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मृतकों के परिजनों को 3.5 लाख रुपये का मुआवजा मिला

Updated at : 20 Nov 2025 9:17 PM (IST)
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मृतकों के परिजनों को 3.5 लाख रुपये का मुआवजा मिला

चिनिया में ग्रामीणों को हाथियों से बचाव के तरीके बताये

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चिनिया में ग्रामीणों को हाथियों से बचाव के तरीके बताये प्रतिनिधि, चिनिया चिनिया वन क्षेत्र के मुरटंगी गांव स्थित खेल मैदान में गुरुवार को वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से मानव-हाथी द्वंद्व जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता गढ़वा दक्षिणी वन प्रमंडल पदाधिकारी एबिन बेनी अब्राहम ने की. कार्यक्रम के दौरान जंगली हाथियों के हमले में मारे गये पांच ग्रामीणों के परिजनों लालो देवी, रामबेलास सिंह, बेलेन सिंह, जसिंदा कुजुर और सकीला बीबी को मुआवजे के रूप में 3.50 लाख रुपये का चेक डीएफओ एबिन बेनी अब्राहम ने सौंपा. इस अवसर पर अंचल निरीक्षक विनय कुमार गुप्ता, मुखिया रामेश्वर सिंह, चंपा देवी, गोपाल कुमार यादव, बीडीसी पति दयाराम, प्रभारी वनपाल अनिमेष कुमार, वनरक्षी हेमंत तिर्की, गौतम सागर, राहुल कुमार, धीरेंद्र कुमार, गौतम पांडे, राधेश्याम कुमार सहित कई वनकर्मी और ग्रामीण जैसे अनिल सिंह, वीरेंद्र सिंह, नासिर मंसूरी, संजय शाह, भोला यादव, निर्मल यादव, उदय शाह आदि उपस्थित थे. ग्रामीणों को हाथी से सुरक्षा के उपाय बताये गये डीएफओ एबिन बेनी अब्राहम ने कहा कि जंगली हाथियों के गांव के पास आने की सूचना मिलते ही ग्रामीण जंगल की ओर न जायें और पूरी सतर्कता बरतें. उन्होंने कहा कि हाथी से हमेशा दूरी बनाये रखें. हाथियों को भगाने के लिए पटाखे न छोड़ें. क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी पर दारू (हड़िया) बनाना पूरी तरह बंद कर दें. हाथी को देखने की उत्सुकता में उसके पास न जायें. उन्होंने कहा कि हाथी घने जंगल में रहना पसंद करते हैं, इसलिए जंगल को नुकसान न पहुंचाएं. डीएफओ ने कहा कि जिन किसानों की फसल हाथी नष्ट कर देते हैं, वे सही तरीके से आवेदन भरकर वन विभाग में जमा करें, ताकि उन्हें समय पर मुआवजा मिल सके. जंगलों के लगातार घटने से गांवों की ओर बढ़ रहे हाथी कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ वन विभाग के वन्यजीव विज्ञानी अमेंदु प्रसाद मिश्रा भी उपस्थित थे. उन्होंने कहा कि जंगलों के लगातार घटने के कारण हाथी गांवों की ओर बढ़ रहे हैं. उन्होंने बताया हाथी बहुत समझदार होता है और रास्तों को वर्षों तक याद रखता है. हाथी के झुंड में एक या दो मादा हाथी मार्गदर्शक होती हैं. हाथियों को परेशान न करें और उनके रास्ते को न रोकें. गांव में हाथी आने पर मिर्च पाउडर को आग में डालकर धुआं करने से हाथियों को दूर रखने में मदद मिलती है. किसी भी गतिविधि की सूचना वन विभाग को तुरंत दें. स्थायी समाधान की मांग कार्यक्रम में बेता पंचायत के मुखिया रामेश्वर सिंह ने कहा कि पहले हम माओवादियों के डर में जीते थे और अब हाथियों के आतंक से परेशान हैं. इसका स्थायी समाधान जरूरी है. सरकी गांव के लोगों ने हाथी से जान-माल की सुरक्षा की मांग की है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Akarsh Aniket

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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