Giridih News: नाइजर में फंसे बगोदर के पांच प्रवासी मजदूरों का अब तक सुराग नहीं

Published by : MAYANK TIWARI Updated At : 05 May 2025 11:42 PM

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Giridih News: नाइजर में अंताकियों के कब्जे में फंसे बगोदर के पांच प्रवासी मजदूरों का अब- तक कोई सुराग नहीं मिला है. 25 अप्रैल को अगवा हुए 11 दिन बीत गये हैं, लेकिन मजदूर को किस हाल में रखा गया है व कब उन्हें मुक्त किया जायेगा, ये सारी जानकारियां प्रशासनिक महकमा भी नहीं दे पा रहा है. इससे परिजन चिंतित हैं और अपने घर के मुखिया का हाल जानने की कोशिश में हैं.

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नाइजर में फसे प्रवासी मजदूरों के परिजनों द्वारा गांव के मुखिया से सवाल पूछा जा रहा है. इसमें कोई स्पष्ट जवाब परिजनों को नहीं मिलने से सिर्फ उदासी ही छाई हुई है. बताते चलें कि बगोदर थाना क्षेत्र के दोंदलो के चार मजदूर चंद्रिका महतो, फलजीत महतो, राजू महतो, संजय महतो और मुंडरो के उत्तम महतो दक्षिण अफ्रीका के नाइजर के सकोरा में काम करने बीते जनवरी 2024 को गये थे. वहां 25 अप्रैल को कलपतरू कंपनी में काम करने के दौरान अंताकियों का हमला कैंप पर हो गया. इस बीच अंताकी और सैनिकों के बीच फाइरिंग की घटना हुई. इस दौरान 12 सैनिकों की मौत हो गयी थी. वहीं जाते-जाते अंताकी पांच मजदूरों का भी अगवा कर अपने साथ ले गए. वे सभी बगोदर के हैं.

अगवा किये गये मजदूर किस हाल में हैं, इसका भी पता नहीं

इधर अगवा मजदूर कहां हैं, ये कुछ भी पता नहीं चल रहा है. हालांकि इस पूरे मामले में अभी तक विधायक नागेंद्र महतो, विधायक जयराम महतो, मांडू के विधायक तिवारी महतो, पूर्व विधायक विनोद कुमार सिंह, पूर्व विधायक लंबोदर महतो मजदूरों के घर पहुंचे हैं, और परिजनों से मिले हैं, लेकिन मजदूरों को क्या स्थिति हैं और वे किस हाल में हैं. इस सवाल का जवाब नहीं मिल रहा है. इधर भाकपा माले सह उप प्रमुख हरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि बगोदर के अपहृत हुए पांचों मजदूरों के मामले में भारत सरकार की क्या पहल हो रही है. इसकी कोई भी रिपोट सामने नहीं आई है. इधर मजदूरों के सवाल पर स्थानीय सांसद सह केंद्रीय बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी कोई पहल नहीं कर रही हैं. कहा कि अभी झारखंड राज्य को छोड़कर दूसरे राज्य का यह मामला होता, तो इस पर दूसरे राज्य की सरकार एक्शन मोड में होती. 11 दिन बाद भी पांचों मजदूरों की सुध लेनेवाला कोई भी नहीं है. न ही नाइजर सरकार ही भारत और झारखंड सरकार को स्पष्ट बात बता रही है. इस पर गंभीरता होनी चाहिये और अंताकियों के कब्जे में फंसे मजदूरों की जल्द रिहाई होनी चाहिए.

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