जीवन जीने की कला सीखनेवाला अतुल्य ग्रंथ है रामायण : डॉ टी पीयूष

जीवन जीने की कला सीखनेवाला अतुल्य ग्रंथ है रामायण : डॉ टी पीयूष
गढ़वा. साप्ताहिक श्रीहनुमान चालीसा-पाठ का 16वां आयोजन श्रीजानकी बाग में हुआ. पूजा अर्चना के बाद श्रीहनुमान चालीसा-पाठ और आरती की गयी. इस अवसर पर सुश्रुत सेवा संस्थान के निदेशक डॉ टी पीयूष ने कहा कि रामायण जीवन जीने की कला सीखने वाला अतुल्य ग्रंथ है. हनुमानजी की आराधना से प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद स्वतः प्राप्त हो जाता है. अनिरुद्ध कुमार ने कहा कि उनके लिए बजरंगबली ही सबकुछ हैं. आजीवन वे उनकी सेवा करते रहेंगे. इस मौके पर अरविंद कुमार मेहता ने कहा कि उनका प्रयास है कि उनके बच्चे पूरी तरह से भारतीय संस्कृति को आत्मसात कर सकें. नीरज श्रीधर ने कहा कि उन सभी को प्रत्येक मंगलवार को एक घंटे के सत्र में श्रीहनुमान चालीसा-पाठ के साथ अपने बच्चों को आध्यात्मिक और सामाजिक ज्ञान प्रदान करने प्रयास करना है. इस मौके पर अधिवक्ता अमोद कुमार सिन्हा, संतोष पुरी, गोविंदा कुमार, शिल्पी, साजन, प्रमोद कुमार आदि उपस्थित थे.
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