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पीडीएस अनाज के वितरण में गिरिडीह फिर सबसे पीछे, मात्र 67 प्रतिशत हुआ वितरित

Updated at : 03 Jul 2024 11:11 PM (IST)
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पीडीएस अनाज के वितरण में गिरिडीह फिर सबसे पीछे, मात्र 67 प्रतिशत हुआ वितरित

जिले में पीडीएस अनाज के वितरण व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो पा रहा है. स्थिति यह है कि अनाज वितरण में जून माह में भी गिरिडीह जिला राज्य में सबसे पीछे हो गया है. 30 जून तक जहां जून माह का राज्य का औसत वितरण 88.42 प्रतिशत हुआ है.

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गड़बड़झाला. जिले में अनाज की कालाबाजारी चरम पर, चरमराई वितरण व्यवस्था पर विभाग मूकदर्शकगिरिडीह. जिले में पीडीएस अनाज के वितरण व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो पा रहा है. स्थिति यह है कि अनाज वितरण में जून माह में भी गिरिडीह जिला राज्य में सबसे पीछे हो गया है. 30 जून तक जहां जून माह का राज्य का औसत वितरण 88.42 प्रतिशत हुआ है. वहीं गिरिडीह जिला का वितरण प्रतिशत 67.26 ही पहुंच सका है. खराब वितरण व्यवस्था पर अधिकारी गत माह चुनाव कार्य में व्यस्तता का बहाना बना रहे हैं, लेकिन जून माह में भी गिरिडीह जिला की स्थिति अच्छी नहीं रही. जून माह में 112835.25 क्विंटल आवंटित अनाज के विरुद्ध मात्र 785956.69 क्विंटल अनाज का ही वितरण किया जा सका है. राज्य के अधिकांश जिलों में 90 प्रतिशत से भी ज्यादा का अनाज वितरण रिकॉर्ड किया गया है. राज्य में पश्चिम सिंहभूम 73.74 प्रतिशत, सरायकेला खरसावां 82.83 प्रतिशत, पलामू 88.01 प्रतिशत, साहेबगंज 88.57 प्रतिशत, धनबाद 88.59 प्रतिशत और बोकारो 88.61 प्रतिशत अनाज का वितरण किया गया है, वहीं कोडरमा 95.69 प्रतिशत अनाज का वितरण कर राज्य में पहले नंबर पर है. आश्चर्य की बात तो यह है कि गिरिडीह जिला मई माह में भी फिसड्डी रहा और जून माह में भी वितरण व्यवस्था काफी खराब रही. वहीं जिले में अनाज की कालाबाजारी भी चरम पर है. सब कुछ जानते हुए भी विभागीय अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं.

घोटाले के अनाज का सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है समायोजन : बता दें कि गिरिडीह जिले में 87 हजार क्विंटल अनाज की हेराफेरी का मामला पहले ही उजागर हो चुका है. इस मामले में उपायुक्त के स्तर से गठित कमेटी ने गोदामों का और परिवहन का भौतिक सत्यापन करने के बाद स्पष्ट कर दिया है कि जिले में 87 हजार क्विंटल गायब है. जानकारी के मुताबिक गिरिडीह जिले के लिए आवंटित अनाज एफसीआइ गोदाम से तो चला, लेकिन एसएफसी के गोदाम में नहीं पहुंच सका. यानी कई ट्रकें आज भी अनाज लेकर गोदाम तक नहीं पहुंची हैं. इस गायब 87 हजार क्विंटल अनाज को समायोजन करने के लिए कालाबाजारी करने वाले लोग लगे हुए हैं, ताकि घोटाले पर पर्दा डाला जा सके. इसके लिए बार-बार अवधि विस्तार लेकर अनाज का समायोजन किया जा रहा है. सूत्रों की मानें तो 87 हजार क्विंटल में से अब-तक लगभग 50 हजार क्विंटल से भी ज्यादा अनाज का समायोजन कर लिया गया है. बताया जा रहा है कि एक ओर जहां पुराने चालान को लेकर रिसीविंग दिखाया जा रहा है, वहीं सूत्रों का कहना है कि पूर्व में ही अनाज के तस्करों ने कंप्यूटर ऑपरेटर की मदद से ऑनलाइन रिसीविंग की व्यवस्था भी कर रखी है.

अवधि विस्तार लेकर किया जा रहा है अनाज का वारा-न्यारा

गिरिडीह जिले में अवधि विस्तार का खेल लंबे समय से चल रहा है. इस खेल में गिरिडीह से लेकर रांची तक के कई अधिकारियों की संलिप्तता बतायी जा रही है. बता दें कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्रत्येक महीने का अनाज उसी महीने में कार्डधारियों के बीच वितरण करने का प्रावधान रहने के बाद भी राज्य खाद्य निगम के अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर हर माह अवधि विस्तार लिया जा रहा है. 15 दिनों का अवधि विस्तार लेकर गिरिडीह जिले के कई प्रखंडों में समायोजन से लेकर कालाबाजारी तक का खेल चल रहा है. सूत्रों की मानें तो जिन प्रखंडों में सबसे ज्यादा अनाज की हेराफेरी की गयी है, उन प्रखंडों में अवधि विस्तार लेकर कार्डधारियों से डबल फिंगर ई-पोस मशीन पर लेकर अनाज की हेराफेरी की जा रही है. कार्डधारियों से दो माह का अंगूठा ई-पोस मशीन पर लेने के बाद उन्हें एक माह का अनाज उन्हें एक माह का अनाज थमा दिया जा रहा है. सूत्रों का कहना है कि जिले के बिरनी, धनवार, जमुआ और सरिया में घोटाले के अनाज का समायोजन करने के लिए अनाज तस्कर सक्रिय हैं. इन प्रखंडों में डबल फिंगर लेकर एक माह का अनाज देने की शिकायतें लगातार मिल रही है. बावजूद विभागीय अधिकारियों ने चुप्पी साध रखा है. बता दें कि मई माह का अनाज 31 मई तक बिरनी में 17.15 प्रतिशत, धनवार में 7.03 प्रतिशत, जमुआ में 4.87 प्रतिशत और सरिया में 39.15 प्रतिशत ही वितरित किया जा सका था. इस माह में 15 दिनों का अवधि विस्तार लेकर 15 जून तक अनाज का वितरण बिरनी में 95.89 प्रतिशत, धनवार में 94.76 प्रतिशत, जमुआ में 92.81 प्रतिशत और सरिया में 94.45 प्रतिशत कर दिया गया. विभाग के जानकार लोगों का कहना है कि यदि 15 दिनों में इतनी बड़ी मात्रा में अनाज का वितरण किया जा सकता है तो प्रत्येक महीने के 30 दिन में अनाज क्यों नहीं वितरित किया जाता. बता दें कि अनाज की वितरण व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके इसके लिए भारतीय खाद्य निगम के द्वारा एक माह अग्रिम अनाज राज्य खाद्य निगम को देता है और राज्य खाद्य निगम द्वारा वितरण में बड़े पैमाने पर धांधली कर दी जाती है.

बिरनी, धनवार, जमुआ और सरिया में वितरण व्यवस्था सबसे खराब

गिरिडीह जिले के 13 प्रखंडों में से चार प्रखंडों में अनाज वितरण की सबसे खराब व्यवस्था इस बार भी देखी गयी. जून माह में बिरनी में वितरण का प्रतिशत 15.85 रहा, जबकि धनवार में 23.89 प्रतिशत, जमुआ में 26.51 प्रतिशत और सरिया प्रखंड में 30.20 प्रतिशत अनाज का वितरण हो सका है. बता दें कि मई माह में भी इन चार प्रखंडों की वितरण व्यवस्था सबसे खराब पायी गयी थी.

(राकेश सिन्हा)

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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