Giridih News :असम के बिहू और त्रिपुरा के शास्त्रीय नृत्य से हुआ कला संगम महोत्सव का आगाज

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Giridih News :कला संगम के तत्वावधान में सवेरा सिनेमा हॉल में आयोजित चार दिवसीय 25वीं अखिल भारतीय बहुभाषी नाटक, शास्त्रीय नृत्य, लोकनृत्य प्रतियोगिता की शुरुआत गुरुवार को असम के बिहू और त्रिपुरा के शास्त्रीय नृत्य से हुई.

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इसके पहले रजत जयंती के रूप में मनाये जा रहे इस महोत्सव का उद्घाटन स्व. उमा रानी ताह की तस्वीर पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन से हुआ. उद्घाटन कला संगम के संरक्षक राजेंद्र बगड़िया, श्रेयांश जैन, अध्यक्ष प्रकाश सहाय, संयोजक चुन्नूकांत, कार्यकारी अध्यक्ष पंकज ताह, सचिव सतीश कुंदन, उपाध्यक्ष राजीव सिन्हा, कृष्ण कुमार सिन्हा, सह सचिव शिवेंद्र सिन्हा, सुजय गुप्ता, मदन मंजरवे, प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर सरदार देवेंद्र सिंह, सह संयोजक राजेश सिन्हा, कोषाध्यक्ष विनय बक्शी, संगीत प्रमुख अरित चंद्रा व डॉ तारकनाथ देव ने संयुक्त रूप से किया. संरक्षक राजेंद्र बगड़िया ने कहा कि इस वर्ष नाट्य महोत्सव की रजत जयंती मनायी जा रही है. सचिव सतीश कुंदन की अस्वस्थता की वजह से कुछ कठिनाइयां सामने आयी, लेकिन युवाओं ने सब संभाल लिया. अध्यक्षता कर रहे अध्यक्ष प्रकाश सहाय ने कला संगम का इतिहास बताया. संयोजक चुन्नूकांत ने संस्था के उज्ज्वल भविष्य की कामना की.

आरा की संस्था ने कला संगम को सम्मानित किया

इस आरा बिहार के अशोक मानव ने रंगमंच में अनवरत सेवा देने के लिए कला संगम के सचिव को शॉल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया. कहा कि सतीश कुंदन के कारण ही गिरिडीह में 25 वर्षों से अखिल भारतीय नाट्य महोत्सव हो पा रहा है. आरा रंगमंच तहेदिल से उनकी प्रशंसा करता है. मंच संचालन नाट्य प्रमुख नीतीश आनंद और कार्यालय प्रभारी मनोज कुमार मुन्ना ने संयुक्त रूप से किया. मीडिया प्रभारी बिनोद शर्मा ने कार्यक्रम के आयोजन में महती भूमिका निभायी.

लोक नृत्य, शास्त्रीय नृत्य और नाटकों के मंचन ने मन मोहा

उद्घाटन के बाद बरनाली पॉल, हिया चटर्जी व गौरव सरकार ने शास्त्रीय नृत्य तथा प्रतिभा बारा व श्रेया पासवान ने लोकनृत्य प्रस्तुत किया. नाटकों में तुमने क्यों कहा कि मैं खूबसूरत हूं, हत्यारा व मुनिया की एक प्रतिशोध का भावपूर्ण मंचन हुआ. सुरताल म्यूजिक डांस ग्रुप, इशिका गुप्ता, इशानी करी, आविन बर्मन, मधु कुमारी एंड ग्रुप ने भी नृत्य प्रस्तुत कर वाहवाली लूटी. नृत्य की निर्णायक शिवानी भट्टाचार्य, सरसी चंद्रा व नाटकों के निर्णायक वशिष्ठ प्रसाद सिन्हा, अशोक मानव, शिवलाल सागर और मो निजाम हैं.

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Pradeep Kumar

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