीय लोगों को दबाव देने तथा केस में फंसाने की धमकी में कोई कसर नहीं छोड़ रही है. सचिव को आवेदन देते हुए रविवार को भी स्थानीय लोगों ने मामले को उठाया है. वहीं अब जमीन खाली कराने को लेकर अब तक 49 परिवारों को कंपनी की ओर से नोटिस दी जा चुकी है.
भादो टोला के ऐसे ग्रामीण जिसे परियोजना में नौकरी मिली है दबाव बनाने के लिए निलंबन हेतु स्पष्टीकरण भी पूछा गया है. इनमें से ऐसे 13 लोगों का नाम शामिल है. इन सारी परिस्थितियों में कंपनी के समक्ष कोयला के तीन दिनों में 60 हजार टन कोयले उत्पादन का टास्क परेशानी में डाल रखा है. ऐसे में एनटीपीसी कहलगांव व फरक्का में कोयला का संकट कैसे दूर हो पायेगा. यह बड़ा सवाल इसीएल प्रबंधन के लिए बना हुआ है.
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