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Giridih News :गिरिडीह जिले की 19 सड़कों का वेस्ट मटेरियल से निर्माण

Updated at : 08 Feb 2026 11:40 PM (IST)
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Giridih News :गिरिडीह जिले की 19 सड़कों का वेस्ट मटेरियल से निर्माण

Giridih News :जिले में 19 सड़कों का निर्माण कार्य एफडीआर टेक्नॉलोजी से शुरू कर दी गयी है. लगभग 175 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण के लिए ग्रामीण इलाकों के पथों का चयन किया गया है. इस सड़क के निर्माण से जहां लागत खर्च में कमी आयेगी, वहीं पर्यावरण संरक्षण में काफी हद तक मदद भी मिलेगी.

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इस नयी तकनीक को झारखंड में ट्रायल प्रोजेक्ट के रूप में लिया गया है. राज्यभर में 148 ग्रामीण पथों का निर्माण एफडीआर टेक्नॉलोजी के माध्यम से किया जायेगा. इसमें 19 सड़कें गिरिडीह जिले से चयनित की गयी है. बगोदर प्रखंड में तीन, बेंगाबाद में दो, बिरनी में तीन, देवरी में दो, डुमरी में एक, गांडेय में एक, पीरटांड़ में दो, राजधनवार में तीन और तिसरी में दो पथों का निर्माण इस नयी टेक्नोलॉजी से किया जा रहा है.

एफडीआर तकनीक का हो रहा इस्तेमाल

जानकारी के अनुसार फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) से होने वाले सड़क निर्माण कार्य में वेस्ट मेटेरियल का उपयोग किया जाता है. पुरानी सड़कों के निर्माण में जिन सामग्रियों का इस्तेमाल होता है, उसे फिर से इस नये पद्धति से बनाये जा रही सड़कों में भी इस्तेमाल में लाया जा रहा है. एक आकलन के मुताबिक 80 से 90 प्रतिशत पुरानी सड़क की सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें उच्च स्तरीय मशीनों का उपयोग कर सबसे पहले पुराने पथ को ढीला किया जाता है और फिर ढीले किये गये सतह पर सीमेंट का छिड़काव करने के बाद पुन: एफडीआर मशीन से केमिकल व सीमेंट को मिक्स कर दिया जाता है. निर्माण कार्य के अगले चरण में तीन तरह के रोलर का इस्तेमाल कर इसे कंपेक्शन किया जाता है. फिर रोल्ड किये गये सतह पर चटाई के जैसी दिखने वाली जियो टेक्सटाइल को बिछा दिया जाता है. इसके बाद इमुलशन का उपयोग कर बिटुमिनस कंक्रीट का अंतिम सतह तैयार किया जाता है.

सड़क निर्माण की लागत खर्च में आयेगी कमी

एफडीआर पद्धति से होने वाले सड़क निर्माण कार्य के लागत खर्च में भी कमी आयेगी. इस पद्धति में जहां सड़क के निर्माण में काफी कम समय लगेगी, वहीं लागत खर्च में भी काफी बचत होगा. आम तौर पर बनने वाली सड़कों के निर्माण में प्रति किलोमीटर एक करोड़ रुपये से भी ज्यादा खर्च होते हैं, जबकि इस टेक्नोलॉजी से हो रहे निर्माण कार्य की लागत खर्च प्रति किलोमीटर लगभग 80 लाख रुपये होने की उम्मीद है. इसी प्रकार निर्माण कार्य में लगने वाले समय में भी 60 से 70 प्रतिशत का समय बचने का आकलन किया गया है. अभियंताओं की मानें तो पारंपरिक पद्धति से 10 किमी सड़क के निर्माण में 12 माह का लगता है, जबकि इस नये तकनीक में इतनी ही लंबी सड़क चार महीने में बनायी जा सकती है.

कार्बन उत्सर्जन में 20 से 30 प्रतिशत आयेगी कमी

एफडीआर पद्धति से सड़क बनाने वाली एजेंसी के विशेषज्ञों की मानें तो इस नये टेक्नोलॉजी से सड़क बनाने से पर्यावरण संरक्षण में भी काफी मदद मिलेगी. बता दें कि पारंपारिक पद्धति से सड़क के निर्माण में पहाड़-पर्वत काटकर बड़े पैमाने पर पत्थरों का इस्तेमाल किया जाता है. वहीं अलग-अलग सतहों में अलकतरा आदि के उपयोग से पर्यावरण प्रदूषित होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने पथों की सामग्रियों के इस्तेमाल होने से नया पत्थर की आवश्यकता नाम मात्र की होती है. साथ ही इस पद्धति से सड़क निर्माण में कार्बन उत्सर्जन में 20 से 30 प्रतिशत कमी आने की संभावना है.

सड़क निर्माण में एफडीआर टेक्नोलॉजी वरदान : कार्यपालक अभियंता

ग्रामीण अभियंत्रण संगठन के कार्यपालक अभियंता सुबोध कुमार दास ने बताया कि सड़क निर्माण में एफडीआर टेक्नोलॉजी वरदान साबित हो रहा है. वर्तमान में पत्थर का ज्यादा उपयोग होने से पहाड़-पर्वत का अस्तित्व खतरे में आ गया है, पर इस नये तकनीक में वेस्ट मेटेरियल का उपयोग होने से काफी कम पत्थर का इस्तेमाल हो रहा है. इस नये पद्धति के उपयोग से कम लागत खर्च, कम समय लगने के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी. बताया कि गिरिडीह जिले में लगभग 145 करोड़ रुपये खर्च कर 175 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जा रहा है. श्री दास ने कहा कि रख-रखाव पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. सड़क पर जल जमाव होने से रोकना होगा और सड़क पर चटाई जैसा बिछाये गये जियो टेक्सटाइल को उखाड़ने से बचाना होगा.

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PRADEEP KUMAR

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By PRADEEP KUMAR

PRADEEP KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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