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गढ़वा में संघ का पथ संचलन, मुस्लिम समाज ने भी की पुष्पवर्षा

Updated at : 06 Oct 2025 9:22 PM (IST)
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गढ़वा में संघ का पथ संचलन, मुस्लिम समाज ने भी की पुष्पवर्षा

संघ ने गुलामी की हीन मानसिकता को आत्मगौरव में बदला : राजीवकांत

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संघ ने गुलामी की हीन मानसिकता को आत्मगौरव में बदला : राजीवकांत प्रतिनिधि, गढ़वा सामाजिक एंव सांस्कृतिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष और विजयादशमी उत्सव के अवसर पर गढ़वा में संघ के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को भव्य पथ संचलन निकाला. पथ संचलन में देश के लिए जियें, समाज के लिए ये धड़कनें, ये सांस हो पुण्य भूमि के लिए” का उद्घोष गूंजता रहा. पूर्ण अनुशासन में पथ संचलन की शुरुआत श्री रामलला मंदिर प्रांगण से की गयी. यह सोनपुरवा, बस स्टैंड, अटल चौक, श्री गढ़देवी मंदिर, रंका मोड़, रॉकी मोहल्ला, जोड़ा मंदिर, गुड पट्टी, निमिया स्थान मंदिर, रामबंध तालाब शिव मंदिर एवं सोनपुरवा चौक से होते हुए पुनः श्री रामलला मंदिर प्रांगण में संपन्न हुआ. पथ संचलन के दौरान अनेक स्थानों पर स्वयंसेवकों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया. एक स्थान पर मुस्लिम माताओं-बहनों ने भी पथ संचलन पर पुष्पवर्षा कर सौहार्द का संदेश दिया. पथ संचलन के उपरांत श्री रामलला मंदिर परिसर में आयोजित बौद्धिक कार्यक्रम में संघ के झारखंड प्रांत के सह प्रांत प्रचारक राजीवकांत ने कहा कि देश आठ सौ वर्षों तक मुगलों और दो सौ वर्षों तक अंग्रेजों की गुलामी झेलने के बाद आत्मगौरव खो बैठा था. समाज आत्महीनता का शिकार हो गया था. ऐसे समय में 1925 में संघ की स्थापना गुलामी की मानसिकता को समाप्त कर अपनी संस्कृति पर आत्मगौरव स्थापित करने के उद्देश्य से की गयी थी. उन्होंने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि संघ का आजादी में कोई योगदान नहीं था, जबकि संघ के संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार प्रखर राष्ट्रभक्त थे. सविनय अवज्ञा आंदोलन में उन्हें 1930 में जेल भेजा गया था. देश के दुर्भाग्यपूर्ण विभाजन के समय संघ के स्वयंसेवक ही अपनी जान जोखिम में डालकर शरणार्थियों को भारत लाने का कार्य कर रहे थे. इस दौरान हजारों स्वयंसेवक शहीद हुए और 400 की लाशें तक नहीं मिलीं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Akarsh Aniket

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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