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कानून का रास्ता छोड़ अपराधियों का किया जा रहा है इस्तेमाल

Updated at : 16 Jun 2024 11:08 PM (IST)
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कानून का रास्ता छोड़ अपराधियों का किया जा रहा है इस्तेमाल

गिरिडीह जिला मुख्यालय से सटे इलाके में भू-माफिया काफी सक्रिय हो गये हैं. इनकी नजर कीमती जमीनों के साथ-साथ उन रैयतों की जमीन पर जा टिकी है, जो जमीन बचाने में सामर्थ्यवान नहीं हैं.

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जमीन के कारोबार में शामिलबाहरी अपराधियों का ले रहे हैं सहारा, बनी रहती है खूनी संघर्ष की स्थिति

राकेश सिन्हा, गिरिडीह.

गिरिडीह जिला मुख्यालय से सटे इलाके में भू-माफिया काफी सक्रिय हो गये हैं. इनकी नजर किमती जमीनों के साथ-साथ उन रैयतों की जमीन पर जा टिकी है, जो जमीन बचाने में सामर्थ्यवान नहीं हैं. इनकी पहुंच अंचल कार्यालय से लेकर पुलिस तक है और ये जमीन पर कब्जा करने के लिए तरह-तरह के हथकंडों का इस्तेमाल कर रहे हैं. जमीन के कई कारोबारी अब कानून का रास्ता छोड़ अपराधियों का भी सहारा ले रहे हैं. मिली जानकारी के अनुसार हाल के दिनों में गिरिडीह शहरी व मुफस्सिल क्षेत्र में इस तरह के मामले सामने आये हैं. पिछले दिनों मुफस्सिल थाना क्षेत्र के औद्योगिक इलाके में ऐसा ही मामला सामने आया. बताया जाता है कि गादीश्रीरामपुर के पास स्थित एक उद्योगपति के द्वारा स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ गैरमजरूआ जमीन की भी घेराबंदी बलपूर्वक कर ली गयी.

धनबाद और बढैया से बुलाये गये अपराधी

एक मामला गिरिडीह शहरी क्षेत्र में भी सामने आया है. गिरिडीह शहरी क्षेत्र में एक कीमती जमीन की खरीद-बिक्री में हुए विवाद के बाद कब्जा को लेकर जिले के बाहर से अपराधियों को बुलाया गया है. कब्जा हटाने और कब्जा दिलाने दोनों ही मामले में दोनों पक्षों ने धनबाद और बढैया से अपराधियों को बुला लिया है. ये अपराधी पिछले चार दिनों से गिरिडीह में डटे हुए हैं. सूत्रों ने बताया कि दोनों ही गुट का धनबाद और बढैया के इलाके में अपराध जगत में एक अलग ही पहचान है.

गुटों में विवाद होने पर शहर के एक होटल में हुई बैठक

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर हुए विवाद के बाद दोनों ही गुटों में जमकर नोकझोंक हुई. इस नोकझोंक के बाद दोनों ही गुटों की बैठक तिरंगा चौक के पास स्थित एक होटल में हुई. बताया जाता है कि इस बैठक में कुछ स्थानीय अपराधी भी शामिल हुए थे. लगभग दो घंटे तक चली वार्ता के बाद दोनों गुट एक-दूसरे को धमकी देते रहे.

बनी हुई है दो गुटों में टकराव की स्थिति

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार होटल में हुई बैठक का कोई परिणाम नहीं निकला है. फलस्वरूप दोनों गुटों में तनातनी बनी हुई है और टकराव की स्थिति है. सूत्रों का कहना है कि दोनों ही गुट गिरिडीह में कैंप किये हुए हैं और रात में भी विवाद जमीन की निगरानी की जा रही है. सूत्रों ने बताया कि उक्त जमीन के प्लॉट की कीमत एक करोड़ से अधिक है. दोनों पक्षों ने इसे प्रतिष्ठा का विषय बना लिया है. कभी भी खूनी संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.

भू माफियाओं की सूची तैयार कर रही है पुलिस

इधर पुलिस सूत्रों की माने तो कुछ माह पूर्व से हीं पुलिस ने भू-माफियाओं की सूची तैयार करना शुरू कर दिया है. इस मामले को लेकर कुछ माह पूर्व डीजीपी ने जमीन के मामले में हुए विवाद और संघर्ष को लेकर समीक्षा करने के उपरांत सभी जिले के एसपी को निर्देश दिया था कि वे भू-माफियाओं की सूची मुख्यालय को भेजें. सूत्रों ने बताया कि गिरिडीह के एसपी ने एक प्रपत्र बनाकर भू-माफियाओं का नाम दर्ज करवाना शुरू कर दिया है. प्रथम चरण में सूची में वैसे भू-माफियाओं का नाम शामिल किया जा रहा है जिनके विरुद्ध जमीन से सबंधित पांच या पांच मुकदमा से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज किये गये है.

रैयती जमीन बताकर बेची जा रही है गैरमजरूआ जमीन

गिरिडीह जिले में रैयती जमीन बताकर धड़ल्ले से गैरमजरूआ जमीन बेची जा रही है. मिली जानकारी के अनुसार गिरिडीह अंचल के कोलडीहा, सिहोडीह, परियाना, रानीखावा, राजपुरा, परसाटांड़, होली क्रॉस के बगल में जरीडीह, पेसराबहियार समेत कई इलाके में यह धंधा लंबे समय से चल रहा है. सूत्रों का कहना है कि रैयती जमीन प्लॉट बनाकर बेच दी जाती है और जो रास्ते छोड़ जाते हैं, उसी जमीन की एलपीसी हासिल कर आसपास की गैरमजरूआ जमीन बेच दी जाती है.

रास्ते की जमीन का बना दिया जाता है एलपीसी

जानकार लोगों का कहना है कि राजस्व विभाग के पंजी टू में सिर्फ रैयती जमीन के बिक्री रकवा को घटाया जाता है, जो रास्ते की जमीन छोङी जाती है वह पंजी टू में नहीं घटाया जाता है जिसका लाभ जमीन के कारोबारी उठाते हैं. जमीन के कारोबारी अंचल कार्यालय के मिलीभगत से इस जमीन का एलपीसी तैयार करवाते हैं और फिर इसी एलपीसी के आधार पर गैरमजरूआ खास जमीन की बिक्री कर दी जाती है. जानकार लोगों ने बताया कि गिरिडीह जिले में भारी मात्रा में गैरमजरूआ खास जमीन प्रतिबंधित सूची में दर्ज है. ऐसे जमीन की खरीद-बिक्री की रोक है, लेकिन इस तरह की गैरमजरूआ जमीन का प्लॉटिंग कर जमीन के कारोबारी रैयती जमीन के एलपीसी के आधार पर बिक्री कर देते हैं.

मामले की होगी जांच, दोषी पाये जाने पर होगी कार्रवाई : एडिशनल कलक्टर

इधर एडिशनल कलक्टर विजय सिंह बिरूआ ने बताया कि इस तरह के मामले संज्ञान में आने पर उसकी जांच करायी जायेगी. जमीन की हेराफेरी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जायेगी. यदि इस तरह के मामले में राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत हुई, तो दोषी लोगों के विरूद्ध कार्रवाई की जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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