अब सुरक्षा के साथ इलाज भी करेगी गढ़वा पुलिस : गढ़वा जिला प्रशासन की एक संवेदनशील पहल

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गढ़वा पुलिस अब सड़क हादसों में घायलों को प्राथमिक उपचार देगी। थानों में फर्स्ट ऐड किट और पुलिसकर्मियों को मिलेगा प्रशिक्षण, जानें इस नई पहल की पूरी जानकारी।

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गढ़वा : सड़क दुर्घटनाओं के बाद शुरुआती 'गोल्डन आवर' में घायलों को त्वरित जीवनरक्षक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में गढ़वा जिला प्रशासन ने एक बड़ी और संवेदनशील पहल की है. समीक्षा बैठक के दौरान उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अब जिले के सभी पुलिस थानों, विशेषकर पुलिस कंट्रोल रूम (पीसीआर) वैन और राष्ट्रीय/राज्य राजमार्गों के किनारे स्थित थानों में फर्स्ट ऐड किट (प्राथमिक चिकित्सा किट) और अति-आवश्यक जीवनरक्षक दवाइयां अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएं .

सड़क हादसों में होने वाली मौतों के आंकड़ों में कमी लाना

जिला प्रशासन की इस पहल का मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों में होने वाली मौतों के आंकड़ों में कमी लाना है . अक्सर दुर्घटना के तुरंत बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाने या एंबुलेंस के पहुंचने तक बहुमूल्य समय निकल जाता है .ऐसे में यदि मौके पर सबसे पहले पहुंचने वाली पुलिस टीम के पास प्राथमिक उपचार के साधन उपलब्ध हों, तो कई जानें बचाई जा सकती हैं.

'गोल्डन आवर' प्रबंधन पर विशेष फोकस

उपायुक्त ने स्वास्थ्य और पुलिस प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर बल दिया. योजना को प्रभावी बनाने के लिए निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर कार्य करने का खाका तैयार किया गया है. पुलिसकर्मियों को मिलेगा फर्स्ट ऐड का प्रशिक्षण: -केवल दवाइयां उपलब्ध कराना ही काफी नहीं होगा, बल्कि थानों और पीसीआर में तैनात पुलिसकर्मियों को स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों द्वारा प्राथमिक चिकित्सा का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा. इससे वे रक्तस्राव रोकने, पट्टियां बांधने और प्राथमिक सीपीआर जैसी बुनियादी तकनीक में निपुण हो सकेंगे. हाइवे से सटे थानों पर प्राथमिकता:- जिले से गुजरने वाले मुख्य मार्गों और ब्लैक स्पॉट्स के समीप स्थित पुलिस स्टेशनों को प्राथमिकता के आधार पर हाई-टेक प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस किया जाएगा.

एंबुलेंस नेटवर्क का सुदृढ़ीकरण

उपायुक्त ने जिले के सभी प्राथमिक, सामुदायिक और क्षेत्रीय स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस की कार्यशील स्थिति सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश दिया है, ताकि प्राथमिक उपचार के तुरंत बाद मरीज को उच्च चिकित्सीय केंद्र भेजा जा सके. उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद का पहला घंटा यानी 'गोल्डन आवर' किसी भी घायल की जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है. यदि दुर्घटनास्थल पर ही पुलिस बल द्वारा प्राथमिक जीवनरक्षक सहायता मिल जाए, तो अस्पताल पहुंचने तक मरीज की स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है.

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स्वास्थ्य व्यवस्था का जायजा

उपायुक्तने जिले की समग्र स्वास्थ्य व्यवस्था का जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि ग्रामीण स्तर तक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुंचे . उन्होंने अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सकों की उपस्थिति और आपातकालीन सेवाओं को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखने का निर्देश दिया .प्रशासन के इस कदम से न केवल पुलिस की जन-सेवा वाली छवि और मजबूत होगी, बल्कि गढ़वा जिले में सड़क हादसों के दौरान त्वरित चिकित्सीय आपात प्रतिक्रिया का एक नया ढांचा भी तैयार होगा .


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Avinash Singh

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