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सरिया में गुलाब कोठी के नाम से मशहूर कुमार आश्रम में आजादी के दीवाने बनाया करते थे योजना

Updated at : 13 Jun 2024 9:55 PM (IST)
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kumar ashram saria giridih jharkhand

सरिया का कुमार आश्रम.

कुमार आश्रम गुलाब कोठी के नाम से मशहूर है. गिरिडीह जिले के सरिया स्थित इस बंगले में आजादी के दीवाने अंग्रेजों के खिलाफ अपनी योजना बनाया करते थे.

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सरिया (गिरिडीह), लक्ष्मीनारायण पांडेय : गिरिडीह जिले के सरिया में बनायी गयी बंगाली कोठियां यूं ही मशहूर नहीं थीं. ये कोठियां शानो-शौकत की गवाह रही हैं. वक्त के साथ भले ही ये बदहाल हो गयीं या इनका अस्तित्व समाप्त हो चुका है, पर अतीत स्वर्णिम रहा है.

कुमार आश्रम में अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति बनाते थे स्वतंत्रता सेनानी

ऐसी ही एक कोठी कुमार आश्रम है. गुलाब कोठी के नाम से मशहूर इस बंगले में आजादी के दीवाने अंग्रेजों के खिलाफ अपनी योजना बनाया करते थे. कोठी का निर्माण बंगाल के मेयर रहे हेमचंद्र नस्कर ने कराया था. नस्कर और उनका परिवार गर्मी की छुट्टियां बिताने या ठंड के महीने में यहां घूमने आता था. स्थानीय लोगों के हाथों बिक चुकी इस कोठी में इसका स्वर्णिम अतीत दफन है.

तालाब और बगान आज भी हैं मौजूद

सरिया की हवा में तैरते किस्सों और किंवदंतियों की गवाही कहती है कि वर्ष 1930-32 के बीच पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मेयर हेमचंद्र नस्कर द्वारा निर्मित कुमार आश्रम कोठी. नस्कर ने हजारीबाग रोड स्टेशन (सरिया) से महज 100 मीटर दूर पूरब की ओर चार एकड़ 21 डिसमिल जमीन की व्यवस्था की. इसके बीच सुंदर बंगला बनवाया. चहारदीवारी के अंदर ही सुंदर-सा तालाब खुदवाया. शौकीन नस्कर ने इस तालाब में मछलीपालन भी किया. उस परिसर में आम, इमली, अमरूद, बेर, गुलाब जामुन, लीची, कटहल, जामुन, बेल जैसे कई फलदार व इमारती पेड़ लगवाये, जो आज भी मौजूद हैं.

फूलों की क्यारियों से सजी थी कोठी

बंगले की सुंदरता के लिए गेंदा, हरसिंगार, सदाबहार, बेली, चमेली, जूही, रात रानी, रजनीगंधा, केवड़ा, डहेलिया, पारिजात, कामिनी, गुलाब आदि फूलों की क्यारियां लगवायी गयीं. इस परिसर में कई प्रजातियों के गुलाब लगाये गये थे. फूलों की क्यारी में खिले गुलाब बंगले की सुंदरता में चार चांद लगाते थे. इसी कारण से कुमार आश्रम को लोग गुलाब कोठी भी कहने लगे. इस उद्यान को देखने दूर-दूर से लोग आते थे. यहां से फूल कोलकाता भेजे जाते थे. कोठी के मालिक हेमचंद्र नस्कर अपने परिजनों के साथ यहां छुट्टियां बिताने आया करते थे.

नस्कर परिवार यहां बिताया करता था छुट्टियां

बताया जाता है कि आजादी की लड़ाई में इस परिवार ने अहम भूमिका निभायी. नस्कर के पुत्र अर्धेंदु शेखर नस्कर, पूर्णेंदु शेखर नस्कर, विमलेंदु शेखर नस्कर व अमरेंद्र शेखर नस्कर आजादी के अन्य दीवानों के साथ सरिया स्थित अपने बंगले में रहकर अंग्रेजों के विरुद्ध योजना बनाया करते थे. आजादी के बाद पूर्णेंदु शेखर नस्कर 1952 से 1967 तक लगातार तीन बार लोकसभा के सांसद रहे. उनके अग्रज अर्धेंदु शेखर नस्कर 1962 में विधानसभा चुनाव में मगराहाट (पश्चिम) से कांग्रेस के विधायक बने.

नस्कर परिवार के आने से गुलजार हो जाता था सरिया

पूर्णेंदु शेखर नस्कर, अर्धेंदु शेखर व उनके परिवार के अन्य सदस्य जब छुट्टियां बिताने सरिया पहुंचते थे, तो मानो बाजार की मुरझाई कलियां भी खिल जाती थीं. बाजार हो या जंगल, हर जगह चहल-पहल व रौनक छा जाती थी. परिवार के सदस्य सुबह बाजार का आनंद लेने निकलते थे. प्रकृति प्रेमी होने के नाते वे शाम को सैर के लिए जंगल का रुख करते थे. बदली परिस्थितियों में इस परंपरा का निर्वाह मुश्किल होता गया, तो परिजनों ने कोठी बेच दी. फिलहाल इस बंगले का मालिक टेकलाल मंडल आज भी उस बंगले के अस्तित्व को संभाल कर रखे हैं. यहां कौशल विकास केंद्र संचालित हो रहा है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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