सीएए व एनसीआर के विरोध में शांति मार्च

Updated at : 03 Jan 2020 1:16 AM (IST)
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सीएए व एनसीआर के विरोध में शांति मार्च

गिरिडीह : नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) व राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनसीआर) के विरोध में गुरुवार को आम नागरिक मंच गिरिडीह के बैनर तले शांति मार्च निकाला गया. मार्च बरवाडीह से निकलकर पुरनानगर, श्रीरामपुर, बुढ़ियाखाद होते हुए बरवाडीह स्थित करबला मैदान पहुंचा. मार्च में मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ-साथ विभिन्न समुदाय के लोग भी शामिल […]

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गिरिडीह : नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) व राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनसीआर) के विरोध में गुरुवार को आम नागरिक मंच गिरिडीह के बैनर तले शांति मार्च निकाला गया. मार्च बरवाडीह से निकलकर पुरनानगर, श्रीरामपुर, बुढ़ियाखाद होते हुए बरवाडीह स्थित करबला मैदान पहुंचा. मार्च में मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ-साथ विभिन्न समुदाय के लोग भी शामिल हुए. हाथों में तिरंगा झंडा व तख्तियां लिये लोग सरकार द्वारा लागू एनसीआर व सीएए का विरोध कर रहे थे.

जुलूस बरवाडीह करबला मैदान में पहुंचने के बाद सभा में तब्दील हो गया. इस सभा में गोड्डा के पूर्व सांसद फुरकान अंसारी भी शामिल हुए. जुलूस में लोग संविधान बचाओ देश बचाओ बैनर के साथ हाथों में तख्तियां व तिरंगा लेकर चल रहे थे. रिजेक्ट एनसीआर, सीएए व एनपीआर.
संविधान के अनुच्छेद 14 व 15 में छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं. हिंदू-मुस्लिम भाई-भाई, एनआरसी सीएए बाय-बाय आदि स्लोगन लिखे तख्ती हाथों में लेकर लोग सड़क पर उतरे थे. वहीं, बरवाडीह के करबला मैदान की सभा में वक्ताओं ने एनआरसी व सीएए को काला कानून बताया. सभा की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई. समापन संविधान की प्रस्तावना पढ़कर किया गया.
आरएसएस,पीएम व गृह मंत्री पर साधा निशाना : सभा में पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने आरएसएस, पीएम नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह पर जमकर हमला बोला. फुरकान ने कहा कि देश मोदी व शाह के कहने पर नहीं, बल्कि आंबेडकर के संविधान से चलेगा. कहा कि आरएसएस के एजेंडे के तहत देश की जनता के बीच भ्रम पैदा किया जा रहा है. तेल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं, मंहगाई बढ़ रही है. सरकार को इसकी चिंता नहीं है, उसे एनआरसी व सीएए की चिंता है.
उन्होंने सभा में लोगों से कहा कि इस कानून को लेकर चिंता न करें. झारखंड समेत जहां भी कांग्रेस व सहयोगी दल के साथ सरकार चल रही है, वहां इसे लागू नहीं किया जाएगा. बिहार की सराकर ने भी इस कानून को लागू नहीं करने की बात कही है. एनआरसी व सीएए के विरोध में देश के हर राज्यों में आंदोलन हो रहे हैं.
भीम सेना, दलित सेना, बुद्धीजीवी वर्ग सभी इस कानून को लेकर चिंतित हैं. कहा कि पीएम मोदी को हर हाल में इस कानून को वापस लेना पड़ेगा. अधिवक्ता सतीश कुंदन ने कहा कि धर्म के नाम पर सीएए काला कानून है. ये कानून पाकिस्तान, बंगलादेश के लोगों को नागरिकता देगा. केवल मुसलमान को नागरिकता नहीं मिलेगी. यूथ इंटक के ऋषिकेश मिश्रा ने कहा कि गुजरात में भी हिंदू-मुस्लिम को लड़ाया गया.
सभा को रामदेव विश्वबंधु,परवेज आलम, इरशाद अहमद वारिश, मो. शहनवाज अंसारी, धरनीधर मंडल, मधुपुर के नप उपाध्यक्ष जियाउल हक, माले नेता राजेश सिन्हा, फिरदौस प्रवीण, सैफ अली गुड़डू, सुखदेव दास, कमल दास, दिलीप रजक, ललन दास, तुसार अविराज, नैयर परवेज आदि ने भी संबोधित किया व इस कानून को वापस लेने की मांग की. कार्यक्रम को सफल बनाने में मो. आयाज, मो. मसीर, मो. तारिक, सद्दाम हुसैन, मो. सबा अहमद, मो. राज, मो. शेरू, मो. अली, मो. जसीम, मो. अमीन अकेला आदि ने भूमिका निभायी.
सुरक्षा के थे पुख्ता इंतेजाम : बरवाडीह करबला मैदान में आयोजित सभा को लेकर सुरक्षा के भी पुख्ता इंतेजाम किये गये थे. एसडीएम राजेश प्रजापति, नगर थाना प्रभारी आदिकांत महतो, मुफस्सिल थाना प्रभारी रत्नेश मोहन ठाकुर कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे. वहीं पूरे करबला मैदान में पुरुष व महिला पुलिस बल के जवान तैनात थे.
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