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सदियों पुरानी परंपरा को जीवित रख आज भी चाक पर बना रहे दीये

Updated at : 06 Oct 2025 9:27 PM (IST)
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सदियों पुरानी परंपरा को जीवित रख आज भी चाक पर बना रहे दीये

पारंपरिक कला आज भी जीवित, केतार के कुम्हारों के मेहनत से रौनक होता है बाजार

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पारंपरिक कला आज भी जीवित, केतार के कुम्हारों के मेहनत से रौनक होता है बाजार संदीप कुमार, केतार दीपावली का पर्व सिर्फ घरों को रोशनी से भरता ही नहीं है, बल्कि यह पारंपरिक कला और कारीगरों के जीवन में नयी ऊर्जा भी लाता है. इस क्षेत्र के कुम्हार अपने हाथों से मिट्टी को आकार देकर सुंदर दीये, कुल्हड़, बर्तन और मूर्तियां बनाते हैं. पुराने समय में इनकी मेहनत और कला से बाजार सजते थे और त्योहारों की रौनक बढ़ती थी. आज के दौर में प्लास्टिक, स्टील और चाइनीज़ सामान की भरमार के बावजूद, मिट्टी के बर्तन और दीये अब भी त्योहारों की मुख्य आवश्यकता हैं. चुनौतियों और बाजार में सस्ते विकल्पों के बावजूद, कई कुम्हार अपनी विरासत को सहेजते हुए यह कला जीवित रख रहे हैं. केतार निवासी महावीर प्रजापति ने बताया कि मिट्टी के बर्तन बनाना उनका पुश्तैनी व्यवसाय है. उनके पिता द्वारिका प्रजापति 60 वर्ष पहले इस इलाके के नामी कलाकार थे. पहले पूरा परिवार मिलकर दिन में पांच-सात हजार दीये बना देता था. अब जलावन की महंगाई और बढ़ी मजदूरी के कारण व्यवसाय कठिन हो गया है. केतार और आस-पास के कुम्हार जैसे सतन प्रजापति, समारू प्रजापति, पदुम प्रजापति, राजेंद्र प्रजापति, प्रमोद प्रजापति आदि बताते हैं कि अन्य जगहों पर सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक चाक और सहायता दी जा रही है, जबकि उन्हें कोई मदद नहीं मिली. इसके कारण डेढ़ क्विंटल मिट्टी हाथ से चाक पर घूमाकर बर्तन और दीये बनाना पड़ते हैं. दीपावली से पहले वे दीए, घड़ा, सुराही, कुल्हड़ आदि बनाकर स्टॉक करते हैं और ग्राहक घर आकर सामान ले जाते हैं. उन्होंने सरकार से उपकरण और मदद मिलने की मांग की है, ताकि कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले मिट्टी के बर्तन बनाकर लोगों को उपलब्ध कराए जा सकें और सैकड़ों कुम्हार परिवारों को रोजगार मिल सके. क्या कहते हैं पदाधिकारी इस संबंध में जेएसएलपीएस के बीपीएम अरविंद कुमार पासवान ने बताया कि हुनरमंद महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए अल्प समय में कम से कम ब्याज दर पर ऋण मुहैया कराया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Akarsh Aniket

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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