संदिग्ध साक्ष्य मिलमें पर फर्जी सीएससी सेंटर को किया सील

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संदिग्ध साक्ष्य मिलमें पर फर्जी सीएससी सेंटर को किया सील

संदिग्ध साक्ष्य मिलमें पर फर्जी सीएससी सेंटर को किया सील

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प्रतिनिधि, गढ़वा

सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने क्षेत्र भ्रमण के दौरान मेराल प्रखंड के पचफेड़ी स्थित विशाल कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) में औचक जांच की. जांच के दौरान ऐसे कई प्राथमिक साक्ष्य मिले, जिनसे बिना वैध प्रक्रिया और बिना समुचित जांच के फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाये जाने की आशंका हुई. मौके पर एसडीएम ने मेराल अंचल अधिकारी को निर्देश देते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया. टीम में अंचल अधिकारी यशवंत नायक, सीएससी मैनेजर मनीष कुमार और थाना प्रभारी विष्णुकांत शामिल हैं. टीम ने केंद्र पर पहुंचकर गहन पड़ताल की, जिसमें कई दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य संदिग्ध और आपत्तिजनक पाये गये. जांच के दौरान इस केंद्र से लैपटॉप, मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड, बैंक खाते संबंधी विवरण और अन्य दस्तावेज जब्त किये गये. इनकी तकनीकी और दस्तावेजी जांच की जा रही है. जांच पूरी होने तक अनुमंडल पदाधिकारी के निर्देश पर केंद्र को सील कर दिया गया है.

कॉफी विद एसडीएम का कार्यक्रम में मिली थी शिकायत

एसडीएम ने बताया कि उनके साप्ताहिक जनसंवाद कार्यक्रम “कॉफी विद एसडीएम” में भी कई बार शिकायतें मिली थीं कि कुछ तथाकथित प्रज्ञा केंद्र संचालक और फर्जी सीएससी केंद्रों के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियां हो रही हैं. उन्होंने कहा कि अनुमंडल क्षेत्र में इस प्रकार के अवैध कार्यों पर रोक लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. एसडीएम ने आम नागरिकों से अपील की कि जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज किसी बिचौलिये या अनधिकृत केंद्र के माध्यम से न बनवायें, बल्कि सरकारी प्रक्रिया का ही पालन करें.

अधिकृत नहीं होने के बावजूद लगा था सीएससी का मोनोग्राम

जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित केंद्र पर सीएससी का मोनोग्राम लगा हुआ था, जबकि यह अधिकृत सीएससी केंद्र नहीं है. केंद्र से बरामद आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर उन लोगों से भी पूछताछ की जाएगी, जिन्होंने यहां से प्रमाण पत्र बनवाए हैं. एसडीएम ने बताया कि प्रारंभिक जांच में गोंदा, मेराल का एक युवक संदिग्ध पाया गया है. इसके अलावा पलामू जिले के पंजरी गांव का एक व्यक्ति भी इस मामले में संलिप्त पाया गया है. जांच में सामने आया कि आरोपी लोग आवेदकों से केवल मौखिक रूप से जन्मतिथि और अन्य विवरण लेते थे और व्हाट्सऐप के माध्यम से प्रमाण पत्र तैयार कर देते थे. प्रत्येक प्रमाण पत्र के एवज में 1000 से 1400 रुपये लिए जाते थे. एसडीएम ने बताया कि पूरे मामले की जानकारी जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को उपलब्ध करा दी गई है और उनके निर्देशानुसार आगे की जांच जारी है.

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Akarsh Aniket

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