गढ़वा: पॉपुलेशन कंट्रोल की कमान संभाल रही हैं महिलाएं, नसबंदी के नाम से ही कतरा रहे पुरुष

Updated:
विज्ञापन

सांकेतिक तस्वीर. (AI Image)

गढ़वा में परिवार नियोजन के आंकड़ों ने चौंकाया, महिलाओं ने लक्ष्य से अधिक नसबंदी कराई, जबकि पुरुष अभी भी भ्रांतियों के कारण पीछे हैं।

विज्ञापन

गढ़वा से प्रभाष मिश्रा की रिपोर्ट

आपके शहर में

विज्ञापन

गढ़वा: गढ़वा जिले में बढ़ती आबादी की रफ्तार पर ब्रेक लगाने और परिवार नियोजन को सफल बनाने का पूरा जिम्मा जैसे महिलाओं ने अपने कंधों पर उठा लिया है. आज विश्व जनसंख्या दिवस हैं ऐसे में हमें अगर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़े पर गौर करेंगे तो यह रिपोर्ट पुरुष प्रधान समाज की एक दिलचस्प और आंखें खोलने वाली हकीकत बयां कर रहे हैं.आंकड़ों के मुताबिक, जिले में आबादी नियंत्रण की असली धुरी महिलाएं ही बनी हुई हैं, जिन्होंने तय टारगेट को बहुत पीछे छोड़ते हुए रिकॉर्ड सफलता हासिल की है, जबकि पुरुष इस मामले में कोसों पीछे छूट गए हैं.

महिलाओं ने हासिल किया 114% से अधिक का लक्ष्य

गढ़वा में स्वास्थ्य विभाग ने जिले में महिला बंध्याकरण का लक्ष्य 4,523 तय किया था, लेकिन जागरूक महिलाओं ने इस सीमा को पार करते हुए 5,162 की संख्या में बंध्याकरण कराया. यह तय लक्ष्य का 114.13 प्रतिशत है, जो जिले की महिलाओं की जागरूकता की एक मिसाल है.

नसबंदी से कतरा रहे पुरुष, आंकड़ा बेहद निराशाजनक

इसके ठीक उलट, अगर बात पुरुषों की करें तो तस्वीर बेहद निराशाजनक है. पुरुषों के लिए विभाग ने महज 302 नसबंदी (एन एस भी ) का एक छोटा सा लक्ष्य रखा था, लेकिन पूरे जिले से सिर्फ 13 पुरुष ही इसके लिए आगे आए. यह आंकड़ा लक्ष्य का मात्र 4.30 प्रतिशत है, जो पुरुषों की भारी उदासीनता और हिचकिचाहत को साफ दर्शाता है.

भ्रांतियों का शिकार हैं पुरुष, डर दूर करने में जुटा विभाग: डीपीएम

मामले की जानकारी देते हुए डीपीएम गौरव कुमार ने कहा कि महिलाएं अपनी और परिवार की सेहत को लेकर अधिक गंभीर हैं, जिसके कारण वे खुद आगे आकर बंध्याकरण करा रही हैं. यही वजह है कि गढ़वा में लक्ष्य से ज्यादा उपलब्धि हासिल हुई है.डीपीएम गौरव कुमार का कहना हैं कि पुरुष नसबंदी बेहद सरल, सुरक्षित और बिना चीरे-टांके की प्रक्रिया होने के बावजूद पुरुष इसके नाम से ही कतरा रहे हैं. ग्रामीण इलाकों में आज भी पुरुषों के बीच यह अंधविश्वास और भ्रांति फैली हुई है कि नसबंदी कराने से शारीरिक कमजोरी आती है. इसी काल्पनिक डर और सामाजिक झिझक के कारण पुरुष अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रहे हैं .डीपीएम ने बताया कि पुरुषों के इस डर और हिचकिचाहत को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब कमर कस चुका है. इसके लिए ग्रामीण स्तर पर पुरुषों की विशेष काउंसलिंग की जा रही है, ताकि वे अपनी रूढ़िवादी सोच को छोड़कर आबादी नियंत्रण के इस अभियान में महिलाओं का साथ दें और बराबर के भागीदार बनें.

ये भी पढ़ें: जंगल में बैठकर फर्जी APK से करते थे ठगी, गिरिडीह पुलिस ने पांच साइबर अपराधियों को किया गिरफ्तार

ये भी पढ़ें: ग्रेजुएट ट्रेंड टीचरों को मिलेगा समान वरीयता और अपग्रेड वेतन का लाभ, झारखंड हाईकोर्ट का आदेश


विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola