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Giridih News :बिना सामग्री के वाउचर बेच लाभुकों से कमीशन वसूली की होगी जांच

Updated at : 31 Jan 2026 11:46 PM (IST)
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Giridih News :बिना सामग्री के वाउचर बेच लाभुकों से कमीशन वसूली की होगी जांच

Giridih News :बेंगाबाद में मनरेगा योजनाओं में भ्रष्टाचार चरम पर है. लाभुकों को सामग्री आपूर्ति करने का दावा करने वाले कई वेंडर वाउचर बेच रहे हैं. लाभुक के खाते में सामग्री मद की राशि भुगतान का ऑप्शन नहीं होने का लाभ ऐसे वेंडर उठा रहे हैं.

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ऐसे में मनरेगा योजना में स्वयं से सामग्री खरीदी करने वाले लाभुक भुगतान के लिए वेंडरों से वाउचर लगाने को विवश हैं. इधर, कई वेंडर मिलीभगत से वाउचर बेचकर मनमाना कमीशन वसूल रहे हैं. मनमाना कमीशन के कारण लाभुकों की परेशानी बढ़ गयी है. प्रखंडस्तर पर कार्रवाई नहीं होने से ऐसे वेंडरों का मनोबल बढ़ा हुआ है. वेंडरों की मनमानी से मनरेगा लाभुकों को हो रही परेशानी की शिकायत मिलने के बाद डीसी रामनिवास यादव ने इसे गंभीरता से लिया है.

एक दर्जन से अधिक वेंडर हैं सक्रिय

बता दें कि बेंगाबाद प्रखंड में मनरेगा योजनाओं के सामग्री आपूर्तिकर्ता वेंडर के रूप में एक दर्जन से अधिक पंजीकृत है. प्रावधान के मुताबिक वेंडरों के पास दुकान का होना आवश्यक है. दुकान होने के बाद ही वेंडर के लिए अधिकृत हो सकते हैं. लेकिन कई ऐसे भी वेंडर हैं पंजीकृत जिनका दुकान सिर्फ कागज पर ही चलता है. दिन भर प्रखंड और मुखिया कार्यालय का चक्कर काटकर वाउचर बेचने के फिराक में जुटे रहते हैं. अधिकारियों के नाम पर 40 प्रतिशत तक कमीशन काट कर लाभुक को भुगतान किया जा रहा है. ऐसे में सामान खरीदी गयी मूल्य भी लाभुक को नहीं मिल पाती है. वेंडरों के दुकानों की गहनता से जांच की जाये, तो कई चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है.

पंचायत कार्य एजेंसी अपने चहेते वेंडरों से ही जमा लेते हैं वाउचर

वेंडर और पंचायत कार्य एजेंसी का सांठगांठ इतना मजबूत है कि लाभुकों को संबंधित वेंडरों से ही वाउचर लेने का दबाव बनाया जाता है. वेंडर पंचायत कार्य एजेंसी के साथ कमीशन की राशि सेट करने के बाद लाभुकों से सहमति पत्र लेकर वाउचर प्रखंड में जमा कर रहे हैं. मनरेगा लाभुक जिस दुकान से सामग्री की खरीद करता है, उसका पंजीकरण नहीं होने का लाभ भी वेंडर खूब उठा रहे हैं. वेंडर लाभुकों से संपर्क स्थापित कर उससे एक प्रमाणपत्र में हस्ताक्षर करा लेते हैं, जिसमें कहा जाता है कि सामग्री का भुगतान उक्त वेंडर से मिला है जिसके आधार पर वेंडर के खाते में राशि भेजी जाती है.

केस स्टडी 1

मानजोरी पंचायत के पूर्व मुखिया गौरीशंकर साह ने उपायुक्त को दिये आवेदन में कहा है कि उसने वर्ष 2022-23 में मनरेगा कूप का निर्माण कराया है. उसने स्वयं से कूप निर्माण में सामग्री खरीद कर उपयोग करते हुए कूप को पूरा कराया है. लेकिन, कमीशन के लालच में उसका भुगतान बाधित कर दिया है. जबकि, उसके बाद कूप का निर्माण कराने वाले लाभुकों को भुगतान प्राप्त हो गया है.

केस स्टडी 2

बड़कीटांड़ पंचायत के दालगंदो निवासी टेरेसा हेंब्रम को मनरेगा कूप का लाभ मिला था. उसने कूप की खुदाई कार्य लगभग पूरी कर ली थी, लेकिन समय पर वेंडर से उसे सामग्री नहीं उपलब्ध कराया गया. सामग्री की मांग करने के बाद भी समय पर नहीं मिला, जिससे कूप भारी बारिश की चपेट में आकर धंस गया. ऐसे में कूप का निर्माण कार्य बाधित हो गया.

केस स्टडी 3

छोटकी खरगडीहा पंचायत के हरखुडीह निवासी मो मेहबूब के अनुसार उसे पशु शेड का लाभ मिला था. दो साल से सामग्री मद की राशि का इंतजार कर रहे थे. जब सामग्री मद की राशि पंचायत में आवंटित की गयी, तो एक वेंडर के खाते में राशि भेजी गयी. अब वेंडर मनमाना कमीशन की मांग कर रहा है. विवश होकर वरीय अधिकारियों के पास इसकी शिकायत की गयी.

डीडीसी ने पंचायत कार्य एजेंसी को किया शो-कॉज

डीसी रामनिवास यादव ने मनरेगा लाभुकों को हो रही परेशानी को गंभीरता से लिया है. डीसी ने उप विकास आयुक्त (डीडीस) को इसकी जांच कर रिपोर्ट करने का निर्देश दिया. इप डीडीसी ने तत्काल पंचायत कार्य एजेंसी को शो काॅज करते हुए 10 फरवरी तक जवाब मांगा है. कहा है कि वेंडर बिना सामग्री दिये ही सत्यापन कराने में सफल रहा और मोटी कमीशन काटकर लाभुक को भुगतान करने के मामले में स्पष्टीकरण साक्ष्य के साथ बीडीओ के माध्यम से जमा करें. शो काॅज होने के बाद प्रखंड में बिना सामग्री दिये वाउचर बेचने वाले वेंडरों में हड़कंप मच गया है.

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By PRADEEP KUMAR

PRADEEP KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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