छठ व्रतियों ने अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को दिया अर्घ

Author Sanjay
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छठ व्रतियों ने अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को दिया अर्घ

छठ व्रतियों ने अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को दिया अर्घ

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गढ़वा. चैती छठ को लेकर व्रतियों ने खरना के बाद दूसरे दिन गुरुवार को दिनभर उपवास रखा और शाम को अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ दिया. शहर के दानरो नदी तट पर शाम में भगवान भास्कर को अर्घ देने के लिए व्रतियों की भीड़ थी. छठ घाट पर ध्वनि विस्तारक यंत्र से छठ गीत गूंज रहे थे. वहीं व्रती भी आने-जाने के क्रम में केरवा जे फरले घवद से…, केरवा के पात पर उगले सूरज देव झांकी-झुंकी…जैसे छठ गीत गा रही थीं. दानरो नदी छठ घाट पर स्टूडेंट क्लब व फ्रेंडस क्लब ने व्रतियों की सुविधा के लिए जरूरी व्यवस्था की थी. उधर उस पार टंडवा की ओर जयदेवी संघ ने व्रतियों के लिए व्यवस्था की थी. वहीं पंडाल में भगवान भास्कर की तसवीर बनाकर प्रदर्शित की थी. दानरो नदी में स्टूडेंट क्लब और फ्रेंडस क्लब के छठ घाट पर नदी में पर्याप्त पानी नहीं रहने के कारण व्रतियों के नहाने के लिए नल की व्यवस्था की थी. साथ ही व्रतियों की सुविधा के लिए नदी की साफ-सफाई, रोशनी और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए ध्वनि विस्तारक यंत्र की व्यवस्था थी. शहर के बाहर से भी आते हैं छठ व्रती : उल्लेखनीय है कि दानरो नदी स्टूडेंट क्लब छठ घाट पर गढ़वा शहर के अलावे बाहर से भी काफी संख्या में छठ व्रती छठ करने आते हैं. यद्यपि चैती छठ में व्रतियों की संख्या कम रहती है. पर इस वष काफी संख्या में व्रतियों को छठ घाट पर देखा गया. इन व्रतियों के लिए संस्था की ओर से नदी घाट पर स्टूडेंट क्लब के सदस्यों ने जरूरी व्यवस्था बहाल की है.इसी तरह शहर के सहिजना छठ घाट पर छठ सेवा समिति सहिजना ने व्रतियों की जरूरतों का ख्याल रखा है. विदित हो कि सहिजना छठ घाट पर व्रती रात भर रहकर भगवान भास्कर की अराधना करते हैं. उदीयमान सूर्य को अर्घ के साथ होगा समापन छठ व्रत का समापन शुक्रवार की सुबह उदीयमान सूर्य के अर्घ के साथ हो जायेगा. शुक्रवार को छठ घाट पर व्रतियों के अर्घ देते देखने और उनसे छठ का प्रसाद लेने के लिए काफी संख्या में लोग रहेंगे. इधर छठ महापर्व को लेकर प्रशासन ने नदी घाट पर सुरक्षा को लेकर पुलिस बल तैनात किये थे. नदी तट के छठ घाटों पर जुटे श्रद्धालु गढ़वा जिले में छठ पर्व को लेकर सभी प्रमुख नदियों के छठ घाटों पर श्रद्धालुओं ने पहुंचकर भगवान सूर्य की अराधना की. जिले की सोन, कोयल, पंडा, कनहर, तहले व बांकी नदियों के किनारे हर वर्ष की तरह व्रतियों ने छठ व्रत किया. छठ घाटों पर स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा व्रतियों के लिए टेंट, रोशनी व साफ-सफाई की व्यवस्था की गयी थी.

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