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नल जल योजना में की गयी खानापूर्ति, ग्रामीणों में आक्रोश

Updated at : 30 Mar 2024 11:11 PM (IST)
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नल जल योजना में की गयी खानापूर्ति, ग्रामीणों में आक्रोश

तिसरी प्रखंड में पेयजापूर्ति के लिए पिछले दो वर्षों से नल जल योजना संचालित है. लेकिन, इसका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है.

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तिसरी (गिरिडीह). तिसरी प्रखंड में पेयजापूर्ति के लिए पिछले दो वर्षों से नल जल योजना संचालित है. लेकिन, इसका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है. खासकर तिसरी प्रखंड मुख्यालय स्थित कई ऐसे ड्राई जोन हैं, जहां नल जल योजना के संवेदक अपनी खानापूर्ति के लिए पाइपलाइन बिछा दिये हैं. बोरिंग में पानी तक नहीं निकला और वहां टंकी स्टैंड बनाकर छोड़ दिया गया है. केवटाटांड़ गांव जो तिसरी मुख्यालय में ही है, वहां लीक टंकी दे दिया गया है. केंवटाटांड़ के अलावा चिलगिली, जमुनियाटांड़, जिनाडीह ऐसे गांव है जहां पानी का लेयर बहुत ही नीचे है. यहां हमेशा पेयजल की किल्लत रहती है. इधर, नल जल योजना के तहत संवेदकों किसी तरह काम कर बिल निकलवाने के चक्कर में हैं.

दिनोंदिन बढ़ रही है समस्या :

स्थिति यह है कि तिसरी प्रखंड मुख्यालय के आधे हिस्से में पेयजल संकट गहराया हुआ है. लोगों की परेशानी दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है. लोगों को प्यास बुझाने के लिए एक एक किमी की दूरी तय कर साइकिल से पानी ढोना पड़ रहा है. तिसरी मुख्यालय के आधे हिस्से, तिसरी पुल से लेकर तिसरी चौक, जमुनियाटांड़, केंवटाटांड़ की आबादी तीन हजार से अधिक है. यहां पानी का घोर अभाव है. इस क्षेत्र में जलस्तर इतना नीचे है कि इन क्षेत्रों में लगे दर्जनों चापाकलों से पानी नहीं निकलता है. गर्मी में तो इस क्षेत्र के लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है. लोगों को नहाने के लिए तिसरी के बड़ा तालाब के पास आना पड़ता है.

तिसरी में बनी टंकी से नहीं मिला एक बूंद पानी :

तिसरी के इस क्षेत्र की पेयजल समस्या के निदान के लिए पिछले 18 वर्ष पूर्व में तिसरी में लगभग दस लाख की लागत से एक बड़ा जलमीनार का निर्माण बनवाया गया था. डीप बोरिंग भी की गयी थी. लेकिन, इस टंकी से तिसरी वासियों को एक बूंद पानी नहीं मिला. जब-जब उक्त पानी टंकी में पानी भरा जाता है, पानी नीचे गिर जाता है. यह टंकी शोभा की वस्तु बनकर रह गयी है. इधर, तिसरी में पानी टंकी निर्माण में हुई अनियमितता को छिपाने व पेयजल संकट के समाधान के लिए पेयजल स्वच्छता विभाग ने पूर्व में रीजनल अस्पताल के पास बनी पानी टंकी से सप्लाई शुरू करा दिया. लेकिन, टंकी की ऊंचाई कम होने के कारण तिसरी के आधे हिस्से जहां पर पेयजल की घोर संकट है, वहां पानी नहीं पहुंचता है.

क्या कहते हैं लोग

हमलोगों को पूरे वर्ष पानी की समस्या से जूझना पडता़ है. तिसरी में पानी का सप्लाई तो होता है, लेकिन तिसरी चौक से लेकर भुराई रोड और केवटाटांड़, चिलगिली तक पानी नहीं पहुंच पाता है. इस क्षेत्र में जलस्तर भी बहुत नीचे है. चापाकल और कुआं सूख गये हैं. नल जल योजना का भी हाल बुरा है. जांच होने पर बड़े घपला का खुलासा हो सकता है. चौक पर डीप बोरिंग व जलमीनार बनने से ही पेयजल समस्या का समाधान हो पायेगा.

प्रकाश विश्वकर्मा, समाजसेवी

तिसरी गमहरियाटांड़ से पुल तक पानी का लेयर ठीक है. यही कारण है कि इस क्षेत्र में पानी की कोई कमी नहीं है. वहीं, तिसरी पुल से चौक, जमुनियांटांड़, केंवटाटांड़, चिलगिली, तिसरी मिशन व आसपास में पानी के लेयर काफी नीचे है. नल जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई गयी है, लेकिन अभी तक पानी पहुंचाया जा सका है. वर्षों से यहां पेयजल संकट बरकरार है. तिसरी पुल की टंकी से पानी की सप्लाई नहीं हुई. इस ओर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए.

यशवंत सिंह, समाजसेवी

क्या कहते हैं जेई

पेयजल व स्वच्छता विभाग के जेई मणिकांत ने कहा कि तिसरी प्रखंड मुख्यालय स्थित उक्त गांवों में पानी का सप्लाई नहीं हो रही है. जांच कर शीघ्र ही उक्त गांवों की पेयजल समस्या का समाधान किया जायेगा. कहा कि यदि ड्राई प्वाइंट पर संवेदक ने टंकी स्टैंड बनवाया है, तो निश्चित तौर पर उसकी भी जांच होगी. हर हाल में जलापूर्ति सुनिश्चित की जायेगी.

तीन माह में धंसी बोरिंग, जलापूर्ति ठप

बिरनी. प्रखंड के कुसमयी पंचायत के गजोडीह बरगद पेड़ के पास की गयी बोरिंग तीन माह में ही धंस गयी. इससे जलापूर्ति ठप हो गयी है. इसका निर्माण 14वें वित्त आयोग के तहत तीन लाख 84 हजार 691 रुपये की लागत से किया गया था. योजना सौर ऊर्जा आधारित है. इसका उद्देश्य ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था. पुराने चापाकल के बोरिंग का मोटर लगाने से तीन माह में ही बोरिंग धंस गयी. वर्तमान में जलमीनार बेकार पड़ा हुआ है. इधर, गर्मी बढ़ने के साथ ही कुएं सूख रहे हैं और लोगों को पानी की किल्लत झेलनी पड़ रही है. ग्रामीण रामदेव यादव ने बताया कि बोरिंग धंसने से लोगों को पानी नहीं मिल रहा है. मुखिया से लेकर विभाग से शिकायत की गयी है, लेकिन कोई पहल नहीं हो रही है.

क्या कहती हैं मुखिया : कुसमयी पंचायत की मुखिया रेहाना खातून ने कहा कि बोरिंग धंसने के कारण जलमीनार बंद है. विभागीय निर्देश के बाद इसे चालू कराने का प्रयास किया जायेगा. इधर, पेयजल व स्वच्छता विभाग के कनीय अभियंता ने कहा कि एसआर आने के बाद ही कुछ किया जा सकता है.

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