चार ट्रांसमिशन टावर ध्वस्त, बिजली बहाल होने में लगेगा एक महीना
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 31 Mar 2024 9:02 PM
लहलहे-भागोडिह ट्रांसमिशन लाइन के चार टावर ध्वस्त, बिजली बहाल होने में लगेगा एक महीना
शनिवार की शाम आयी तेज आंधी में बिजली व्यवस्था चरमराने के बाद रविवार की शाम तक बिजली आपूर्ति की तैयारी चल रही थी. इसी बीच रविवार की शाम फिर आयी आंधी से गढ़वा जिले के डंडा प्रखंड के चौरसिया टोला में भागोडिह सेंट्रल ट्रांसमिशन लाइन के चार बड़े टावर ध्वस्त हो गये. बताया जाता है कि एक टावर शनिवार को गिरा था तथा तीन अन्य रविवार को ध्वस्त हो गये. इसने पिछले 20 घंटों से बिजली की उम्मीद लगाये गढ़वा वासियों को संकट में डाल दिया है. बताया जा रहा है कि उसे ठीक होने में एक महीना से अधिक का समय लग सकता है. ऐसे में गर्मी में लोगों को इस परेशानी का सामना करना पड़ेगा. विदित हो कि पलामू के लहलहे सेंट्रल ट्रांसमिशन लाइन 220 केवीए गढ़वा के भागोडिह पहुंचा है. यहां यह 1.32 लाख केवीए बनकर रेहला के बी- मोड़ पहुंचता है. इससे गढ़वा जिले को 33 हजार केवीए से बिजली आपूर्ति की जाती है. बताया जा रहा है कि वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में उतर प्रदेश के रिहंद और बिहार के सोन नगर से बिजली लेनी पड़ेगी. इसके बावजूद गढ़वा को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पायेगी. मिली जानकारी के अनुसार सोननगर से मिलने वाली बिजली रेहला बी-मोड़ से रेलवे को दी जाती है. वहां से एक दो मेगावाट कुछ घंटों के लिये गढ़वा को मिल सकती है. इसे रोटेशन के अनुसार पूरे गढ़वा जिले में एक दो घंटे के लिए बिजली दी जा सकती है.
मई 2023 में टावर गिरने पर तीन महीना लगा थाउल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में आंधी में गढ़वा के मेढ़ना ट्रांसमिशन लाइन के दो टावर ध्वस्त हो गया था. इसे ठीक होने में तीन महीना लग गया था. अगस्त 2023 में बिजली की आपूर्ति बहाल की जा सकी थी. जबकि इस बार चार टावर गिरा है तथा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इसे टीक होने में एक माह का समय लग सकता है.
वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है : अधीक्षण अभियंताबिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता असगर अली ने इस संबंध में बताया कि रविवार की शाम पुन: आयी आंधी में लहलहे-भागोडिह सेंट्रल ट्रांसमिशन लाइन का चार टावर गढ़वा के डंडा प्रखंड के चौरसिया टोला के पास ध्वस्त हो गया है. इसे खड़ा करने में एक महीने का समय लग सकता है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में बिजली के मामले में गढ़वा की जो स्थिति थी, वहीं स्थिति फिर आ गयी है. वैकल्पिक व्यवस्था के लिए रिहंद और सोन नगर से बिजली की व्यवस्था की जा रही है. इसे रोटेशन के आधार पर विभिन्न इलाके को घंटा दो घंटा बिजली देने का प्रयास किया जायेगा, ताकि पेयजल संकट न हो.
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