कोरोना काल में थैलेसीमिया व हीमोफीलिया पीड़ितों का संकट बढ़ा

Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 08 Apr 2020 4:31 AM

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अभय वर्मा, गिरिडीह : कोरोना जनित आपदा से जूझते तंत्र का एकसूत्री एजेंडा जब संक्रमण की रोकथाम हो गया है तो सामान्य चिकित्सा व्यवस्था व विशिष्ट मामलों के लिए स्थिति वकट हो गयी है. इस संकट के बीच जिला के थैलेसीमिया और हीमोफीलिया के पीड़ितों की परेशानी बढ़ गयी है. गिरिडीह जिला में थैलेसीमिया के […]

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अभय वर्मा, गिरिडीह : कोरोना जनित आपदा से जूझते तंत्र का एकसूत्री एजेंडा जब संक्रमण की रोकथाम हो गया है तो सामान्य चिकित्सा व्यवस्था व विशिष्ट मामलों के लिए स्थिति वकट हो गयी है. इस संकट के बीच जिला के थैलेसीमिया और हीमोफीलिया के पीड़ितों की परेशानी बढ़ गयी है. गिरिडीह जिला में थैलेसीमिया के 140 तथा हीमोफीलिया के 70 निबंधित मरीज हैं, जिन्हें नियमित खून व सूई के लिए सदर अस्पताल का चक्कर पड़ता है. आवागमन के साधनों का संकट : जानकारी के अनुसार थैलेसीमिया पीड़ितों को माह में एक से दो बार खून चढ़ाने की जरूरत होती है तो हीमोफीलिया पीड़ितों को फैक्टर 8 एवं 9 के इंजेक्शन के लिए सदर अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है.

लॉकडाउन में इन मरीजों की सर्वाधिक परेशानी आवागमन के साधन उपलब्ध न होने से हो रही है. विशेष बात यह है कि थैलेसीमिया के अस्सी प्रतिशत ऐसे मरीज हैं जिनकी आर्थिक स्थिति अनुकूल नहीं. सुदूर इलाकों में खरीदना पड़ रहा खून : थैलेसीमिया पीड़ितों को खून मुहैया कराने में अग्रणी भूमिका निभाने वाले श्रेय क्लब के सचिव रमेश यादव कहते हैं कि पीड़ितों को महीने में एक से दो बार खून चढ़ाने की जरूरत होती है. कहा कि ये बच्चे हीमोग्लोबीन पर निर्भर रहते हैं. जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार के एक आदेश के बाद ब्लड बैंक से इन्हें नि:शुल्क ब्लड देने का प्रावधान है. उन्होंने कहा कि सबसे परेशानी की बात यह है कि ऐसे पीड़ितों को मुख्यालय आने के कोई साधन नहीं मिलते.

बगोदर, डुमरी, गावां के लोगों को स्थानीय स्तर पर ऊंची कीमत देकर रक्त का जुगाड़ करना पड़ रहा है, जबकि सदर अस्पताल में अब तक ऐसे परिवारों को नि:शुल्क रक्त मुहैया कराया जाता रहा है. महामारी के दौर में रक्तदान करें परिजन : सचिवब्लड बैंक संचालित कर रही रेडक्रास सोसाइटी के सचिव राकेश मोदी ने थैलेसेमिया पीड़ित के परिजनों से रक्तदान करने की अपील की है. कहा कि प्रावधान के तहत उन्हें खून नि:शुल्क दिया जाता है, पर मानवीय आधार पर परिजन का भी फर्ज है कि महामारी के दौर में रक्तदान कर सहयोग करें. उन्होंने अपील की है कि हीमोग्लोबीन कम हो तभी रक्त चढ़ाने सदर अस्पताल आएं.

ब्लड बैंक में है 42 यूनिट रक्त : रेडक्रॉस सोसाइटी के सचिव राकेश मोदी ने बताया कि सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में फिलहाल 42 यूनिट रक्त संग्रह है. इनमें पॉजिटिव ग्रुप में ए के 5, बी के 27, एबी के शून्य तथा ओ ग्रुप की 9 यूनिट रक्त है, वहीं निगेटिव ग्रुप में बी ग्रुप की एक यूनिट तथा बी, एबी व ओ के एक भी यूनिट खून उपलब्ध नहीं है. श्री मोदी ने बताया कि तालाबंदी के दौरान दो अप्रैल तक रक्त की भारी किल्लत रही, पर तीन अप्रैल को वर्णवाल सेवा समिति के शिविर में 46 यूनिट रक्तदान किया गया जिससे स्थिति अब तक संभली हुई है. उन्होंने कहा कि निगेटिव ग्रुप में अब भी खून की कमी है.

कहा कि कई सामाजिक संगठनों से रक्त की कमी को दूर करने को आगे की अपील की गयी है. 70 हीमोफीलिया पीड़ित भी परेशान : जिला के 70 हीमोफीलिया पीड़ित भी आपदा की इस घड़ी में काफी परेशान हैं. हीमोफीलिया सोसाइटी की गिरिडीह चैप्टर की सचिव निधि वर्मा का कहना है कि फैक्टर आठ व नौ से पीड़ित रोगियों को तत्काल इंजेक्शन की जरूरत होती है. इसमें रक्त का आंतरिक स्राव घातक साबित होता है. चार से पांच घंटे में पीड़ित को इंजेक्शन नहीं मिलने से जान पर बन आती है. उन्होंने कहा कि आवागमन के साधन न होने से केंद्र तक आना ऐसे मरीजों के लिए कठिन हो रहा है. लॉकडाउन के दौरान अब तक ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है. सोसाइटी सचिव ने आपात स्थिति के लिए सदर अस्पताल से एक एंबुलेंस देने की मांग की है.

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