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तैयारी के दौरान कम से कम व मानक पुस्तकें ही पढ़ें

Updated at : 09 Apr 2025 8:58 PM (IST)
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तैयारी के दौरान कम से कम व मानक पुस्तकें ही पढ़ें

तैयारी के दौरान कम से कम व मानक पुस्तकें ही पढ़ें

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गढ़वा. अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने अपने एक घंटे के साप्ताहिक कार्यक्रम कॉफी विद एसडीएम में बुधवार को अनुमंडल क्षेत्र के उन छात्र-छात्राओं को अपने यहां कॉफी पर बुलाकर अनौपचारिक संवाद किया, जो यूपीएससी, जेपीएससी, एसएससी, बैंक व रेलवे जैैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. एसडीओ के आमंत्रण पर 50 से अधिक ऐसे अभ्यर्थी अनुमंडल कार्यालय पहुंचे. इस एक घंटे से अधिक के वार्तालाप में न केवल अभ्यर्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गयीं बल्कि उनकी समस्याओं और सुझावों को भी सुना गया. मानक पुस्तकें ही पढ़ें : संवाद के क्रम में कुछ छात्रों ने एसडीओ से पुस्तकों एवं अन्य अध्ययन सामग्री के चयन के बारे में प्रश्न पूछे. संजय कुमार ने सभी को सलाह दी कि वे न केवल मानक पुस्तकों के अद्यतन संस्करण पढ़ें बल्कि कम से कम पुस्तकें पढ़ें. बाजार में तमाम सारे प्रकाशन है और एक ही विषय पर सैकड़ों पुस्तकें उपलब्ध हैं. लेकिन पुस्तकों के चयन में सावधानी बरतें और कोशिश करें कि किसी भी विषय की आधार पुस्तक के रूप में एक या दो पुस्तक ही रखें, अधिक पुस्तकों का संग्रह करने से बचें. ऑनलाइन पढ़ाई में सतर्कता बरतें : संवाद के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई के गुण और दोष को लेकर हुई चर्चा के क्रम में संजय कुमार ने अभ्यार्थियों से कहा कि आज सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए इंटरनेट पर थोक में सामग्री उपलब्ध है. लेकिन अगर समझदारी नहीं दिखायी, तो आप गलत तथ्य भी पढ़ सकते हैं. उन्होंने कहा कि एक ही प्रश्न के अलग-अलग वेबसाइट पर अलग-अलग उत्तर मिल जाते हैं. ऐसे में छात्र-छात्राओं का कांसेप्ट बेहतर होने की बजाय उनकी दुविधा बढ़ जाती है. इससे वे परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते. करंट अफेयर सरकारी वेबसाइट्स से पढ़ें : विद्यार्थियों को बताया गया कि वे समसामयिक घटना क्रम के लिए सरकारी वेब पोर्टल या वेबसाइट का उपयोग भी कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि सरकारी वेबसाइट पर तथ्यों की प्रमाणिकता होती है. उन्होंने इंडियन पार्लियामेंट, बजट, इंडियन कोड, इकोनामिक सर्वे, पर्यावरण, कला और संस्कृति, अध्यादेश और अधिनियम व अंतरराष्ट्रीय संबंध के लिए विभिन्न सरकारी पोर्टल की सूची भी छात्र-छात्राओं को उपलब्ध करायी. एनसीइआरटी की किताबों को बनायें आधार : छात्र-छात्राओं को सुझाव दिया गया कि वे कक्षा 12 तक की एनसीइआरटी की पुस्तकों का भली भांति अध्ययन कर लें. यदि उनके पास पुस्तकें नहीं हैं. तो वे एनसीइआरटी की वेबसाइट से इन्हें आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं. एसडीओ ने कहा कि इसके लिए दीक्षा ऐप तथा ई-पाठशाला पोर्टल का भी सहारा लिया जा सकता है. वैकल्पिक विषय का चयन सोच समझकर करें सिविल सेवा की तैयारी कर रहे आयुष कुमार व विवेक कुमार ने ऑप्शनल सब्जेक्ट के चयन के बारे में अपनी दुविधा बतायी, तो संजय कुमार ने समझाया कि ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं है कि वे उन विषयों को ही चुनें, जो उन्होंने ग्रेजुएशन की परीक्षा में लिये थे. बल्कि वे चाहें तो अपनी रुचि का कोई ऐसा विषय भी चुन सकते हैं, जिसे उन्होंने पहले कभी किसी कक्षा में नहीं पढ़ा है. उदाहरण के लिए कोई साइंस या इंजीनियरिंग से स्नातक करने वाला व्यक्ति संघ या राज्य सिविल सर्विस परीक्षा में कला या ह्यूमैनिटी का भी कोई विषय चुन सकता है. पर ध्यान रहे कि चुने गये विषय में न केवल अभ्यर्थी की रुचि हो बल्कि उसमें पकड़ भी हो. साथ ही सिलेबस का आकार और विषय की सफलता दर का भी विश्लेषण कर लेना चाहिए. लक्ष्य हमेशा बड़ा रखें संवाद के क्रम में संजय कुमार ने अभ्यर्थियों को प्रेरित करते हुए सलाह दी कि वे अपनी क्षमता और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयारी करें, लेकिन फिर भी उन्हें अपना लक्ष्य हमेशा बड़ा रखें. जितनी बड़ी परीक्षा होती है वहां प्रतियोगिता का दायरा उतना ही कम होता है. लेकिन छोटे पदों के लिए होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में भीड़ अधिक होती है. कट ऑफ मार्क्स अधिक रहते हैं फलस्वरुप अनिश्चितता के चलते सफलता दर कम रहती है. वहीं सिविल सर्विस जैसी परीक्षाओं में भीड़ अधिक न होने के कारण गंभीर अभ्यर्थियों के लिए सफलता दर अधिक होती है, इसलिए लक्ष्य हमेशा बड़ा रखें. गढ़वा में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए माहौल : संवाद के दौरान छात्र-छात्राओं से बातचीत के क्रम में यह स्पष्ट हुआ कि गढ़वा में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अच्छा माहौल बन रहा है. कॉफी विद एसडीएम में पहुंचे दो छात्रों ने बताया कि वे पलामू जिले के रहने वाले हैं, लेकिन गढ़वा में रह कर तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि यहां अच्छा और निशुल्क पुस्तकालय तो है ही, साथ ही यहां पढ़ने का एक अच्छा प्रतियोगी माहौल भी है. अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकें उपलब्ध कराने का अनुरोध संवाद के दौरान स्नेहा कुमारी, आयुष कुमार व अन्य छात्राओं ने एसडीएम से अनुमंडलीय पुस्तकालय में अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकें उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया. इस पर सभी छात्र-छात्राओं को कहा गया कि वे सूची बनाकर दें. उनकी मांग के अनुरूप पुस्तकें उपलब्ध कराने का प्रयास किया जायेगा. पुस्तकालय के सामने बेतरतीब पार्किंग रोकने की मांग छात्रा रूपांजलि कुमारी ने एसडीएम के समक्ष शिकायत रखी कि अनुमंडलीय पुस्तकालय के सामने बेतरतीब पार्किंग के चलते उन्हें हमेशा परेशानी होती है, उस पर रोक लगाई जाये. इस पर उन्हें आश्वस्त किया गया कि उनकी इस शिकायत पर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी. कार्यक्रम में ये थे शामिल : संवाद के दौरान सुरुचि मिश्रा, आयुष दुबे, रमेश कुमार यादव, पंकज कुमार, रंजन कुमार, मुकेश कुमार, गोविंद चौधरी, कुंदन कुमार रजक, पीयूष चौबे, शशि कुमार यादव, पवन कुमार, अनुज कुमार, काजल कुमारी, सुमन कुमारी, किरण कुमारी, खुशबू कुमारी, प्रतिमा कुमारी, शिल्पा साक्षी, अनु कुमारी, स्नेहा कुमारी, अर्पित शर्मा, जूही सिंह, समृद्धि सिंह, प्रीति राखी, विवेक कुमार, प्रमोद कुमार, शिखा तिवारी, पंकज कुमार, रामलाल चौधरी, शोभित कच्छप, आनंद चंद्रवंशी, नीतीश कुमार, दीपक कुमार, सूर्यकांत, अंशुमान, नीतीश कुमार, रौशन मिश्रा, ऋषभ चौबे, संदीप चंद्रवंशी व निरंजन कुमार मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANJAY

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