इमरजेंसी में दोपहर तीन बजे के बाद प्राथमिक उपचार की सुविधा नहीं
Published by : Akarsh Aniket Updated At : 10 Apr 2026 9:36 PM
ओपीडी खत्म होते ही डंडई सीएचसी के परिसर में पसर जाता है सन्नाटा
ओपीडी खत्म होते ही डंडई सीएचसी के परिसर में पसर जाता है सन्नाटा रमेश विश्वकर्मा, डंडई (गढ़वा) डंडई प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) चिकित्सकों की ड्यूटी दोपहर तीन बजे तक ही निर्धारित की गयी है. प्रखंड की करीब 80 हजार की आबादी और 28 गांवों की स्वास्थ्य सुरक्षा का जिम्मा उठाने वाले इस केंद्र में दोपहर तीन बजे के बाद चिकित्सक नहीं होने के कारण स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप हो जाती हैं. आलम यह है कि सूरज ढलते ही अस्पताल परिसर वीरान हो जाता है और किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को देखने वाला कोई नहीं होता. अस्पताल में ओपीडी की सुविधा सुबह नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक ही सीमित है. इसके बाद अगर किसी की तबीयत बिगड़ती है या कोई सड़क दुर्घटना होती है, तो मरीज को प्राथमिक उपचार तक नसीब नहीं होता. मजबूरन ग्रामीणों को निजी क्लिनिकों की महंगी फीस भरनी पड़ती है या फिर गांवों में सक्रिय झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाकर अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है. ………….. सीएचसी का ड्यूटी रोस्टर सोमवार, बुधवार, शुक्रवार, शनिवार : डॉ मनोज कुमार दास (सुबह नौ से दोपहर तीन बजे तक) मंगलवार, गुरुवार : डॉ प्रतिमा कुमारी (सुबह नौ से दोपहर तीन बजे तक) आयुष ओपीडी: डॉ कुमुद रंजन (प्रतिदिन सुबह नौ से दोपहर तीन बजे तक) …………….. कोट समस्या की जानकारी है. दो दिनों के भीतर तीन बजे के बाद भी डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए नया रोस्टर तैयार किया जायेगा, ताकि क्षेत्र के मरीजों को राहत मिल सके. डॉ. वीरेंद्र राम, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ………….. 24 घंटे सेवा क्यों जरूरी है आपातकालीन स्थिति: रात में प्रसव पीड़ा या दुर्घटना होने पर सदर अस्पताल जाने की मजबूरी आर्थिक बोझ: गरीब मरीजों को निजी डॉक्टरों के पास जाने से आर्थिक नुकसान. बड़ी आबादी: 28 गांवों का एकमात्र सहारा होने के कारण शाम की शिफ्ट अनिवार्य.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










