चारा नहीं मिलने से पशु हो रहे बेहाल

Updated at : 17 Apr 2020 1:40 AM (IST)
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चारा नहीं मिलने से पशु हो रहे बेहाल

गिरिडीह : कोरोना वायरस के कारण जनजीवन प्रभावित है. इसके रोकथाम को लेकर सरकार की ओर से लॉकडाउन की घोषणा की गयी है. लॉकडाउन के कारण पशुपालकों और डेयरी संचालकों के साथ-साथ गोशाला संचालकों की भी परेशानी बढ़ गयी है. पचंबा स्थित गोपाल गोशाला समिति को भी लॉकडाउन के कारण भारी परेशानी हो रही है. […]

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गिरिडीह : कोरोना वायरस के कारण जनजीवन प्रभावित है. इसके रोकथाम को लेकर सरकार की ओर से लॉकडाउन की घोषणा की गयी है. लॉकडाउन के कारण पशुपालकों और डेयरी संचालकों के साथ-साथ गोशाला संचालकों की भी परेशानी बढ़ गयी है. पचंबा स्थित गोपाल गोशाला समिति को भी लॉकडाउन के कारण भारी परेशानी हो रही है. कोई मदद नहीं मिलने से यहां रहने वाले पशुओं को समय पर चारा नहीं मिल पा रहा है. चारा नहीं मिलने से पशु बेहाल हो रहे हैं. वहीं दूध की बिक्री नहीं होने से अन्य पशुपालकों की हालत भी पतली हो गयी है. बॉक्स :

कोई नहीं कर रहा सहयोग, बढ़ गयी परेशानी : ध्रुव संथालिया इस बाबत गोशाला समिति के सचिव ध्रुव संथालिया ने बताया कि लॉकडाउन के बाद गोपाल गोशाला में रहने वाले पशुओं को चारा उपलब्ध कराने में काफी परेशानी हो रही है. जो भी व्यक्ति समिति को सहयोग प्रदान करते थे वे सभी लॉकडाउन के बाद सहयोग करना बंद कर दिया है. लगभग 50 से 60 हजार रुपये प्रतिमाह लेबर की मजदूरी व पशुओं के चारा में खर्च होता है. फिलहाल न तो सरकार के द्वारा कोई सहयोग मिल रहा है और न ही जिला स्तर से मिलने वाली सहयोग राशि उपलब्ध हो पा रही है. श्री संथालिया ने बताया कि वर्तमान में गोपाल गोशाला में 838 गोवंश मौजूद है और लगभग 50 लेबर काम कर रहे है.

वर्तमान में मजदूरों को मजदूरी देना व पशुओं को चारा खिलाना गोपाल गोशाला समिति के लिए एक बड़ी चुनौती बन गयी है. उन्होंने जिला प्रशासन से मांग किया है कि आपदा प्रबंधन की तरफ से कोई सहायता राशि समिति को उपलब्ध कराये. ताकि गोशाला का संचालन सही तरीके से किया जा सके. इसके अलावा जिला प्रशासन द्वारा सीएसआर फंड के तहत कोई मदद समिति को मिल जाये तो परेशानी काफी हद तक दूर हो सकती है.बॉक्स : गोशाला में मौजूद है 838 गौवंश :गोशाला समिति के सचिव ध्रुव संथालिया ने बताया कि वर्तमान में गोशाला में दूध देने वाली गाय 117, गर्भवती गाय 21, सेवावती गाय 337, भैंस 03, नंदी 15, बाछा 1 वर्ष से ऊपर 206, बाछी 1 वर्ष से ऊपर 50, बाछा 1 वर्ष से कम 21, बाछी 1 वर्ष से कम 24, भैंस का बच्चा 36 कुल मिलाकर गौशाला में 838 पशु है.

श्री संथालिया ने बताया कि यहां मौजूद पशुओं के दूध से खर्च का 40 – 45 प्रतिशत राशि की व्यवस्था हो जाती है. गोशाला समिति के सचिव ध्रुव संथालिया ने बताया कि भविष्य में समिति का उद्देश्य दूध का उत्पादन बढ़ाकर 1000 किलो करना, वर्तमान में खुले में रह रहे गौवंशों के रहने के लिए एक बड़े शेड का निर्माण करना, 20 एकड़ जमीन पर हरा चारा लगाने की व्यवस्था करना, दूध, गो कास्ठ, वर्मी कंपोस्ट एवं हरा चारा का उत्पादन बढ़ाकर गोशाला को स्वावलंबी बनाना, चिकित्सा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना, साफ सफाई के साथ-साथ 1000 गौवंशों के पालन-पोषण के लिए समुचित व्यवस्था, भंडारीडीह तथा कल्याणडीह की जमीन पर बाउंड्री वॉल का निर्माण कर उचित उपयोग में लाना, तालाब को बड़ा करना आदि है. वर्तमान में 8 महीने का पानी गोशाला स्थित तालाब एवं कुएं से प्राप्त होता है. बाकी के 4 महीने गिरिडीह शहर से प्रतिदिन 5 टैंकर पानी लाकर जरूरत पूरी की जाती है. गिरिडीह जिले के अधिकांश घरों में गो ग्रास पेटी लगाना है ताकि अधिक से अधिक परिवार प्रतिदिन गो ग्रास की राशि जमा कर गोशाला की गायों को सहयोग कर सकें.

अधिक से अधिक संख्या में गौ भक्तों को मासिक सहयोग के लिए जोड़ना भी समिति का उद्देश्य है.कोडरमा सांसद अन्नपूर्णा देवी ने झारखंड सरकार से गौ पालकों को राहत पहुंचाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से उत्तर प्रदेश की योगी सरकार गौ पालकों को राहत मुहैया करा रही है. झारखंड सरकार भी उसी तर्ज पर यहां भी व्यवस्था करे. झारखंड में लॉकडाउन की वजह से गौ पालकों को जानवरों के लिए चारा नहीं मिल रहा है वहीं दूसरी तरफ दूध की बिक्री नहीं होने की वजह से दूध बेकार हो जा रहा है.

उन्होंने कहा कि राज्य के कई गोशाला के प्रबंधकों और गौ पालकों ने फोन पर अपनी समस्या बतायी है. आज इस विषय को लेकर कृषि और पशुपालन सचिव को भी पत्र लिखकर गौ पालकों को राहत मुहैया कराने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि जब देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में वहां की सरकार गौ पालकों को आवश्यक सुविधा मुहैया कराने के लिए कई स्तर पर काम कर रही है तो झारखंड की सरकार क्यों नहीं कर सकती? उन्होंने कहा कि एक तरफ पशु चारा मिल नहीं रहा है. वहीं दूसरी तरफ चारा की कीमत में बेतहाशा वृद्धि कर दी गयी है. सरकार का इस पर कोई नियंत्रण नहीं है. राज्य सरकार से आग्रह है कि एक टीम बनाकर मवेशियों के चारा की हो रही कालाबाजारी को रोका जाये. साथ ही गौ पालकों को समुचित बाजार उपलब्ध कराया जाये.

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