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Giridih News :विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थल मधुबन में दस दिनों से है जल संकट

Updated at : 29 Dec 2024 10:34 PM (IST)
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Giridih News :विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थल मधुबन में दस दिनों से है जल संकट

Giridih News :चिरकी मधुबनवासियों की प्यास बुझाने वाली पीरटांड़ मधुबन ग्रामीण जलापूर्ति योजना पिछले दस दिनों से ठप पड़ी है. जलापूर्ति बंद होने से चिरकी से लेकर जैनियों के विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थल मधुबन तक हाहाकार मचा है.

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समस्या. नवंबर महीना तीर्थयात्रियों से गुलजार रहता है मधुबन

विश्वप्रसिद्ध इलाके में पानी की घोर किल्लत व्यवस्था के लिए बड़ा सवाल

पीरटांड़ मधुबन ग्रामीण जलापूर्ति योजना है बेहाल

29. गिरिडीह. 10.

पीरटांड़. चिरकी मधुबनवासियों की प्यास बुझाने वाली पीरटांड़ मधुबन ग्रामीण जलापूर्ति योजना पिछले दस दिनों से ठप पड़ी है. जलापूर्ति बंद होने से चिरकी से लेकर जैनियों के विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थल मधुबन तक हाहाकार मचा है. पानी के जुगाड़ में ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. बकाया वेतन भुगतान की मांग को लेकर मधुबन एवं बराकर में कर्मचारियों ने जलापूर्ति ठप कर दी है.करोड़ों की योजना की सुधि लेनेवाला नहीं : बताया जाता है कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना हर घर में नल से पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया गया. गांव गांव में जलमीनार खड़ी की गयी है. मधुबन में भी पेयजल की सुलभता के लिए वर्षों पूर्व बराकर नदी से जलापूर्ति के लिए करोड़ों की योजना बनायी गयी थी. बराकर नदी में इंटेक वेल बनाकर पाइपलाइन से मधुबन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक लाया जाता है. यहां पानी फिल्टर कर घर-घर जलापूर्ति होती है. चिरकी से लेकर मधुबन तक लगभग पांच हजार की आबादी पेयजल के लिए पूरी तरह इसी योजना पर आश्रित है. जलापूर्ति योजना के लाभुक इसके लिए तय मासिक चार्ज देते हैं. इधर दस दिनों से लाभुकों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हो रहा है.

आये दिन रहती है कोई न कोई गड़बड़ी : चिरकी से लेकर मधुबन तक पेयजल का संकट विकट हो गया है. पानी के जुगाड़ में ग्रामीणों को भारी परेशानी हो रही है. संचालन समिति की लापरवाही के कारण योजना धीरे-धीरे दम तोड़ रही है. आये दिन किसी न किसी कारण मधुबन में जलापूर्ति बाधित रहती है. कभी तकनीकी खराबी तो कभी नदी सूख जाने से आपूर्ति ठप रहती है. हाल के दिनों से कर्मचारियों की समस्या से जलापूर्ति योजना जूझ रही है. योजना से जुड़े कर्मियों ने बकाया वेतन भुगतान की मांग को लेकर जलापूर्ति ठप कर दी है. जलापूर्ति बंद होने से चिरकी मधुबन के ग्रामीणों के अलावा तीर्थयात्रियों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. जलापूर्ति बंद होने से सरकार की महत्वाकांक्षी योजना हर घर नल से जल योजना को मुंह चिढ़ा रही है.शीघ्र ही सुचारु हो सकती जलापूर्ति : मधुबन के लिए दिसंबर का महीना तीर्थयात्रियों व सैलानियों के नाम होता है. इलाके में भीड़ का उमड़ना शुरू हो जाता है. ऐसे में जलापूर्ति बाधित रहने से लोगों को परेशानी हो रही है. जलापूर्ति योजना के लाभुकों ने कहा कि सरकार गांव-गांव में घर-घर पानी देने का वादा करती तो है, पर मधुबन जैसी विश्वप्रसिद्ध इलाके में पानी की घोर किल्लत व्यवस्था के लिए बड़ा सवाल है. पेयजल व स्वच्छता विभाग के के कनीय अभियंता श्याम चंद्र साहा ने बताया कि वेतन भुगतान के लिए कर्मचारियों के आंदोलन को लेकर सोमवार को जलापूर्ति संचालन समिति की बैठक बुलाई गई है. एक से दो दिन में समस्या का समाधान कर जलापूर्ति शुरू कर दी जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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