प्राथमिक विद्यालय दयालपुर के दो कमरे में पढ़ते हैं 150 बच्चे
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 28 Jun 2024 11:50 PM
धनवार प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय दयालपुर में दो कमरों में 150 बच्चे पढ़ते हैं. विद्यालय में मात्र तीन शिक्षक हैं. जिला मुख्यालय से करीब 65 और प्रखंड मुख्यालय से 20 किलोमीटर कि दूरी पर यह स्कूल है. विद्यालय में पहली कक्षा से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए दो ही कक्षा हैं.
धनवार प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय दयालपुर में दो कमरों में 150 बच्चे पढ़ते हैं. विद्यालय में मात्र तीन शिक्षक हैं. जिला मुख्यालय से करीब 65 और प्रखंड मुख्यालय से 20 किलोमीटर कि दूरी पर यह स्कूल है. विद्यालय में पहली कक्षा से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए दो ही कक्षा हैं. प्रतिदिन शत प्रतिशत छात्रों कि उपस्थिति रहती है. ऐसे में कक्षा एक छात्र बरामदे में बैठकर पढ़ाई करते हैं. जबकि, दूसरी, तीसरी तथा चौथी व पांचवी के छात्र एक-एक कमरे में बैठते हैं.
वर्ष 1962 में हुई थी स्थापना
मालूम रहे कि की विद्यालय की स्थापना वर्ष 1962 में हुई थी. छह दशक से अधिक का समय बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस है. विभाग ने नया भवन बनाने के लिए प्रबंध समिति के खाते में राशि जरूर दी, लेकिन भवन बनाने के लिए जमीन ही नहीं मिली. शिक्षकों नें फंड वापस कर दिया. ग्रामीणों के अनुसार जब विद्यालय स्थापना हुई थी, उस समय विद्यालय के अगल-बगल काफी जमीन थी. बाद में भूस्वामी होने का बंदोबस्ती पट्टा दिखा लोगों ने इस जमीन पर मकान बना लिया. अब स्कूल मात्र चार डिसमिल में सिमट कर रह गया है. चार डिसमिल जमीन पर ही चहारदीवारी, दो कमरा, एक ऑफिस, एक किचन शेड, एक शौचालय तथा स्कूल के आंगन में एक चापाकल है. विद्यालय के प्रधानाध्यापक नारायण विश्वकर्मा ने बताया कि हमारे इस विद्यालय में खेल मैदान तो दूर यहां बच्चों के बैठने के लिए कमरा तक नहीं है. विद्यालय के पास जमीन नहीं होने की जानकारी विभाग के अधिकारियों को भी है. जमीन नहीं होने के कारण नये कमरे का निर्माण नहीं हो पा रहा है. जो संसाधन उपलब्ध हैं, उसी में विद्यालय का संचालन किया जाता है.
सड़क पर होती है प्रार्थना सभा
प्रधानाध्यापक ने बताया ति प्रार्थना सभा स्कूल के सामने सड़क पर होती है. बच्चों को खेलने के लिए जगह ही नहीं है. बच्चों ने कहा कि टिफिन के समय दोस्तों के साथ खेलने का मन करता है, लेकिन इसके लिए जगह नहीं है. सड़क पर खेलने निकलते हैं, तो शिक्षक डांटते हैं. कभी भी खेलने का मौका हमें नहीं मिलता है. सड़क पर प्रार्थना सभा होने के दौरान वाहनों को रोककर रखा जाता है. जल्दबाजी में पीटी भी नहीं कर पाते हैं. स्कूल में कक्षा व मैदान की व्यवस्था जरूरी है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar News Desk
यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










