Giridih News :कोयला का पोड़ा बनाने से फैल रहा प्रदूषण

Published by : PRADEEP KUMAR Updated At : 09 Dec 2025 9:57 PM

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Giridih News :कोयलांचल क्षेत्र के कई इलाकों में कोयला का पोड़ा बनाने के लिए इसे जलाते हैं. इससे निकलने वाला धुआं आबादी वाले क्षेत्र में फैल रहा है. खासकर शाम और अलसुबह में चारों ओर धुआं नजर आते हैं. इससे महिला, पुरुष व बच्चे सभी इसके प्रभाव में आ रहे हैं.

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है राह धुंधली-धुंधली सी, धुआं-धुआं से खफा है जिंदगी…हाल के दिनों में गिरिडीह कोयलांचल क्षेत्र के लोगों की स्थिति कमोवेश यही है. यहां की फिजां में फैलते कोयले के धुएं ने जनमानस को प्रभावित कर रखा है. कोयलांचल क्षेत्र के कई इलाकों में कोयला का पोड़ा बनाने के लिए इसे जलाते हैं. इससे निकलने वाला धुआं आबादी वाले क्षेत्र में फैल रहा है. खासकर शाम और अलसुबह में चारों ओर धुआं नजर आते हैं. इससे महिला, पुरुष व बच्चे सभी इसके प्रभाव में आ रहे हैं. धुएं की वजह से प्रदूषण फैल रही है और लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है. परेशानी बढ़ रही है, तो कोयला के धुआं पर रोक लगाने की मांग भी उठने लगी है. गिरिडीह कोयलांचल क्षेत्र का एक तबका कोयला का पोड़ा बनाकर इसे बाजार में बेचता है. इस क्षेत्र के महेशलुंडी, करहरबारी, अकदोनी, सेंट्रलपिट, गांधीनगर, कोपा, जोगटियाबाद, हेठलापीट, अंबाटांड़, मुर्गियाटेंगरी समेत अन्य क्षेत्र में पोड़ा बनाया जाता है. प्राय: शाम या फिर देर रात में कोयले में आग लगायी जाती है. पोड़ा तैयार होने के बाद इसे गिरिडीह बाजार या घरों में बेचा जाता है. आर्थिक रूप से कमजोर लोग इसी पर निर्भर हैं. आय की जुगाड़ में आम लोगों को कोयले के विषैले धुएं से जूझने को विवश किया जा रहा है. अहम बात यह है कि जो लोग मॉर्निंग वाक के लिए निकलते हैं, उन्हें इस धुएं का सामना करना पड़ता है. इससे उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है. अहम बात यह है कि जो लोग कोयला का पोड़ा लगा रहे हैं वे लोग भी इस धुएं के शिकात हो रहे हैं. उन्हें यह आभास नहीं है कि वह कितना बड़ा खतरा मोल ले रहे हैं. सुबह के वक्त धुंधला-धुंधला सा नजारा रहता है. मानों कोहरा छाया हुआ हो. लेकिन, धुंध धुएं के कारण दिखता है.

क्या कहते हैं स्थानीय लोग

कोयला का धुआं परेशानी का सबब बना हुआ है. वह नियमित रूप से मॉर्निंग वाक करते हैं. बनियाडीह से डंप यार्ड तक धुआं फैला रहता है. इससे काफी असुविधा होती है. मॉर्निंग वाक कर वापस घर आने पर जब वह ब्रश करते हैं तो खखार के साथ कालापन भी निकलता है. धुआं के कारण कोहरे का आभास होती है. प्रबंधन को जनहितार्थ ठोस कदम उठाने की जरूरत है.

बीरेंद्र सिंह, बनियाडीह

कोयलांचल क्षेत्र के लोग कोयला के धुआं से परेशान हो रहे हैं. कोयला का पोड़ा लगाये जाने से उठ रहा धुआं पूरे वातावरण में फैल जाता है. इसका असर लोगों पर पड़ रहा है. सांस संबंधित बीमारी हो रही है. आंख में जलन होता है. हाल में यह समस्या बढ़ी है. लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है. जनता की समस्याओं को दूर करने की आवश्यकता है.

निर्भय जायसवाल, बनियाडीह

गिरिडीह कोयलांचल क्षेत्र में प्रदूषण पर रोकथाम के लिए ठोस उपाय होना चाहिये. आबादी वाले इलाके में धुआं फैलने की वजह से परेशानी हो रही है. हर उम्र के लोगों को दिक्कत होती है. खासकर जो पोड़ा लगाते हैं, वह भी इस समस्या का झेल रहे हैं. सुबह में बेहतर स्वास्थ्य के लिए मॉर्निंग वॉक करने और स्कूली बच्चे समेत अन्य लोग काफी प्रभावित हो रहे हैं.

मनोज सिंह, बनियाडीह

कोयले के धुएं से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है. बड़ों के साथ-साथ बच्चों को भी काफी परेशानी होती है. सांस लेने में दिक्कत होती है. स्कूल आने-जाने वाले बच्चे धुआं झेलते हुये आवागमन करते हैं. ऐसे में सीसीएल प्रबंधन को धुआं पर रोकथाम के लिए ठोस उपाय करने की जरूरत है. इसके लिए अभियान चलाने की आवश्यकता है, ताकि लोगों को राहत मिल सके.

दानिश कमाल, बुढ़ियाखाद

कोयला का धुआं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक : डॉ परिमल

गिरिडीह कोलियरी के एरिया मेडिकल ऑफिसर डॉ परिमल सिन्हा कहते हैं कि कोयला का धुआं स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है. फेफड़े में धुआं जाने से सांस लेने में दिक्कती होती है. अस्थमा का अटैक होता है. लगातार धुआं फेफड़े में जान से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा रहता है. हृदय संबंधित रोग हो सकता है. आंख में जलन आम बात है. गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह नुकसानदायक होता है. सीसीएल अस्पताल में कई मरीज इन्हीं बीमारियों का इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं. इससे बचने के लिए मास्क का प्रयोग करें. नियमित रूप से योग करने की भी जरूरत है. आबादी से दूर कोयला से पोड़ा बनाने की जरूरत है.

धुआं के रोकथाम के लिए किये जायेंगे उपाय : पर्यावरण अधिकारी

गिरिडीह कोलियरी के पर्यावरण विभाग के अधिकारी शम्मी कपूर ने कहा कि कोयला जलने से निकलने वाला धुआं अत्यंत नुकसानदायक है. इसमें सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड आदि पाये जाते हैं. इसका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. इससे हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है. मानव जीवन के साथ-साथ मिट्टी और पानी को नुकसान पहुंचता है. साथ ही वनस्पति और जीव-जंतुओं पर असर पड़ता है. इसके रोकथाम के उपाय किये जायेंगे. लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत है. कहा कि स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों को बढ़ावा दिया जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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