उम्र को मात देकर सेवा और समर्पण की दे रहे मिसाल

उम्र को मात देकर सेवा और समर्पण की दे रहे मिसाल
राजकमल तिवारी, गढ़वा कहते हैं उम्र महज एक आंकड़ा है. जब व्यक्ति मन से थकता है, तभी वह रुकता है. लेकिन यदि सेवा का जज्बा और समाज के लिए कुछ करने का संकल्प हो, तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती. गढ़वा के तीन ऐसे शख्स हैं, जो अपनी सेकेंड इनिंग में भी निरंतर सक्रिय रहते हुए समाज के लिए प्रेरणा बन गये हैं. हर सप्ताह नि:शुल्क जांच शिविर लगाते हैं डॉ एनके रजक गढ़वा के पूर्व सिविल सर्जन डॉ एनके रजक वर्ष 2021 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी समाजसेवा में लगातार सक्रिय हैं. वे 1994 से लायंस क्लब ऑफ गढ़वा विशाल से जुड़े और संगठन में अध्यक्ष, सेक्रेटरी व निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं. वर्तमान में वे क्लब एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं. इसके साथ ही वे आईएमए (भारतीय चिकित्सा संघ) गढ़वा इकाई के संस्थापक हैं और वर्तमान में अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं. सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने प्रियदर्शिनी अस्पताल की स्थापना की, जहां हर रविवार निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाया जाता है. इन शिविरों में मरीजों की बोन डेंसिटी की मुफ्त जांच की जाती है. डॉ रजक कहते हैं यदि मन में सेवा की भावना हो तो यह अंतिम सांस तक जारी रहनी चाहिए. मेरा प्रयास है कि मैं हमेशा जरूरतमंदों के लिए उपलब्ध रहूं. बिना थके, निरंतर सक्रिय हैं डॉ मुरली प्रसाद गुप्ता गढ़वा के प्रसिद्ध समाजसेवी डॉ मुरली प्रसाद गुप्ता 1974 के जेपी आंदोलन के दौरान गढ़वा के संयोजक थे. पिछले 12 वर्षों से वे भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, गढ़वा जिला इकाई के अध्यक्ष पद पर कार्यरत हैं. वे गढ़वा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के आजीवन सदस्य हैं और लायंस क्लब गढ़वा विशाल के संस्थापक सदस्यों में शामिल हैं. 1989 से 1994 तक गढ़वा बाजार समिति में व्यावसायिक प्रतिनिधि भी रहे. उनका कहना है कि व्यक्ति मन से थकता है. यदि सेवा की भावना और संकल्प हो, तो उम्र कभी भी रुकावट नहीं बनती. निरंतर सक्रिय रहना ही जीवन का मूल मंत्र है. अध्यात्म का अलख जगा रहे हैं उपेंद्रनाथ मिश्रा गढ़वा शहर के सहिजना निवासी उपेंद्रनाथ मिश्रा (70 वर्ष) आज भी पूरे उत्साह के साथ समाज की सेवा के लिए सक्रिय हैं. वे 1994 से विहंगम योग संस्थान से जुड़े हुए हैं और योग, साधना व आध्यात्मिक जागरण के कार्यक्रमों में जिला व राज्य स्तर पर कार्य कर रहे हैं. संस्थान के जरिए न केवल भारत में, बल्कि 54 अन्य देशों में भी आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. संस्था गौ सेवा और गुरुकुलम संचालन का कार्य भी करती है. उपेंद्रनाथ मिश्रा कहते हैं कि अध्यात्म से जहां मानसिक शांति मिलती है, वहीं सकारात्मक ऊर्जा भी प्राप्त होती है.
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