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Giridih News :चार वर्ष गुड सेमेरिटन योजना से सिर्फ 25 हुए लाभान्वित

Updated at : 16 Jan 2026 10:58 PM (IST)
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Giridih News :चार वर्ष गुड सेमेरिटन योजना से सिर्फ 25 हुए लाभान्वित

Giridih News :सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों की समय पर मदद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा जनवरी 2022 में लागू की गयी गुड सेमेरिटन योजना गिरिडीह जिले में अब तक अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सकी है. योजना लागू होने के लगभग चार वर्ष बीतने के बावजूद जिले में अब तक मात्र 25 लोगों को ही इसका लाभ मिला है.

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चौंकाने वाली बात यह है कि इन 25 लाभार्थियों में से करीब 11 लोग अकेले बगोदर थाना क्षेत्र से हैं, जबकि जिले के अन्य थाना क्षेत्रों से लाभार्थियों की संख्या बेहद कम है. यह आंकड़ा जिले में योजना को लेकर जागरूकता की कमी बताते हैं. जानकारों के अनुसार सड़क दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति की मदद करने से लोग अब भी कतराते हैं. पुलिस कार्रवाई, कोर्ट-कचहरी और अनावश्यक पूछताछ का डर लोगों को पीछे हट जाते हैं. जबकि, गुड सेमेरिटन योजना के तहत घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को कानूनी संरक्षण दिया जाता है और उसे किसी भी तरह की कानूनी उलझन में नहीं फंसाया जाता.

घायल को अस्पताल पहुंचाने पर नकद के साथ मिलता है प्रशस्ति पत्र

योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर (दुर्घटना के बाद का पहला घंटा) में अस्पताल पहुंचाने वाले नागरिक को सरकार की ओर से 5,000 प्रोत्साहन राशि के साथ प्रशस्ति देती थी. इसे बढ़ाकर 25 हजार कर दिया गया है. सभी आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है. गिरिडीह जिला परिवहन विभाग के अनुसार योजना में गंभीर और सामान्य दोनों प्रकार की चोटों के लिए प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया है. यदि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति गंभीर रूप से घायल नहीं है और उसे किसी वे अस्पताल पहुंचाया जाता है, तो ऐसे मामले में भी प्रोत्साहन राशि दी जाती है. विभाग के अनुसार यदि घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने में दो लोग शामिल होते हैं तो दोनों को समान राशि मिलेगी. जानकारी का है अभाव : सड़क दुर्घटनाओं के बाद कई मामलों में लोग मानवीयता दिखाते हुए घायल व्यक्ति को समय रहते अस्पताल पहुंचा देते हैं, लेकिन गुड सेमेरिटन योजना की जानकारी नहीं होने के कारण वह कोई दावा नहीं कर पाते. अधिकांश लोगों को ना तो योजना की शर्तों की पूरी जानकारी होती है और ना ही यह स्पष्ट होता है कि मदद करने के बाद उन्हें किन औपचारिक प्रक्रियाओं से गुजरना होगा. कई बार अस्पताल स्तर पर घायल के उपचार के दौरान मदद करने वाले व्यक्ति को गुड सेमेरिटन विधिवत दर्ज नहीं किया जाता है. वहीं, पुलिस स्तर पर भी केस से संबंधित विवरण में त्रुटि या अधूरी जानकारी के कारण योग्य मामले योजना की सूची से बाहर रह जाते हैं. ऐसे में वह व्यक्ति, जिसने बिना किसी स्वार्थ के घायल को अस्पताल पहुंचाया, ना तो प्रोत्साहन राशि का लाभ ले पाता है और ना ही प्रशस्ति पत्र मिलता है.

25 हजार की है राह-वीर योजना, अब तक एक को नहीं मिला लाभ

वहीं भारत सरकार ने गुड सेमेरिटन योजना को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से इसके तहत एक नयी प्रोत्साहन योजना की शुरुआत की. यह योजना मार्च 2025 में लागू की गयी, जिसका नाम राह-वीर योजना रखी गयी है. इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर (पहले एक घंटे) के भीतर अस्पताल पहुंचाने वाले नागरिक को 25,000 की प्रोत्साहन राशि दिये जाने का प्रावधान है. साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट राहवीरों को एक लाख रुपये ट्रॉफी से सम्मानित किया जाता है. हालांकि, इस योजना के लागू होने के बाद गिरिडीह जिले में अब तक किसी भी व्यक्ति को इसका लाभ नहीं मिल पाया है. इससे यह स्पष्ट होता है कि योजना को लेकर न तो पर्याप्त जागरूकता है और न ही इसकी प्रक्रिया आम लोगों तक सही ढंग से पहुंच पायी है. जानकारों का मानना है कि यदि इस योजना के प्रावधानों की जानकारी व्यापक स्तर पर दी जाये और अस्पताल, पुलिस व परिवहन विभाग के बीच बेहतर समन्वय हो, तो राह-वीर योजना सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक प्रभावी पहल साबित हो सकती है.

लोगों के साथ अस्पताल कर्मी भी अनभिज्ञ : डीटीओ

गिरिडीह के जिला परिवहन पदाधिकारी (डीटीओ) संतोष कुमार ने बताया कि राह-वीर योजना का लाभ कई लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है, क्योंकि लोगों और कई अस्पताल कर्मी इस योजना से अनभिज्ञ हैं. उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना में घायल को अस्पताल लाता है, तो उसे अस्पताल के कर्मियों को इसकी जानकारी देनी होती है. इसके बाद अस्पताल का कर्मी यह जानकारी अपने वरीय अधिकारियों को भेजता है और सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नागरिक को योजना के तहत लाभ दिया जाता है. डीटीओ ने कहा कि जागरूकता की कमी के कारण अभी तक लोग लाभ नहीं ले पा रहे हैं. उन्होंने बताया कि इसे दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ एक वर्कशॉप का आयोजन जल्द ही किया जायेगा, जिसमें अस्पताल के सभी कर्मियों को योजनाओं के प्रावधान और लाभों की पूरी जानकारी दी जायेगी.

छह महीने में 216 सड़क हादसे, 116 लोगों की मौत और 390 घायल

गिरिडीह जिले में वर्ष 2025 के सिर्फ पहले छह महीनों में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या चिंता बढ़ा देने वाली रही है. इस अवधि में जिले में कुल 216 सड़क हादसे दर्ज किये गये. इसमें 116 लोगों की मौत हुई और लगभग 390 लोग गंभीर रूप से घायल हुए. ये आंकड़े यह स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि जिले में सड़क सुरक्षा अब भी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है. दुर्घटनाओं का मुख्य कारण ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन, वाहनों की तेज रफ्तार व सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता का अभाव है. इसके अलावा हेलमेट, सीट बेल्ट और अन्य सुरक्षा उपकरणों का उपयोग नहीं करना भी हादसों का बड़ा कारण है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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By PRADEEP KUMAR

PRADEEP KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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