Giridih News : सूरज सिन्हा, गिरिडीह. गिरिडीह शहरी जलापूर्ति व्यवस्था सुदृढ़ करने को लेकर नगर निगम क्षेत्र में लगभग 300 करोड़ की योजना को धरातल पर उतारने का प्रयास तेज कर दिया गया है. इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर डीपीआर बनकर तैयार हो गया है. डीपीआर को तकनीकी स्वीकृति के लिए स्टेट अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी के पास भेजा गया है. यहां से जलापूर्ति योजना की तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद झारखंड सरकार की कैबिनेट से राशि आवंटित होने के पश्चात इसे गति प्रदान की जायेगी.
चूंकि वर्तमान में गिरिडीह नगर निगम क्षेत्र में 20 वर्ष पूर्व नागार्जुन कंपनी द्वारा किये गये जलापूर्ति कार्य पर शहरवासियों की निर्भरता है. अहम बात यह है कि वर्ष 2017 में नगर निगम बनने के बाद वार्डों की संख्या 30 से बढ़कर 36 हो गयी है, लेकिन नये छह वार्डों में जलापूर्ति योजना का विस्तार नहीं हो पाया. इतना ही नहीं पूर्व में जिन वार्डों की मैपिंग कर पाइपलाइन बिछाने का काम किया गया था, उसमें भी कई मुहल्लों में पाइप मिसिंग है. लिहाजा उक्त इलाकों में सही मात्रा में पानी नहीं पहुंच पा रहा है. इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. गर्मी के मौसम में स्थिति और विकट हो जाती है. पेयजल को लेकर हाहाकार मचता है और आंदोलन का दौर शुरू हो जाता है. यह समस्या पिछले कई वर्षों से जारी है. लिहाजा शहरवासियों द्वारा सुदृढ़ जलापूर्ति व्यवस्था की मांग होती रही है. लोगों की इसी मांग के मद्देनजर नगर विकास मंत्री सह गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने शहरी जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ कराने के लिए नये सिरे से डीपीआर बनाने का निर्देश दिया ताकि नगर निगम के सभी वार्डों के लोगों तक इसका लाभ पहुंच सके. मंत्री के निर्देश के आलोक में पिछले वर्ष मई माह में नगर प्रशासक प्रशांत कुमार लायक के साथ वाप्कोस लिमिटेड के इंजीनियर ने उसरी नदी, बराकर नदी और सीसीएल के कई चानकों में पानी की उपलब्धता का निरीक्षण किया गया था. इसके बाद बेहतर जलापूर्ति को लेकर डीपीआर बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो कि अब पूरी कर ली गयी है.आबादी बढ़ी पर संसाधनों की रही कमी :
गिरिडीह नगर निगम क्षेत्र की जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 1.43 लाख थी. वर्ष 2025 में अनुमानित आबादी लगभग दो लाख हो गयी है. चूंकि हालिया वर्षों में सीसीएल क्षेत्र के कई मुहल्लों को शहरी क्षेत्र में शामिल किया गया है. वहीं देवरी, गावां, जमुआ, राजधनवार से भी कई लोग आकर गिरिडीह शहरी क्षेत्र में बस गये हैं. ऐसे में आबादी बढ़ी, परंतु जलापूर्ति संसाधनों की कमी रही. इस वजह से शहरवासियों को पेयजल को लेकर कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है.पांच स्थानों पर बनेगा इंटेकवेल व डब्ल्यूटीपी :
गिरिडीह नगर निगम क्षेत्र में सुचारू जलापूर्ति के लिए पांच स्थानों पर इंटेकवेल व डब्ल्यूटीपी बनाने का प्रस्ताव है. इसके तहत गिरिडीह-डुमरी पथ में बराकर नदी के पास, पचंबा के नीचे गुहियाटांड़ चानक, बनखंजो में उसरी नदी के किनारे, बरवाडीह में सीसीएल चानक एवं हरसिंगरायडीह में उसरी नदी के किनारे इंटेकवेल बनाया जायेगा. साथ ही डब्ल्यूटीपी का निर्माण होगा. इसके माध्यम से वार्ड नंबर एक से लेकर 36 तक में जलापूर्ति होगी. नये और पुराने वार्डों में जहां पाइप की कमी है वहां पर संसाधन व व्यवस्था में सुधार किया जायेगा. वर्तमान में खंडोली वाटर ट्रीटमेंट पुराना, खंडोली वाटर ट्रीटमेंट प्लांट न्यू, चैताडीह वाटर ट्रीटमेंट प्लांट एवं महादेव तालाब वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से शहरी क्षेत्र में जलापूर्ति की जा रही है. चैताडीह वाटर ट्रीटमेंट प्लांट एवं महादेव तालाब वाटर ट्रीटमेंट प्लांट सीसीएल के चानकों पर निर्भर है. वर्षों पुराना चानक रहने के कारण इसकी स्थिति भी खस्ता होती जा रही है. ऐसे में पांच इंटकवेल व डब्ल्यूटीपी का निर्माण करा लोगों को जलापूर्ति योजना का लाभ प्रदान करना है.योजना से जलापूर्ति व्यवस्था का हो जायेगा कायाकल्प : उप नगर आयुक्त
नगर निगम के उप नगर आयुक्त प्रशांत कुमार लायक कहते हैं कि नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू की पहल पर इस महत्वाकांक्षी योजना पर काम चल रहा है. उन्होंने बताया कि इस योजना के धरातल पर उतरने से जलापूर्ति व्यवस्था का कायाकल्प हो जायेगा. डोर-टू-डोर पानी पहुंच जायेगा. उन्होंने बताया कि इस जलापूर्ति योजना के तहत सभी एक सर्किट से जुड़े रहेंगे, ताकि भविष्य में कोई प्लांट फेल होता है तो दूसरी से शहरी क्षेत्र के इलाकों को आसानी से जलापूर्ति की जा सके.नगर निगम क्षेत्र के 36 वार्डों की जनता को मिलेगी महत्वाकांक्षी जलापूर्ति योजना की सौगात : मंत्री
गिरिडीह. नगर विकास मंत्री सह गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि शहरी जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने की योजना है. नगर निगम क्षेत्र के सभी 36 वार्डों की जनता को व्यवस्थित महत्वाकांक्षी जलापूर्ति योजना की सौगात मिलेगी. मंत्री श्री सोनू ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर डीपीआर तैयार हो गया है. आगे की प्रक्रिया चल रही है. उन्होंने बताया कि यह योजना लगभग 300 करोड़ की होगी. इस योजना को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने का काम किया जायेगा. मंत्री ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में 2005 में वाटर सप्लाई योजना धरातल पर उतारी गयी थी. इसकी स्थिति लचर हो रही है. ऐसे में नये सिरे से जलापूर्ति योजना को धरातल पर उतारने का निर्णय लिया गया है, ताकि नये और पुराने वार्डों में पाइप व जलापूर्ति की कमी को दूर करते हुए सिस्टम को दुरूस्त किया जा सके. उन्होंने बताया कि महादेव तालाब वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और चैताडीह वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की स्थिति कमजोर होती जा रही है. शहरवासियों की बड़ी आबादी की निर्भरता खंडोली वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर है. उन्होंने बताया कि पांच स्थानों पर क्रमश: गिरिडीह-डुमरी पथ पर बराकर नदी, पचंबा के नीचे चानक, बनखंजो के पास उसरी नदी के किनारे, हरसिंगरायडीह के पास उसरी नदी के किनारे व बरवाडीह चानक के समक्ष इंटेकवेल व डब्ल्यूटीपी बनेगा. यहां से नगर निगम क्षेत्र के सभी मुहल्लों में जलापूर्ति होगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

