गिरिडीह: माओवादियों की टूटी कमर, 25 लाख के इनामी अजय महतो की नक्सली पत्नी ने किया सरेंडर, जानें क्यों छोड़ा संगठन

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गिरिडीह में नक्सली बबीता पुलिस अधीक्षक के सामने सरेंडर करते हुए

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सुरक्षाबलों को नक्सल विरोधी अभियान में एक और बड़ी सफलता मिली है. शीर्ष नक्सली अजय महतो की पत्नी अनिता किस्कू उर्फ बबिता ने सरकारी पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है. उसने नक्सलियों के शोषण और पति की गिरफ्तारी के बाद यह फैसला लिया.

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गिरिडीह से बिनोद शर्मा की रिपोर्ट

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Jharkhand Naxal News, गिरिडीह : गिरिडीह और पारसनाथ जोन में चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षाबलों को एक और बड़ी कामयाबी मिली है. भाकपा (माओवादी) संगठन की सक्रिय एरिया कमेटी सदस्य अनिता किस्कू उर्फ बबिता ने राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति "नई दिशा-एक नई पहल" से प्रभावित होकर हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है. बबिता ने पुलिस केंद्र गिरिडीह में एसपी डॉ. बिमल कुमार, द्वितीय कमान अधिकारी अभिनव आनंद और अपर पुलिस अधीक्षक सुरजीत कुमार के समक्ष औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया.

पति अजय महतो की गिरफ्तारी के बाद टूटा मनोबल

मूल रूप से बोकारो जिले की रहने वाली 30 वर्षीया बबिता (शिक्षा- 4वीं पास) पारसनाथ जोन, लुगु पहाड़ी, झुमरा पहाड़ी और कोल्हान क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय थी. वह 25 लाख रुपये के इनामी शीर्ष नक्सली एसएसी (SAC) कमांडर अजय महतो उर्फ टाइगर की पत्नी है, जिसे गिरिडीह पुलिस ने महज तीन दिन पहले गिरफ्तार किया था.

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क्यों हुआ बबीता का नक्सलियों से मोह भंग

बबीता ने पुलिस के सामने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि वह वर्ष 2009 में संगठन में प्रवेश की. एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान वे माओवादियों के संपर्क में आई थी. वर्ष 2017 में उसने जंगल में ही शीर्ष कमांडर अजय महतो से शादी कर ली थी. संगठन में उसे लेवी वसूलने और लोगों में खौफ फैलाने की जिम्मेदारी दी गई थी. हालांकि, शीर्ष कैडरों द्वारा किए जा रहे आर्थिक व शारीरिक शोषण और ग्रामीणों के साथ बेवजह की जाने वाली मारपीट से उसका मन आहत हो चुका था. तीन दिन पहले पति अजय महतो की गिरफ्तारी के बाद उसका बचा-कुचा मनोबल भी टूट गया और उसने समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया.

15 मामलों में थी वांछित

आत्मसमर्पण करने वाली महिला नक्सली बबिता के खिलाफ हत्या, लूट, विस्फोटक अधिनियम (Explosives Act), आर्म्स एक्ट और यूएपीए (UAPA) जैसी गंभीर धाराओं के तहत गिरिडीह, बोकारो और कोल्हान के थानों में कुल 15 संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं. मामले की जानकारी देते हुए एसपी डॉ. बिमल कुमार ने कहा कि 25 लाख के इनामी कमांडर की गिरफ्तारी के तुरंत बाद उसकी पत्नी का आत्मसमर्पण करना गिरिडीह, बोकारो, कोल्हान और सिंहभूम इलाके में सक्रिय माओवादियों की कमर तोड़ने जैसा है. उन्होंने एक बार फिर भटके हुए नक्सलियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाने और मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की है.

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