फीस वृद्धि को ले हाईकोर्ट के आदेश से हर्ष

Updated at : 15 May 2019 2:09 AM (IST)
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फीस वृद्धि को ले हाईकोर्ट के आदेश से हर्ष

गिरिडीह : निजी स्कूलों की फीस वृद्धि को लेकर हाईकोर्ट के फैसले का छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों ने स्वागत किया है. अभिभावकों ने उम्मीद जतायी है निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगेगी. बता दें कि निजी स्कूलों को फीस वृद्धि पर हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है और कहा कि फीस वृद्धि के […]

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गिरिडीह : निजी स्कूलों की फीस वृद्धि को लेकर हाईकोर्ट के फैसले का छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों ने स्वागत किया है. अभिभावकों ने उम्मीद जतायी है निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगेगी. बता दें कि निजी स्कूलों को फीस वृद्धि पर हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है और कहा कि फीस वृद्धि के लिए स्कूल व जिला स्तरीय कमेटी की मंजूरी मिलने के बाद हाईकोर्ट से अनुमति लेनी होगी.

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बेंच ने फीस वृद्धि पर रोक लगायी है. फीस वृद्धि पर रोक लगाने के लिए सरकार द्वारा बनाये गये नियम को चुनौती देने वाली याचिका पर हुई सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश ने यह रोक लगायी. सरकार ने 10 फीसदी से अधिक फीस वृद्धि रोकने के लिए कमेटी का गठन किया है. गठित कमेटी की सहमति के बिना फीस वृद्धि नहीं करने का सरकार ने नियम बनाया है.
फीस नियंत्रण कानून को नहीं मान रहे निजी स्कूल संचालक : झारखंड अभिभावक महासंघ के महासचिव ने शिवेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि झारखंड सरकार द्वारा फीस नियंत्रण के लिए एक कानून 7 जनवरी 2019 को लागू की गयी है. जिसके अनुसार स्कूल स्तर पर एवं जिला स्तर पर एक समिति बनायी जानी है.
स्कूल को यह अधिकार इस वर्ष से नहीं है कि बिना समिति के अनुमोदन के फीस बढ़ा सके. अगर 10 प्रतिशत तक फीस में वृद्धि करनी है तो स्कूल समिति से सहमति लेनी जरूरी है और 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि करनी है तो जिला समिति स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुसार तय करेगी. जिसमें निजी स्कूलों का वार्षिक अंकेक्षण रिपोर्ट जिला समिति के समक्ष प्रस्तुत करना होगा.
हालांकि गिरिडीह जिला में निजी स्कूलों द्वारा झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधित) अधिनियम 2017 के अनुसार समिति गठित नहीं की गयी है और न ही जिला समिति का अभी तक गठन किया गया है. फिर भी निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस में बढ़ोतरी कर अभिभावकों से वसूला जा रहा है. झारखंड उच्च न्यायालय ने दायर याचिका में अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि समिति पूर्ण रूप से कार्य नहीं कर रही है और निजी स्कूलों द्वारा फीस में वृद्धि कर लिया जा रहा, जो गलत है. अतः उस पर रोक लगाते हुए कहा गया है कि उच्च न्यायालय से आदेश के बाद ही वृद्धि कर सकते है.
वैसे अभिभावक महासंघ आदेश की प्रतीक्षा में है. आदेश की प्रति मिलते ही उसका अवलोकन के बाद शिक्षा विभाग को अवगत करायेगी कि आदेश के अनुकूल निजी स्कूलों को निर्देश भेजे. झारखंड अभिभावक महासंघ उक्त याचिका में अधिनियम के अनुकूल कुछ और भी मुद्दे पर उच्च न्यायालय को अवगत करायेगी. ताकि अभिभावकों को पूर्ण रूप से राहत मिले और सरकार के अधिनियम का अक्षरशः पालन हो.
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