निकाला पादप फाॅसिल्स, शोध शुरू

गोड्डा : राजमहल कोल परियोजना इसीएल क्षेत्र में बुधवार को प्लांट फाॅसिल्स की खोज के लिये तीन सदस्यीय टीम ललमटिया पहुंची. टीम में शामिल शोधकर्ताओं ने दिन भर परियोजना के उत्खनन क्षेत्र से जीवाश्म के सेंपल बटोरे. भारत सरकार के विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से बीरबल साहनी साइंस संस्थान लखनऊ के तत्वावधान में शोध […]
गोड्डा : राजमहल कोल परियोजना इसीएल क्षेत्र में बुधवार को प्लांट फाॅसिल्स की खोज के लिये तीन सदस्यीय टीम ललमटिया पहुंची. टीम में शामिल शोधकर्ताओं ने दिन भर परियोजना के उत्खनन क्षेत्र से जीवाश्म के सेंपल बटोरे. भारत सरकार के विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से बीरबल साहनी साइंस संस्थान लखनऊ के तत्वावधान में शोध कार्य प्रारंभ किया है. शोध कार्य में मुख्यत: बीएचयू एवं एसकेएमयू विवि के साझा अभियान चलाया जा रहा है.
टीम में बीएचयू के डॉ सुरेश पिल्लई एवं आर पाल मांथर्रो तथा एसकेएमयू के डॉ रंजीत कुमार सिंह शामिल हैं. जानकारी देते हुए श्री सिंह ने बताया कि शोध का कार्य मुख्य रूप से राजमहल पर्वत श्रृंखला व दामोदर बेसिन क्षेत्र को केंद्र बिंदु में रख कर किया जा रहा है. दस दिनों तक इस क्षेत्र में शोध कार्य होगा. बताया कि शोध के बाद प्रकृति एवं पर्यावरण से जुड़े बड़े रहस्य से पर्दा उठने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है. इससे खास तौर पर पार्यावरण पर हो रहे प्रभाव आदि को समझने में मदद मिलेगा.
जानकारी में भू-वैज्ञानिक श्री सिंह व पिल्लई ने बताया कि ललमटिया क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में पादप जीवाश्म है. कोयले के साथ पादप फाॅसिल्स को संग्रह कर इस पर शोध किया जायेगा. बताया कि कोयला बनाने में सहायक तीन प्रकार के फाॅसिल्स है. जो ग्लांससोमोट्रिस, गांगोट्रिस व वेटिवरिया है.
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