Giridih News :आर्थिक उपार्जन का माध्यम ना हो गोशाला

Giridih News :राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पहली बार छह अक्तूबर 1925 को गिरिडीह आये थे. दो दिवसीय यात्रा के दौरान उन्होंने कई स्थानों पर सभाएं की. लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति प्रेरित किया. गौशाला एवं खादी के उपयोग को लेकर भावनात्मक अपील की.
सात अक्तूबर 1925 को आयोजित सार्वजनिक सभा में उन्होंने खादी का उपयोग और सूत कातने को लेकर लोगों को समझाने किया था. कहते हैं कि उस वक्त नगर पालिका कर्मियों का प्रतिनिधि मंडल समेत कई लोगों ने गांधीजी से भेंटकर मांग पत्र सौंपी थी. जिसमें सूत कातने को लेकर असमर्थता जतायी गयी थी. उस वक्त गिरिडीह में अबरख उद्योग से मजदूरी के रूप में भी लोगों को मोटी कमाई हो रही थी. इस पर गांधी जी ने लोगों को समझाया था कि यदि सूत कातने से ज्यादा कमाई दूसरे कामों से हो रही है तो लोग खादी का उपयोग करें. जब खाली समय हो तो वे देशहित में कम से कम आधा घंटा चरखा भी चलायें. इसी दौरान गौशाला की स्थिति को लेकर भी गांधी जी ने कई बिंदुओं पर चर्चा की थी.
गोशाला को मुनाफा का व्यवसाय नहीं बनायें
गौशाला के संचालकों को उन्होंने सलाह दी कि वे गौशाला के पास ही चर्मालय और डेयरी खोलें. ताकि गौशाला आत्मनिर्भर हो सके. बता दें कि उस वक्त गायों का दूध बेचकर गौशाला को प्रत्येक वर्ष मात्र दो सौ रुपये की आमदनी होती थी. गांधी जी ने सभा में ही कहा कि गौशाला को सिर्फ मुनाफे का व्यवसाय समझकर संचालन नहीं करें. बल्कि, आत्मनिर्भर बनाने के लिए वे व्यापारिक तरीका अपनायें. इसके लिए उन्होंने हत्या किये गये पशुओं का नहीं, बल्कि प्राकृतिक रूप से मरे गायों के चमड़ा की बिक्री के लिए चर्मालय खोलने को कहा था. उन्होंने गौ हत्या की रोक की भी सलाह दी थी.
शिकायतें मिलने पर अस्पृश्यता पर भी की चर्चा
राष्ट्रपिता गांधी जब पचंबा पहुंचे तो वहां मिलने वाले प्रतिनिधियों ने छुआ-छूत का मामला भी उठाया. उन्हें बताया गया कि अस्पृश्यता जैसे मामलों के कारण समाज बंटने जैसी स्थिति हो गयी है. इस क्रम में नगरपालिका के कई कर्मियों ने सिर पर पैखाना ढोने का भी मामला उठाया. यही कारण है कि गांधी जी ने सार्वजनिक सभा में अस्पृश्यता के मामले पर गंभीर चर्चा की. वहीं पचंबा में संचालित हरिजन स्कूल की भी उन्होंने प्रशंसा की. साथ ही लोगों से अपील किया कि वे लोग दलितों के घर और मुहल्ले में पहुंचें और उनसे बेहतर समन्वय स्थापित करें. निकाय के सदस्यों ने आर्थिक संकट का जिक्र करते हुए कहा था कि नगरपालिका कर्मियों को देने के लिए पैसे तक नहीं है. गांधी जी ने लोगों को समझाया कि वे खुद विदेश में अपना पैखाना फेंकते थे. यहां के लोगों को भी अपना पैखाना खुद साफ करना चाहिए.गिरिडीह में गांधी आगमन शताब्दी समारोह के आयोजन को लेकर व्यापक तैयारियां
गिरिडीह में गांधी यात्रा के सौ वर्ष पूरे होने पर इसे गांधी-आगमन शताब्दी समारोह के रूप में मनाने को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गयी है. इसके लिए जिला प्रशासन के सहयोग से एक आयोजन समिति का गठन किया गया है जिसकी देख-रेख में गिरिडीह जिले में कई कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे. एक ओर जहां जिले के विद्यालयों में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से संबंधित चित्रांकन, भाषण, लेख, कोलाज एवं कविता पाठ की प्रतियोगिताएं आयोजित करने का निर्णय लिया गया है, वहीं दूसरी ओर पदयात्रा व कवि सम्मेलन जैसे कार्यक्रम भी किये जायेंगे.आज खरगडीहा से शुरू होगी पदयात्रा कार्यक्रम
छह अक्टूबर को खरगडीहा में स्थित लंगटा बाबा समाधि स्थल पर एकत्रीकरण कार्यक्रम के बाद चादरपोशी की जायेगी. खरगडीहा बेसिक स्कूल से प्रात: नौ बजे गांधी जी के राष्ट्रीय पाठशाला पहल पर गांधी जी का नमन व माल्यार्पण कार्यक्रम का आयोजन करने के उपरांत बालिका शिक्षा में बेहतर सुधार के लिए ज्ञापन सौंपा जायेगा. इसी स्थल से पदयात्रा दल को झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार और जमुआ की विधायक डॉ मंजू कुमारी रवाना करेंगे. खरगडीहा से गिरिडीह आने के क्रम में रास्ते में स्थित चितरडीह गांव में छह अक्तूबर की शाम में गांदी दर्शन पर संगोष्ठी और सांस्कृतिक गतिविधियां होगी. इसी क्रम में कवि युवा विचारक निलोतपल मृणाल, आयुष चतुर्थवेदी, डॉ मनोज, डॉ योगेंद्र, डॉ अलका और मंथन जी भी कार्यक्रम को संबोधित करेंगे. पदयात्रा का यह जत्था चितरडीह में ही रात्रि विश्राम करेगा.पचंबा में सात अक्टूबर को होगी जनसभा
रात्रि प्रवास के बाद पदयात्रा जत्था सात अक्तूबर को प्रात: यह जत्था चितरडीह से निकलकर कारोडीह, घोरंजो, पथला, नावाडीह, परसाटांड़ होते हुए पचंबा पहुंचेंगी, जहां जनसभा के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा. इसी दिन दोपहर तीन बजे से गिरिडीह नगर भवन में बच्चों एवं स्थानीय कलाकारों द्वारा भजन व गीत प्रस्तुत किये जायेंगे. गांधी दर्शन पर चर्चा के साथ-साथ कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया जायेगा. इसी अवसर पर नगर भवन में ही गांधी स्मारिका का लोकार्पण भी होगा.परगोडीह मैदान में बने चबूतरा से किया था सभा को संबोधित
महात्मा गांधी देवघर से गिरिडीह आने के क्रम में पांच अक्तूबर को खरगडीहा के पास स्थित डाक बंगला में रूके और यहां रात्रि विश्राम भी किया. छह अक्तूबर को उन्होंने माहुरी मंडल की ओर से आयोजित सभा में हिस्सा लिया. इस दौरान माहुरी समाज के लोगों ने भी देशबंधु स्मारक कोष के लिए आर्थिक मदद की. माहुरी टोला से निकलकर वे परगोडीह मैदान में पहुंचे. यहां बने एक चबूतरा से उन्होंने एक और सभा को संबोधित किया था. भ्रमण के दौरान गांधी जी ने खरगडीहा के गौशाला की भी चर्चा की. स्वदेशी जागरण के लिए निकले गांधी जी ने स्वदेशी अपनाओ का नारा देते हुए लोगों को खुद से चरखा चलाने, सूत कातने के अलावे स्वावलंबन के लिए प्रेरित किया. परगोडीह में आयोजित इस जनसभा में परगोडीह के अलावे मिर्जागंज, खरगडीहा, बदडीहा और आसपास के दर्जनों गांव के लोग एकत्रित हुए थे. इस सभा में भी महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था. बताया जाता है कि मिर्जागंज के ही लोगों ने मिलकर मौजीलाल साहू के नेतृत्व में परगोडीह मैदान में चबूतरा का निर्माण कराया था. स्वतंत्रता संग्राम में इस क्षेत्र से भाग लेने वाले लोगों ने गांधी जी को विशेष तौर पर आमंत्रित किया था और सभा का आयोजन कर असहयोग आंदोलन के साथ-साथ स्वदेशी जागरण के लिए लोगों को प्रेरित करने की सलाह दी थी. स्थानीय लोगों के अनुरोध पर गांधी जी ने यहां सभा को संबोधित किया. इस दौरान गांधी जी को स्थानीय लोगों ने देशबंधु स्मारक कोष के लिए गहना-जेवर के साथ आर्थिक मदद की.गुरु दक्षिणा में सूत कातकर देने का शुरू हुआ था प्रचलन
जब गांधी जी खरगडीहा पहुंचे थे तो उन्होंने खरगडीहा में खोले गये राष्ट्रीय पाठशाला का भी जिक्र लोगों से किया. बता दें कि वर्ष 1919 में गांधी जी के प्रयास से ही देशभर में राष्ट्रीय पाठशाला खोलकर बच्चों को तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ बुनियादी शिक्षा दी जाती थी. इसी दौरान गिरिडीह जिला के खरगडीहा में राष्ट्रीय पाठशाला खोला गया. इस स्कूल में चरखा से सूत कातकर गुरु को गुरुदक्षिणा के रूप में सूत देने की परंपरा शुरू की गयी थी. बता दें कि आजादी के पूर्व राष्ट्रीय पाठशाला के रूप में स्थापित इस स्कूल का बाद में राष्ट्रीयकरण करते हुए इसे अपग्रेड कर दिया गया. अब इस स्कूल को लोग राजकीय बुनियादी विद्यालय खरगडीहा के रूप में जानते हैं जहां पहली से लेकर आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई होती है.
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