जाने क्या है चेहरा पहचान प्रणाली का महत्व: क्या इससे सुनिश्चित होगी पारदर्शिता और फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम?

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आंगनबाड़ी केंद्रों में एफआरएस (फेस रिकग्निशन सिस्टम) तकनीक क्यों अनिवार्य है? जानें इसके फायदे, पारदर्शिता और पोषण योजनाओं में इसके महत्व के बारे में पूरी जानकारी।

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गढ़वा: महिला एवं बाल विकास विभाग की हालिया गतिविधियों और प्रशासनिक निर्देशों के बाद एफआरएस (फेस रिकग्निशन सिस्टम) शब्द एकाएक चर्चा में आ गया है. आंगनबाड़ी केंद्रों और पोषण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अब एफआरएस को अनिवार्य शर्त बना दिया गया है.

क्या है एफआरएस (फेस रिकग्निशन सिस्टम)

एफआरएस यानी चेहरा पहचान प्रणाली (फेस रिकग्निशन सिस्टम) एक आधुनिक डिजिटल तकनीक है, जिसके माध्यम से लाभार्थी की पहचान उसके चेहरे का मिलान (डिजिटल सत्यापन) करके की जाती है. पोषण ट्रैकर ऐप में एकीकृत यह व्यवस्था बायोमेट्रिक सत्यापन का ही एक रूप है, जिसमें किसी भौतिक फिंगरप्रिंट की आवश्यकता नहीं होती.आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत छोटे बच्चों, धात्री माताओं और गर्भवती महिलाओं का चेहरा ऐप के जरिए स्कैन किया जाता है और डेटाबेस में दर्ज फोटो से उसका मिलान कर डिजिटल उपस्थिति दर्ज की जाती है.

क्यों जरूरी है एफआरएस

पारदर्शिता और फर्जीवाड़े पर रोक:- एफआरएस लागू होने से योजनाओं में कागजी लाभार्थियों (बोगस नाम) की पहचान कर उन्हें सूची से पूरी तरह हटाया जा सकेगा. केवल वही लोग लाभ प्राप्त कर सकेंगे, जो वास्तव में भौतिक रूप से मौजूद हैं. सही लाभार्थी तक पहुंचेगा पोषाहार:- सरकार द्वारा बच्चों के लिए भेजा जाने वाला हॉट कुक्ड मील (पका-पकाया गर्म भोजन) और पोषाहार सीधे उन्हीं तक पहुंचेगा, जिनके नाम से आवंटन जारी होता है. डिजिटल निगरानी और वास्तविक समय का आंकड़ा:- एफआरएस के माध्यम से राज्य से लेकर जिला स्तर तक अधिकारियों को वास्तविक समय (रियल-टाइम) का डेटा मिलता है कि किस केंद्र पर किस दिन कितने बच्चों ने भोजन ग्रहण किया. कागजी झंझट से मुक्ति:- उपस्थिति दर्ज करने के लिए रजिस्टर या कागजी लिखापढ़ी पर निर्भरता खत्म होगी, जिससे व्यवस्था अधिक सटीक और सुव्यवस्थित बनेगी. एफआरएस से आंकड़ों में किसी भी प्रकार का हेरफेर संभव नहीं है, जिससे आंगनबाड़ी सेविकाओं और महिला पर्यवेक्षकों की जिम्मेदारी सीधे तौर पर तय होती है.

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तकनीक का पारदर्शी उपयोग अनिवार्य

इसे लेकर गढ़वा के उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा का कहना है कि पोषण योजनाओं का वास्तविक लाभ धरातल पर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए तकनीक का पारदर्शी उपयोग अनिवार्य है. एफआरएस प्रणाली से पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह लगाम लगेगी. जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में शत-प्रतिशत लाभार्थियों का सत्यापन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है.

लापरवाही बर्दाश्त नहीं

इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.इधर उपायुक्त के इस कड़े रुख के बाद स्पष्ट है कि जिला प्रशासन एफआरएस के शत-प्रतिशत सत्यापन को लेकर पूरी तरह गंभीर है, ताकि पोषण अभियान का हर लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से जरूरतमंदों तक पहुंच सके.


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Avinash Singh

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