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मां चतुर्भुजी मंदिर में निशा पूजा और संधि पूजा का विशेष महत्व

Updated at : 29 Sep 2025 9:28 PM (IST)
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मां चतुर्भुजी मंदिर में निशा पूजा और संधि पूजा का विशेष महत्व

मंदिर में पूजा के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़

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मंदिर में पूजा के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ प्रतिनिधि, केतार शारदीय नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर केतार स्थित सुप्रसिद्ध मां चतुर्भुजी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. सुबह से ही मंदिर परिसर जयकारों और घंटियों की गूंज से भक्तिमय हो गया. मुख्य पुजारी बालमुकुंद पाठक और वाराणसी से पधारे विद्वान आचार्य महेंद्र दुबे के सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने विधिपूर्वक मां भगवती की पूजा-अर्चना की. पुजारी बालमुकुंद पाठक ने बताया कि रात्रि में विशेष निशा पूजा का आयोजन किया जायेगा, जो मां काली की विशेष आराधना के रूप में की जाती है. यह पूजा सप्तमी रात्रि से अष्टमी की ओर प्रवेश करने पर होती है और साधकों के लिए अत्यंत फलदायक मानी जाती है. इसके अलावा अष्टमी की भोर 1:30 बजे संधि पूजा होगी, जो अष्टमी और नवमी के संधिकाल में संपन्न होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी समय देवी दुर्गा ने चण्ड-मुण्ड का वध कर मां चामुंडा का रूप धारण किया था. भैंसहट घाटी की खुदाई से प्राप्त मां चतुर्भुजी की दिव्य मूर्ति 60 किलोग्राम चांदी के आसन एवं श्री यंत्र से सुशोभित है. इस मंदिर की महिमा क्षेत्र में बहुत प्रसिद्ध है. नवरात्रि के नौ दिनों तक यहां विशेष अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और पूजा-पाठ का आयोजन किया जाता है. मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना को मां दुर्गा अवश्य स्वीकार करती हैं. निशा पूजा और संधि पूजा में श्रद्धालु पूरी आस्था से भाग लेते हैं, जिससे मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण दिव्यता से भर उठता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Akarsh Aniket

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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